खुश और सफल जीवन के लिए जरूर अपनाएं ये 21 गोल्डन रूल्स

स्अधिकतर लोग अपनी हर समस्या के लिए आसपास के लोगों, मौजूदा हालात और किस्मत को दोषी ठहराते हैं। जीवन के मुश्किल दौर में जाने-अनजाने अधिकतर लोगों के मन में अक्सर ऐसे नेगेटिव विचार आते हैं, लेकिन दिमागी सुकून और जिंदगी में खुशहाली लाने के लिए निरंतर अभ्यास के साथ अपने मन से ऐसी बातों को बाहर निकालने की कोशिश करनी चाहिए।
मनोविज्ञान के अनुसार व्यक्ति में पॉजिटिव सोच के विकास के लिए कई तत्व जिम्मेदार होते हैं, जिन्हें साइकोलॉजिकल कैपिटल कहा जाता है। जैसे-अपने आसपास के लोगों पर भरोसा करना और मुश्किल हालात में भी हमेशा इस बात की उम्मीद रखना कि हमारे प्रयास से जल्द ही सब कुछ ठीक हो जाएगा। विभिन्न प्रतिष्ठित मेडिकल रिसर्च संस्थाओं के विशेषज्ञों का कहना है कि पॉजिटिव सोच रखने वाले लोग स्वस्थ और दीर्घायु होते हैं। उनकी कार्य-कुशलता में वृद्धि होती है और नेतृत्व जैसे गुणों का विकास होता है।
अच्छा सोचने वाले लोगों में तनाव और डिप्रेशन जैसी मनोवैज्ञानिक समस्याओं की आशंका नहीं होती। इससे शरीर की इम्यूनिटी बढ़ती है और व्यक्ति शारीरिक रूप से भी स्वस्थ रहता है। डायबिटीज, हाई ब्लडप्रेशर और दिल रोग जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से भी बचाव होता है। वैज्ञानिकों द्वारा किए गए कई अध्ययनों से यह साबित हो चुका है कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार के दौरान अगर व्यक्ति सकारात्मक नजरिया अपनाए तो उसकी सेहत में तेजी से सुधार होता है। इसी वजह से आजकल शारीरिक रोगों के उपचार दौरान लोगों को पॉजिटिव सोच अपनाने की सलाह दी जाती है।
इतना ही नहीं, जब व्यक्ति का तन स्वस्थ और मन प्रसन्न हो तब सहज रूप से उसका आध्यात्मिक उत्थान भी होता है। दरअसल, हमारा ब्रेन किसी भूमि के टुकड़े की तरह होता है, जिस पर रंग-बिरंगे फूलों से भरा बागीचा तैयार करने के लिए प्रतिदिन मेहनत के साथ बागवानी करने की जरूरत होती है। अन्यथा, इसमें खर-पतवार, उग आती है। इसलिए मन के उपवन को सकारात्मक विचारों से सुसज्जित रखने के लिए हमें इसकी भी सफाई करके अच्छे संस्कारों के बीज रोपने की जरूरत होती है। आइए खुद से यह वादा करें कि सफलता के इन 21 सुनहरे नियमों को अपनाकर हम प्रसन्नता के पथ पर आगे बढ़ेंगे। इनके बारे में हमें वेलनेस एक्सपर्ट एवं लाइफ कोच डॉ.अभिलाषा द्विवेदी बता रही हैं।

1. मनोविज्ञान की भाषा में अक्सर माइंडफुलनेस नामक शब्द का प्रयोग किया जाता है। इसका अर्थ है कि हमें अपने दिमाग को खाली नहीं छोड़ना चाहिए। जिन लोगों में यह गुण होता है, वे वर्तमान के हर पल में सजग, सक्रिय और प्रसन्न रहते हैं। न्यूयॉर्क के फैमिली एडिक्शन एक्सपर्ट सेंटर के विशेषज्ञ भी इस बात पर जोर देते हुए कहते हैं कि सचेत रहना एक स्वस्थ आदत है, जिसे सभी को अपनाना चाहिए।
2. प्रतिदिन सुबह यह संकल्प लें कि आज का मेरा यह दिन बहुत शुभ होगा, चाहे मेरे सामने कितनी ही उलझनें क्यों न आएं, मैं शांत चित्त होकर उनका समाधान करूंगा।
3. बातचीत दौरान हमेशा सकारात्मक वाक्यों जैसे-सब ठीक हो जाएगा, हां, मैं यह कार्य कर सकता हूं...का प्रयोग करें। ऐसी आदत आत्मविश्वास बढ़ाने में मददगार होती है।
4. तन-मन को स्वस्थ रखने के लिए एक्सरसाइज, योग और मेडिटेशन को अपने में शामिल करें। ऐसी एक्टिविटीज के बाद ब्रेन से एंडॉर्फिन नामक हैप्पीनेस हॉर्मोन का स्राव होता है, जो पॉजिटीव सोच को तेजी से बढ़ाता है, जिससे क्रोध, उदासी और चिंता जैसी नकारात्मक भावनाएं सहज रूप से दूर हो जाती हैं।
5. सामने आने वाली किसी भी समस्या को देखकर घबराने के बजाय किसी नए अवसर या चुनौती के रूप में स्वीकारें।
6. हमारे ब्रेन की कार्यशैली कुछ ऐसी है कि स्वाभाविक रूप से गलतियों की तरफ हमारा ध्यान सबसे पहले जाता है, इसी वजह हम कई तरह की दुर्घटनाओं से बचे रहते हैं, लेकिन हमेशा बुराइयां ढूंढ़ने की आदत भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। इसलिए हमें सचेत ढंग से अपने आसपास की कुछ नेगेटिव बातों को इग्नोर कर देना चाहिए। किसी भी मुद्दे के दो पहलू होते है, इसलिए हमें अपने ब्रेन को इस ढंग से ट्रेनिंग देनी चाहिए कि वह हमेशा सकारात्मक पक्ष को ही देखे और समझे।
7. अपने घर के आसपास, ऑफिस में और इंटरनेट मीडिया पर पॉजिटिव सोच रखने वाले लोगों से दोस्ती बढ़ाएं। कभी खुशमिजाज लोगों के साथ थोड़ा वक्त बिताकर देखें। कुछ ही मिनटों में आपका तनाव दूर हो जाएगा।
8. किताबें हमारी सबसे अच्छी दोस्त होती हैं। अच्छी सेल्फ-हेल्प बुक्स पढ़ें, जिनकी प्रेरक कहानियां नकारात्मक विचारों को आसपास फटकने भी नहीं देंगी। यूट्यब पर मोटिवेशनल टॉक्स सुनें, स्टडी टेबल के सामने प्रेरक विचारों वाले पोस्टर लगाएं।
9. खुद को सहजता से स्वीकारना सीखें, अपनी खामियों के बारे में सोचकर अकसर उदास रहने के बजाय अपने गुणों को पहचान कर उन पर गर्व महसूस करें।

