गुरुवार के दिन जरूर करें नारायण अष्टकम का पाठ, भगवान विष्णु होंगे प्रसन्न

गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित है, इस दिन भगवान विष्णु की पूजन अर्चना की जाती है। बहुत से लोग अपने गुरु ग्रह को मजबूत करेने, जीवन में सुख-शांति और समृद्धि के लिए बृहस्पतिवार का व्रत करते हैं। गुरुवार का व्रत रखते हैं, तो पूरे विधि-विधान से पूजा करें और फिर कथा पढ़ने के बाद नारायण आष्टकम का पाठ करने से मनुष्य को बहुत से लाभ मिलते हैं। हमारे एस्ट्रो एक्सपर्ट शिवम पाठक ने इस पाठ के फायदे के बारे में बताया है, चलिए जानते हैं इसके बारे में...
श्री नारायणाष्टकम्/Shri Narayana Ashtakam

वात्सल्यादभयप्रदानसमयादार्तार्तिनिर्वाणा दौदार्यादघशोषणादगणितश्रेय: पदप्रापणात् ।
सेव्य: श्रीपतिरेक एव जगतामेतेऽभवन्साक्षिण: प्रहलादश्च विभीषणश्च करिराट् पांचाल्यहल्या ध्रुव” ।।1।।
प्रहलादास्ति यदीश्वरो वद हरि: सर्वत्र मे दर्शय स्तम्भे चैवमिति ब्रुवन्तमसुरं तत्राविरासीद्धरि: ।
वक्षस्तस्य विदारयन्निजनखैर्वात्सल्यमापादयन्नार्तत्राणपरायण: स भगवान्नारायणो मे गति: ।।2।।
श्रीरामात्र विभीषणोऽयमनघो रक्षोभयादागत: सुग्रीवानय पालयैनमधुना पौलस्त्यमेवागतम् ।
इत्युक्त्वाभयमस्य सर्वविदितं यो राघवो दत्तवानार्त ।।3।।
नक्रग्रस्तपदं समुद्धतकरं ब्रह्मादयो भो सुरा: पाल्यन्तामिति दीनवाक्यकरिणं देवेश्वशक्तेषु य: ।
मा भैषीरिति यस्य नक्रहनने चक्रायुध: श्रीधर । आर्त ।।4।।
भो कृष्णाच्युत भो कृपालय हरे भो पाण्डवानां सखे क्वासि क्वासि सुयोधनादपह्रतां भो रक्ष मामातुराम् ।
इत्युक्तोऽक्षयवस्त्रसंभृततनुं योऽपालयद्द्रौपदीमार्त ।।5।।
यत्पादाब्जनखोदकं त्रिजगतां पापौघविध्वंसनं यन्नामामृतपूरकं च पिबतां संसारसंतारकम् ।
पाषाणोऽपि यद्न्घ्रिपद्मरजसा शापान्मुनेर्मोचित । आर्त ।।6।।
पित्रा भ्रातरमुत्तमासनगतं चौत्तानपादिर्ध्रुवो दृष्ट्वा तत्सममारूरुक्षुरधृतो मात्रावमानं गत: ।
यं गत्वा शरणं यदाप तपसा हेमाद्रिसिंहासनमार्त ।।7।।
आर्ता विषन्णा: शिथिलाश्च भीता घोरेषु च व्याधिषु वर्तमाना: ।
संकीत्र्य नारायणशब्दमात्रं विमुक्तदु:खा: सुखिनो भवन्ति ।।8।।
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नारायण आष्टक पाठ के लाभ

- नियमित पाठ से मन को शांति और आध्यात्मिक संतुष्टि मिलती है।
- यह पाठ जीवन के कष्टों और समस्याओं से मुक्ति दिलाने में सहायक है।
- पानारायण आष्टक के पाठ से पापों का नाश होता है।
- भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में धन और समृद्धि का आगमन होता है।
- यह पाठ भय और चिंता को दूर कर साहस और आत्मविश्वास प्रदान करता है।
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