Valley of Flowers in Uttarakhand: जून में पर्यटकों के लिए खुल गया उत्तराखंड का वेली ऑफ फ्लावर्स, जानें फूलों की घाटी घूमने का खर्च और लोकेशन

उत्तराखंड घूमने का प्लान बना रहे लोगों के लिए वेली ऑफ फ्लावर्स घूमने का अच्छा मौका मिल रहा है। क्योंकि, 1 जून से टूरिस्ट के लिए वेली ऑफ फ्लावर्स खोल दिया गया है। हर साल जून से सितंबर तक हजारों पर्यटक इस घाटी में घूमने का प्लान बनाते हैं। अक्टूबर में अधिकतर इसे यात्रियों के लिए बंद कर जिया जाता है। इस समय बच्चों का समर वेकेशन भी चल रहा है, इसलिए हजारों लोग उत्तराखंड घूमने निकल गए हैं, वहीं कई लोग ऐसे भी हैं जो अभी उत्तराखंड घूमने का प्लान बना रहे हैं। ऐसे में आपके लिए फूलों की इस घाटी में घूमने का अच्छा मौका है। क्योंकि, यह फूलों से भरा हुआ उद्यान पूरे साल नहीं खुला रहता है। आज के इस आर्टिकल में हम आपको वैली ऑफ फ्लॉवर्स के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे।
उत्तराखंड में कहां स्थित है वेली ऑफ फ्लावर्स? (Valley of Flowers Trek)

यह उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है। अगर आप यहां जा रहे हैं, तो समझ जाएं कि आपको यहां लंबा चलना होगा। अगर आप शारीरिक रूप से स्वस्थ है, तो आप इस यात्रा को पूरा कर सकते हैं। ऋषिकेश से चमोली की दूरी लगभग 157 किमी है। इसमें आधा सफर आप गाड़ी से कर सकते हैं, लेकिन बाकी सफर आपको चढ़ाई करके पूरा करना पड़ता है। भले ही सफर में लोगों को कितना भी चलना पड़े, लेकिन इसका नजारा आपको हैरान कर देगा। इसके बाद यहां से लगभग 10 किलोमीटर का पैदल ट्रैक है। अगर आप पैदल यात्रा नहीं कर पाते हं, तो पिट्ठू खच्चर आदि की सुविधा भी उपलब्ध रहती है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें आपको होमस्टे और गेस्ट हाउस में भी रहने का मौका मिल जाएगा। यह समुद्र तल से लगभग 11,800 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।
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वेली ऑफ फ्लावर्स में एंट्री कैसे मिलेगी? (Flowers Valley Registration)

वेली ऑफ फ्लावर्स में एंट्री के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी होती है। बिना रजिस्ट्रेशन के आपको यहां एंट्री नहीं मिलने वाली है। यहां आने के लिए आपको चाराधाम यात्रा की आधिकारिक वेबसाइट registrationandtouristcare.uk.gov.in पर जाना होगा। अगर आप ऑनलाइन बुक नहीं कर पा रहे हैं, तो ऋषिकेश में ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी मिलती है। ध्यान रखें कि फूलों की घाटी ट्रैक पर जाने के लिए अच्छे जूते और जरूरी सामान लेकर जाएं, क्योंकि इसमें आपको 10 किमी की लंबी चढ़ाई करनी पड़ती है।
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