10. आपके पास जो भी है, उसी में खुश और संतुष्ट रहें क्योंकि हर व्यक्ति अपने आप में खास होता है। हर बात पर दूसरों से अपनी तुलना करने की आदत से बचें क्योंकि यह तनाव का सबसे बड़ा कारण है।
11. यह सोचकर भाग्य को दोष न दें कि मेरा जन्म किसी साधन-संपन्न परिवार में क्यों नहीं हुआ? मेहनत के बल पर खुद अपनी तकदीर बदलने का हौसला रखें।
12. अगर कभी किसी ने मुश्किल वक्त में आपकी मदद की हो तो उसके प्रति आभार व्यक्त करना न भूलें, इससे आपको बहुत अच्छा महसूस होगा।
13. किसी भी समस्या के प्रति 'प्रॉब्लम सॉल्विंग अप्रोच अपनाएं, उसे टालने की कोशिश न करें। अन्यथा छोटी-सी परेशानी बाद में गंभीर रूप धारण कर सकती है।
14. दूसरों की मदद के लिए सदैव तैयार रहें, उनके उदास चेहरे पर वापस लौटने वाली मुस्कान देखकर आपके भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा।
15. जब कंप्यूटर बार-बार हैंग करता है, तो उसे शटडाउन करके रीस्टार्ट करने की सलाह दी जाती है। उसी तरह जब ज्यादा थकान महसूस हो तो खुद को पॉजिटिव एनर्जी से रीचार्ज करने के लिए रोजाना के बोरिंग रूटीन से ब्रेक लेकर थोड़ा खाली वक्त खुद के साथ बिताना भी बहुत ज़रूरी होता है। इससे शरीर और दिमाग नई ऊर्जा के साथ काम करने के लिए तैयार हो जाता है।
16. घर की सफाई और उसके इंटीरियर में फेर-बदल जैसे घरेलू कार्यों में स्वयं को व्यस्त रखें। ऑफिस में अपना वर्क स्टेशन साफ-सुथरा रखें। सुंदर और सुव्यवस्थित वातावरण में रहने से न केवल कार्यक्षमता बढ़ती है, बल्कि मन में सकारात्मक ऊर्जा का भी संचार होता है।
17. तनाव भरी जिंदगी में हंसने के मौके मुश्किल से मिलते हैं, इसलिए हंसने के बहाने ढूंढ़ें, कॉमेडी फिल्में देखें और दोस्तों के साथ गपशप करें, इससे प्रतिकूल स्थितियों में भी आपका मनोबल कायम रहेगा।
18. अपनी रुचि से जुड़ी किसी भी एक्टिविटी जैसे-कुकिंग, म्यूजिक,डांस या गार्डनिंग के लिए समय जरूर निकालें। मनोवैज्ञानिकों द्वारा किए शोध से यह साबित हो चुका है कि ऐसी गतिविधियां तनाव दूर करने में सहायक होती हैं।
19. सुबह या शाम के समय खुले आसमान के नीचे प्रकृति के साथ कुछ वक्त बिताना, उगते/डूबते सूरज को निहारना, पंछियों के कलरव सुनना और हरी घास पर टहलना जैसी छोटी-छोटी बातें भी मन को सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर कर देती हैं।
20. बच्चों के साथ खेलें, बुजुर्गों से बातचीत करें। कभी-कभी यूं ही लोगों को उपहार दें, इससे निश्चित रूप से आपको भी बहुत खुशी मिलेगी।
21. अपने सामने कोई बड़ा लक्ष्य रखें और उसी पर अपना ध्यान केंद्रित करते हुए मेहनत करें। जब आपके सामने कोई उद्देश्य होगा तो आप रास्ते में आने वाले हर उतार-चढ़ाव का सामना पूरी हिम्मत के साथ कर पाएंगे और मंजिल तक पहुंचने की इच्छा आपको हमेशा ऊर्जावान बनाए रखेगी।
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