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क्या आप भी होली पर निकालते हैं पितरों के लिए नए कपड़े? जानें कब और कैसे करें दान

Holi Pitru Puja Rules: होली के दिन अगर आप भी अपने पितरों के लिए नए कपड़े खरीदते हैं और उनका दान करते हैं तो यह जानना आपके लिए बहुत जरूरी है कि होली के दिन किस समय और कैसे पितरो के वस्त्रों का दान करना चाहिए? आइये जानते हैं इस लेख में। 
Updated:- 2026-03-02, 13:51 IST
holi pitru puja rules

होली का त्यौहार इस साल 4 मार्च 2026 को मनाया जा रहा है। होली के दिन जहां एक ओर अपने इष्ट देव और परिजनों को रंग लगाकर धुलेंडी खेली जाती है तो वहीं, दूसरी ओर इस दिन पितरों के लिए नए वस्त्रों का दान करने का भी विधान है। धर्म शास्त्रों में भी बताया गया है कि बड़े पर्वों पर अपने पितरों के लिए दान करना बहुत लाभकारी होता है। ठीक ऐसे ही होली पर पितरों के लिए नए कपड़े खरीदकर उनका दान करना भी बहुत शुभ माना जाता है। जहां एक ओर इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है तो वहीं, दूसरी ओर पितृ दोष से व्यक्ति को छुटकारा मिल जाता है। हालांकि वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स ने हमें बताया कि अधिकतर लोग यह नहीं जानते हैं कि होली के दिन किस समय में और कैसे पितरों के नए कपड़ों का दान करना चाहिए? ऐसे में आइये जानते हैं इस बारे में विस्तार से। 

होली पर कब और कैसे निकालें पितरों के कपड़े? 

पितरों के लिए वस्त्र और दान निकालने का सबसे शुभ समय होलिका दहन की सुबह माना गया है। आप पहले से पितरों के कपड़े खरीदकर घर में लाकर रख सकते हैं लेकिन होलिका दहन के दिन सुबह के समय उन्हें एक थाली में निकालकर घर के मंदिर के सामने रखें।

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इसके बाद भगवान से प्रार्थना करें कि आपके पूर्वज जहां भी हैं वहां खुश और संतुष्ट रहें और फिर प्रार्थना समाप्त होने के बाद पितरों का ध्यान करते हुए उन्हें यह कपड़े अर्पित करें। यानी कि उन्हें बताएं कि आप त्यौहार पर उनके लिए नए वस्त्र खरीदकर लाए हैं।

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जब होलिका दहन की पूजा संपन्न हो जाए तब पूर्णिमा तिथि के दिन यानी कि फाल्गुन पूर्णिमा के ब्रह्म मुहूर्त में पूर्वजों के निमित्त लाए इन कपड़ों को किसी ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद को दान कर दें। अगर सुबह के समय दान संभव नहीं तो सूर्यास्त होने के पहले दान अवश्य करें।

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ध्यान रहे कि अगर आप रात के समय या सूर्यास्त के बाद दान करते हैं तो ऐसे दान का कोई लाभ नहीं होगा और आपके पूरवज आपसे नाराज हो सकते हैं। इस बात का भी विशेष ध्यान रखें कि या तो पितरों के कपड़े लाए ही नहीं और अगर ला रहे हैं तो होली के दिन ही दान करें।  

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image credit: herzindagi 

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