स्मार्टफोन से दूरी क्यों है जरूरी? जानें रोज 60 मिनट के Digital Detox के फायदे
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आज की व्यस्त दिनचर्या में ‘डिजिटल डिटाक्स’ शब्द तेजी से चर्चा में आया है। इसका सीधा मतलब है, कुछ समय के लिए मोबाइल, लैपटाप और अन्य गैजेट्स से दूरी बनाना। आज ज्यादातर काम फोन के जरिए होते हैं, लेकिन काम के अलावा भी हम बार-बार फोन चेक करते रहते हैं। धीरे-धीरे यह आदत लत में बदल जाती है और फिर बिना वजह भी फोन देखने की इच्छा बनी रहती है। ऐसे में खुद को गैजेट्स से अलग करना मुश्किल हो जाता है। इसी आदत पर नियंत्रण पाने की प्रक्रिया को डिजिटल डिटाक्स कहा जाता है। इसका मतलब तकनीक को पूरी तरह छोड़ देना नहीं, बल्कि तय समय के लिए उससे दूरी बनाना है। अध्ययनों के अनुसार, इससे दिमाग की कार्यक्षमता बेहतर होती है।
नींद न आने की समस्या हो सकती है दूर
कई शोध बताते हैं कि दिन में कम से कम एक घंटा डिजिटल डिटाक्स करना फायदेमंद है। इससे नींद की गुणवत्ता सुधरती है, शरीर ज्यादा ऊर्जावान महसूस करता है और रचनात्मकता भी बढ़ती है। बावजूद इसके, ज्यादातर लोग यह तय नहीं कर पाते कि डिटाक्स कब और कितनी देर किया जाए। निमहंस के अनुसार, 2026 में भारतीय औसतन 7 से 8 घंटे रोज स्क्रीन पर बिताते हैं, जो मानसिक थकान का एक बड़ा कारण है।
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न्यूरोसाइंस के मुताबिक, दिमाग को ‘रीसेट’ करने के लिए थोड़े समय का ब्रेक ही काफी होता है। जब हम फोन, टीवी और अन्य डिजिटल उपकरणों से कुछ समय के लिए दूर रहते हैं, तो मस्तिष्क को आराम मिलता है। यह आराम सिर्फ थकान कम करने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दिमाग में नई कोशिकाओं के निर्माण को भी बढ़ावा देता है। इससे सोचने, समझने और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बेहतर होती है।
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निमहंस का ‘शट’ प्रोजेक्ट
निमहंस का ‘शट’ (सर्विस फार हेल्दी यूज आफ टेक्नोलाजी) क्लिनिक तकनीक के अधिक उपयोग से होने वाली समस्याओं के उपचार पर काम करता है। यह भारत का पहला डी-एडिक्शन क्लिनिक है, जहां ऐसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों का इलाज होता है।
ऐसे करें डिजिटल डिटॉक्स
- लंबे समय तक डिटाक्स करना हर किसी के लिए आसान नहीं होता, इसलिए विशेषज्ञ छोटे-छोटे ब्रेक लेने की सलाह देते हैं। हफ्ते में एक दिन या रोजाना एक घंटे का डिटाक्स भी असर दिखा सकता है।
- शुरुआत के लिए रविवार चुन सकते हैं। कोशिश करें कि सुबह से रात तक फोन बंद रखें या उसे दूसरे कमरे में रखें।
- फोन के अधिकतर नोटिफिकेशन बंद कर दें। सिर्फ काल और जरूरी मैसेज ही चालू रखें।
- फोन की स्क्रीन को ब्लैक एंड व्हाइट मोड में रखें। रंगीन स्क्रीन ज्यादा आकर्षित करती है, जबकि सादा मोड डोपामाइन के प्रभाव को कम करता है।
- रील देखने की जगह पेंटिंग, डायरी लिखना या टहलना शुरू करें। हेडफोन के बजाय आसपास की प्राकृतिक आवाजों को सुनें।
- खाना खाते समय टीवी या फोन से दूरी रखें। खाने के स्वाद और खुशबू को महसूस करें। यह भी एक तरह की मानसिक फास्टिंग है।
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निमहंस, बैंगलुरु के क्लिनिकल साइकोलाजिस्ट डा.नितिन आनंद कहते हैं कि हमारी छोटी-छोटी आदतों से डिजिटल डिटाक्स करना आसान हो जाएगा।
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कौन-सी हैं आदतें?
- इमेल देखने और मनोरंजन के लिए फोन पर एक समय निर्धारित करें।
- डाइनिंग टेबल, आराम कक्ष और स्टडी टेबल को डिवाइस फ्री जोन रखें।
- डिजिटल ब्रेक लें, 50 मिनट काम करने के बाद 10 मिनट स्ट्रेचिंह या वाकिंग करें।
- मोबाइल देखने की बजाय किताब पढ़ें या फिर कुछ लिखने की आदत डालें।
- छोटे डिटाक्स- रविवार को पांच घंटे तक फोन से दूरी रखें, कोई सोशल मीडिया का इस्तेमाल ना करें।
- सुबह की शुरुआत फोन से करने की बजाय एक वाक पर निकल जाएं, सुबह के एक घंटे आफलाइन एक्टिविटीज करें।
Written By- Suman Agarwal
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