18 मार्च यानी कि रविवार से चैत्र के नवरात्रे शुरू होने वाले हैं। जाहिर आपने इन नवरात्रों को खास बनाने की पूरी तैयारी कर ली होगी। कोई नौ दिन के व्रत रखने वाला होगा तो कोई पहले और आखरी नवरात्रे के ही व्रत रखेगा। हो सकता है कि आप में से कई लोग इस नवरात्रे अपने शहर और घर से बाहर हों। इस कारण अपने शहर के प्रसिद्ध देवी मंदिरों में दर्शन करने का आपको मौका न मिले। मगर आप अगर इस नवरात्रे दिल्‍ली में तो व्रत रखने के साथ ही दिल्‍ली के चार खास देवी मंदिरों के दर्शन जरूर करें। यहां दर्शन कर न केवल आपका व्रत सफल होगा बल्कि ये देवियां आपकी सारी मनोकामना भी पूरी करेंगी। तो चलिए आज आपको बताते हैं दिल्‍ली शहर के प्रसिद्ध देवी मंदिरों के बारे में। 

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कालकाजी मंदिर 

दिल्‍ली के नेहरु प्‍लेस से कुछ ही दूर पर स्थित यह मंदिर शहर के प्राचीन मंदिरों में से एक है। यहा दुर्गा जी के काली स्‍वरूप की पूजा होती है। नवरात्रि के समय इस मंदिर में विशेष आयोजन किए जाते हैं। इस मंदिर को मनोकामना सिद्ध पीठ के नाम से भी जाना जाता है। स्‍थानीय लोगों का मनना है कि इस मंदिर में मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है। सबसे अच्‍छी बात यह है कि देवी जी के इस मंदिर तक पहुंचने के लिए ज्‍यादा मशक्‍कत करने की भी जरूरत नहीं है क्‍योंकि यहां आने के लिए दिल्‍ली में कई लोकल बसें चलती हैं। सबसे अच्‍छी बात तो यह है कि इस मंदिर के नाम से ही एक मेंट्रो स्‍टेशन भी है, जिसका एक गेट सीधे मंदिर की ओर जाता है। यह मंदिर दिखने में जितना सुंदर है इससे जुड़ी कथा उससे भी ज्‍यादा रोचक है। माना जाता है कि महाभारत काल में युद्ध से पहले भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों के साथ मिलकर मां काली की पूजा की थी। उसके बाद मुगल काल में बाबा बालक नाथ ने इस मंदिर की स्‍थापना कराई तब से यह मंदिर इसी स्‍थान पर टिका हुआ है। हर दिन यहां हजारों भक्‍त आकर मां काली के आगे सिर टेकते हैं। यह मंदिर पूरी तरह से संगमरमर का बना हुआ है। 

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झण्डेवालान माता मंदिर 

राजधानी के बीचों बीच स्थित इस मंदिर का भी बहुत महत्‍व है। दिल्‍ली आने वाले देशी विदेशी यात्री इस मंदिर को स्‍पेशली देखने आते हैं। नवरात्रें के समय इस मंदिर में खास व्‍यवस्‍था की जाती है। इसके साथ ही मंदिर परिसर में ही पूरे नौ दिन विशाल भंडारे का इंतजाम भी होता है। वैसे प्रेजेंट टाइम पर यह मंदिर भक्‍तों से भरा रहता मगर एक वक्‍त था जब इस मंदिर के स्‍थान पर कुछ भी नहीं था, केवल साधक यहां बैठ कर देवी की साधना करते थे। इन्‍हीं साधकों में एक कपड़ा व्‍यापारी भी था। उन्‍हें एक दिन रात में सोते वक्‍त सपना आया कि जिस जगह वह देवी की साधना करता है उसी जमीन पर देवी जी का मंदिर दबा हुआ है। इस सपने के बाद साधक ने उस स्‍थान पर जमीन की खुदाई करवाई और वहां वकई मंदिर निकला। इसके बाद साधक ने देवी जी का अच्‍छा सा मंदिर बनवाया। मंगर इन सब में मंदिर में मौजूद देवी जी की मूर्ती का एक हाथ टूट गया। मगर साधक नहीं चाहता था कि खंडित मूर्ती को मंदिर से हटा कर नई मूर्ती लाई जाए। इस लिए साधक ने मूर्ती का एक हाथ चांदी का बनवा दिया। इस मंदिर में एक गुफा भी है। और इसी गुफा में मां की प्राचीन मूर्ती को स्‍थापित किया गया है। यहां आना भी बेहद आसान है। मंदिर तक पहुंचने के लिए नई दिल्‍ली स्‍टेशन से ही कई वाहन उपलब्‍ध हैं। अगर आप मेट्रो से आना चाहें तो झंडेवालान मेट्रो स्‍टेशन पर उतर जाएं यहां से मंदिर बेहद नजदीक है।

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छतरपुर माता का मंदिर 

छतरपुर मंदिर को कात्‍यानी शक्ति पीठ के नाम से भी जाना जाता है। आपको जान कर हैरानी होगी कि यह मंदिर भारत में दूसरा सबसे बड़ा मंदिर है। इस मंदिर में दुर्गा जी के छवें स्‍वरूप कात्‍यानी देवी की पूजा की जाती है। मंदिर की खासियत है कि यहां पर न केवल हिंदू बल्कि हर धर्म के भक्‍तों को आने की इजाजत है। सफेद संगमरमर से बना यह मंदिर 70 एकड़ में फैला हुआ है। इस मंदिर में साउथ इंडियन वास्‍तुकला के खुबसूरत नमूने देखने को मिलते हैं। नवरात्रे के समय यहां भी भक्‍तों की भीड़ इकट्ठा होती है। कहते हैं भारत में यह दूसरा मंदिर है, जो आकार प्रकार में इतना भव्‍य है। यहां मन्दिर के परिसर में एक बहुत बड़ा दरवाजा लगा हुआ है,  जिस पर एक बड़ा सा ताला लगा हुआ है यह सभी लोगों को आकर्षित करता है। हर कोई जानना चाहता है कि दरवाजे के पीछे क्‍या है मगर आजतक किसी को भी इस बात की जानकारी नहीं है। मंदिर के परिसर में धर्मशाला, डिस्पेंसरी और स्कूल का संचालन भी होता है।

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चितरंजन पार्क मंदिर 

चिंतंरजन पार्क मंदिर साउथ दिल्‍ली में मौजूद है। इस मंदिर की विशेष यह है कि यहां पर कोलकाता के प्रसिद्ध काली मंदिर जैसी देवी की प्रतिमा है। यहां का माहौल ऐसा है कि लगता हे कोलकाता में ही खड़े हों। यहां देवी की पूजा भी बंगाली रीति रिवाज से होती है। दूर्गा पूजा के समय यहां पर सजा पंडाल दिल्‍ली के सबसे खूबसूरत पंडालों में से एक होता है। यहां आने के लिए भी ज्‍यादा परेशानी नहीं उठानी पड़ती यह मंदिर कालका जी मंदिर के नजदीक ही है। इसलिए कालका जी मैट्रो से ही यहां पर भी आया जा सकता है। 

 

  • Anuradha Gupta
  • Her Zindagi Editorial