March Pradosh Vrat 2026: 29 या 30 मार्च, कब रखा जाएगा मार्च महीने का आखिरी प्रदोष व्रत? यहां जानें सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व

किसी भी महीने की त्रयोदशी तिथि को विशेष माना जाता है और इसमें भगवान शिव का पूजन किया जाता है। त्रयोदशी तिथि के दिन ही प्रदोष व्रत रखा जाता है और पूरे साल में 24 प्रदोष व्रत पड़ते हैं। वहीं हर महीने दो प्रदोष व्रत रखे जाते हैं। यह व्रत विशेष रूप से भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से माता पार्वती और शिव जी की पूजा करने से भक्तों को सुख, समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। इस साल मार्च के महीने में पड़ने वाले प्रदोष व्रत की सही तिथि को लेकर दुविधा की स्थिति बनी हुई है कि मार्च महीने का आखिरी प्रदोष व्रत 29 मार्च को है या 30 मार्च को? ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि भक्तजन विधि पूर्वक पूजा करते हैं तो जीवन में खुशहाली बनी रहती है। आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें मार्च महीने के आखिरी प्रदोष व्रत की सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व क्या है?
मार्च महीने का आखिरी प्रदोष व्रत 2026 कब है?

इस साल मार्च महीने का आखिरी प्रदोष व्रत 30 मार्च, सोमवार के दिन पड़ेगा और सोमवार को पड़ने की वजह से इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाएगा।
- त्रयोदशी तिथि आरंभ- 30 मार्च, सोमवार, प्रातः 7:10 बजे
- त्रयोदशी तिथि समापन- 31 मार्च, मंगलवार, प्रातः 6:57 बजे तक।
- चूंकि प्रदोष काल 30 मार्च को ही पड़ रहा है, इसलिए सोम प्रदोष व्रत 30 मार्च को रखना ही फलदायी होगा।
- 30 मार्च को अनंग त्रयोदशी का संयोग भी बनेगा।
सोम प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
- किसी भी प्रदोष व्रत और त्रयोदशी तिथि की पूजा के लिए प्रदोष काल का समय सबसे शुभ माना जाता है।
- शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फलों की प्राप्ति होती है।
- मार्च महीने का सोम प्रदोष व्रत 30 मार्च, सोमवार को रखा जाएगा और इस दिन की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 52 मिनट से 7 बजकर 22 मिनट तक रहेगा।
- प्रदोष काल का समय सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद तक होता है।
- यदि आप इसी शुभ मुहूर्त में भगवान शिव की पूजा करेंगी तो जीवन में सुख, शांति और खुशहाली बनी रहेगी।
मार्च सोम प्रदोष व्रत का महत्व क्या है?

धार्मिक मान्यता है कि मार्च महीने के सोम प्रदोष व्रत के दिन पूजन करने से भगवान शिव का पूर्ण आशीर्वाद मिलता है। इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और उसे पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। यही नहीं इस दिन व्रत करने से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन जो व्यक्ति विधि पूर्वक पूजा करता है और रात्रि जागरण करता है उसके ऊपर सदैव भगवान शिव की विशेष कृपा बनी रहती है और जीवन में सभी संकट दूर होते हैं। यही नहीं सोम प्रदोष का व्रत करने वाले व्यक्ति की संतान की सेहत अच्छी बनी रहती है और जो दंपत्ति संतान प्राप्ति की इच्छा रखते हैं उनकी यह मनोकामना भी सोम प्रदोष का व्रत करने से पूर्ण होती है।
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सोम प्रदोष व्रत पूजा विधि
- जो लोग प्रदोष का व्रत करते हैं उन्हें इस दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नान आदि से मुक्ति होकर साफ़ वस्त्र धारण करने चाहिए।
- अपने हाथ में थोड़े से अक्षत लेकर व्रत का संकल्प करें और सुबह भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें।
- पूरे दिन त्रयोदशी के व्रत का पालन करने के बाद प्रदोष काल में विधि-विधान के साथ शिव जी पूजा करें और सोम प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें। इस दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना बहुत शुभ माना जाता है।
- इस इन शिव चालीसा का पाठ करना भी बहुत शुभ माना जाता है और शिव जी की आरती करें।
- आरती के बाद भगवान शिव को प्रसाद चढ़ाएं और भोग पूरे परिवार को अर्पित करें।
यदि आप यहां बताई विधि के अनुसार सही समय पर सोम प्रदोष व्रत की पूजा करेंगी, तो आपके जीवन में शुभता बनी रहेगी। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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