हिंदू धर्म में किसी भी अन्य तिथि की ही तरह एकादशी तिथि का भी विशेष महत्व है। हर महीने में दो बार एकादशी तिथि पड़ती है। जिसमें हिंदू पंचांग के अनुसार यह तिथि किसी भी महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के ग्यारहवें दिन पड़ती है। मान्यता है कि इसदिन जो व्यक्ति विष्णु जी का पूजन पूरे श्रद्धा भाव से करता है उसकी सभी मनोकामनाओं को पूर्ति होती है। शास्त्रों की मानें तो, एकादशी व्रत का पालन करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है। किसी भी महीने में पड़ने वाली एकादशी तिथियों की ही तरह सितंबर महीने में पड़ने वाली परिवर्तिनी और इंदिरा एकादशी बहुत खास हैं और इनका अपना अलग महत्व है। आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें सितंबर महीने में पड़ने वाली सभी एकादशी की सही तिथियां, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि इस व्रत के महत्व के बारे में विस्तार से।
परिवर्तिनी एकादशी 2025 कब है?
परिवर्तिनी एकादशी का व्रत हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पड़ता है। इस साल यह तिथि 03 सितंबर को पड़ रही है।
- एकादशी तिथि का आरंभ- 03 सितंबर, बुधवार प्रातः 03 बजकर 53 मिनट से
- एकादशी तिथि का समापन- 04 सितंबर, गुरुवार को प्रातः 4 बजकर 21 मिनट तक
- ऐसे में उदया तिथि के अनुसार एकादशी तिथि का व्रत 03 सितंबर को रखना ही शुभ होगा।
- एकादशी व्रत का पारण 04 सितंबर, गुरुवार को किया जाएगा।

परिवर्तिनी एकादशी पूजा का शुभ मुहूर्त
परिवर्तिनी एकादशी पर कई शुभ मुहूर्त मिल रहे हैं-
- ब्रह्म मुहूर्त- 03 सितंबर प्रातः 04:52 से प्रातः 05:38 तक
- अमृत काल- 03 सितंबर, शाम 06:05 से शाम 07:46 पीएम तक
- पारण का शुभ मुहूर्त-04 सितंबर, दोपहर 01:36 से शाम 04:07 तक है और आप इसी मुहूर्त में व्रत खोल सकती हैं।
परिवर्तिनी एकादशी का महत्व क्या है?
हिंदू धर्मग्रंथों में वर्णित है कि परिवर्तिनी एकादशी का स्थान सभी एकादशी तिथियों में बेहद ख़ास है। इसे पद्मा एकादशी और जलझूलनी एकादशी भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान जब भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा धारण करते हैं, तब इस एकादशी के दिन वो पहली बार करवट बदलते हैं। यही कारण है कि इसे ‘परिवर्तिनी’ यानी करवट बदलने वाली एकादशी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त इस दिन व्रत और पूजन करते हैं उनके जीवन में भगवान विष्णु की कृपा सदैव बनी रहती है। यही नहीं इस दिन किया गया पूजन विष्णु जी की कृपा प्राप्त करने का सबसे अच्छा तरीका माना जाता है। यही नहीं इस व्रत को करने से जीवन में नए उत्साह एवं सौभाग्य की शुरुआत भी होती है और सभी मनोकामनाओं को पूर्ति होती है।
इंदिरा एकादशी 2025 कब है?
- अश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी यानी इंदिरा एकादशी इस साल 17 सितंबर, बुधवार को पड़ेगी।
- इंदिरा एकादशी आरंभ- 16-17 सितंबर, मध्यरात्रि 12.21 पर
- इंदिरा एकादशी तिथि समापन- 17 सितंबर, बुधवार, रात्रि,11.39 पर
- पूजा का शुभ मुहूर्त - 17 सितंबर, प्रातः 6:07 से प्रातः 9:11 तक
- व्रत पारण का समय - 18 सितंबर, प्रातः 6.07 से प्रातः 8:34 तक
इंदिरा एकादशी का महत्व क्या है?
इस साल इंदिरा एकादशी का व्रत 21 सितंबर, बुधवार को रखा जाएगा। यह तिथि और ज्यादा विशेष है क्योंकि यह पितृ पक्ष के दौरान आती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की आराधना और व्रत के साथ जरुरतमंदों को दान देने से न केवल भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है, बल्कि पितरों का आशीर्वाद भी मिलता है। पद्म पुराण के अनुसार, इंदिरा एकादशी का व्रत करने से सात पीढ़ियों तक के पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। यही नहीं यदि इस व्रत से अर्जित पुण्य को पूर्वजों के नाम समर्पित किया जाए तो उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही, व्रती लोग स्वयं भी पापों से मुक्त होकर विष्णु लोक यानी बैकुंठ धाम को प्राप्त करते हैं।
यदि आप भी हर महीने एकादशी का व्रत करती हैं तो यहां से सितंबर में पड़ने वाली तिथियों के बारे में विस्तार से जानकारी ले सकती हैं। आपको यह स्टोरी अच्छी लगी हो तो इसे फेसबुक पर शेयर और लाइक जरूर करें। इसी तरह और भी आर्टिकल पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से। अपने विचार हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।
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