Sun Oct 11, 2026 | Updated 11:04 AM IST

नवरात्रि में दूसरे द‍िन काशी में करें मां ब्रह्मचारिणी के दर्शन, जानें पहुंचने से लेकर स्‍टे और खाने तक का पूरा गाइड

कल यानी 11 अक्‍टूबर को नवरात्रि‍ का दूसरा द‍िन है। इस द‍िन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। ऐसे में आप काशी के ब्रह्मचारिणी मंद‍िर में दर्शन करने जा सकती हैं।
Updated:- 2026-10-11, 09:17 IST
maa brahmacharini mandir darshan guide

नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। इस दौरान देशभर के दुर्गा मंदिरों में भक्तों की जबरदस्‍त भीड़ देखने को मिलती है। ऐसे अगर आप भी नवरात्रि में मां के दर्शन करने के साथ किसी खास मंदिर के बारे में जानना चाहती हैं, तो वाराणसी का मां ब्रह्मचारिणी मंदिर आपके लिए एक अच्छा रहेगा। दरअसल, नवरात्र‍ि में दूसरे द‍िन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है।

ऐसे में लोग इसी मंद‍िर में जाना चाहती हैं। काशी का यह मंदिर काफी खास है। गंगा किनारे बसे इस पुराने शहर में मां के दर्शन के साथ आप काशी की गलियों, घाटों और यहां के खास माहौल को भी करीब से देख सकती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं क‍ि आप यहां कैसे पहुंच सकती हैं और काशी के मां ब्रह्मचारिणी मंदिर के इत‍िहास की जानकारी भी हम आपको देंगे। आइए जानते हैं-

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वाराणसी में कहां है मां ब्रह्मचारिणी का मंदिर?

मां ब्रह्मचारिणी का यह प्रसिद्ध मंदिर वाराणसी (काशी) में गंगा किनारे बालाजी घाट के पास स्थित है। अगर आप यहां जाने का प्लान बना रही हैं, तो यह मंदिर शहर के सप्तसागर और कर्णघंटा वाले इलाके में पड़ता है। बनारस की गलियां थोड़ी पतली और घुमावदार हैं, इसलिए वहां पहुंचकर किसी लोकल दुकान वाले से पूछना बेस्‍ट रहेगा। नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है, इसलिए इस दिन मंदिर में सुबह से ही भक्तों की अच्छी-खासी भीड़ जम जाती है। ऐसे में अगर आप नवरात्रि के दौरान जा रही हैं, तो थोड़ा टाइम लेकर ही जाएं।

दिल्ली से वाराणसी कैसे पहुंचें?

मां ब्रह्मचारिणी मंदिर के दर्शन करने के लिए आप ट्रेन, फ्लाइट या सड़क के रास्ते वाराणसी पहुंच सकती हैं। आपके पास समय कम है, तो फ्लाइट एक अच्छा ऑप्‍शन हो सकता है। वहीं, कम खर्च में ट्रैवल करना चाहती हैं, तो ट्रेन बेस्‍ट रहेगा।

  • ट्रेन से वाराणसी कैसे पहुंचें: दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, प्रयागराज और दूसरे बड़े शहरों से वाराणसी के लिए ट्रेनें आसानी से मिल जाती हैं। आप वाराणसी जंक्शन या बनारस रेलवे स्टेशन तक की टिकट बुक कर सकती हैं। स्टेशन पर उतरने के बाद ऑटो या कैब लेकर मंदिर के पास पहुंच सकती हैं।
  • फ्लाइट से वाराणसी कैसे पहुंचें: वाराणसी का नजदीकी एयरपोर्ट लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जो बाबतपुर में है। यहां दिल्ली, मुंबई और कई दूसरे शहरों से फ्लाइट मिल जाती हैं। एयरपोर्ट से आप टैक्सी या कैब लेकर शहर में आ सकती हैं।
  • सड़क से वाराणसी कैसे पहुंचें: अगर आप अपनी कार से जाना चाहती हैं, तो वाराणसी सड़क मार्ग से भी अच्छी तरह कनेक्‍टेड है। आसपास के शहरों से बस और टैक्सी की सुविधा मिल जाती है।

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मां ब्रह्मचारिणी मंदिर तक कैसे पहुंचें?

एक बार जब आप वाराणसी पहुंच जाएंगी तो इसके बाद आपको सप्तसागर और कर्णघंटा इलाके की तरफ जाना होगा। मंदिर तक पहुंचने के लिए ऑटो या कैब से जा सकती हैं। इसके बाद पुरानी काशी की गलियों से पैदल चलना पड़ सकता है। अगर आप पहली बार यहां आ रही हैं, तो ड्राइवर को मंदिर का नाम और इलाका साफ-साफ बताना होगा।

मां ब्रह्मचारिणी मंदिर के पास कहां घूम सकती हैं?

अगर आप मां के दर्शन के साथ काशी घूमने का भी प्लान बना रही हैं, तो आसपास के घाट और पुराने मंदिर देख सकती हैं। गंगा किनारे कुछ समय बिताना और काशी की पुरानी गलियों में घूमना हर क‍िसी की ल‍िस्‍ट में शाम‍िल होता है।

  • पंचगंगा घाट: गंगा किनारे स्थित इस घाट पर आप कुछ समय शांति से बिता सकती हैं।
  • काशी विश्वनाथ मंदिर: वाराणसी आने वाले कई लोग बाबा विश्वनाथ के दर्शन भी करते हैं। ऐसे में आप यहां भी जा सकती हैं।
  • दशाश्वमेध घाट: गंगा किनारे घूमने और शाम की गंगा आरती देखने के लिए यह जगह फेमस है। ऐसें में आप इस जगह को एक्‍सप्‍लोर करना न भूलें।
  • सारनाथ: अगर आपके पास एक दिन और है, तो शहर से बाहर सारनाथ भी घूमने जा सकती हैं।

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वाराणसी में कहां रुकें और क्या खाएं?

अगर आप दूसरे शहर से मां ब्रह्मचारिणी के दर्शन करने आ रही हैं, तो अपने बजट के हिसाब से होटल या धर्मशाला में रुक सकती हैं। मंदिर और घाटों के आसपास ठहरने की जगह कई म‍िल जाएंगी।

वाराणसी में क्‍या खाएं?

खाने के लिए वाराणसी में आपको कई सारे ऑप्‍शन म‍िल जाएंगे। यहां कचौड़ी-सब्जी, जलेबी, चाट और दूसरी चीजें खूब पसंद की जाती हैं।

मां ब्रह्मचारिणी की पौराणिक कथा

धार्मिक मान्‍यता है क‍ि मां ब्रह्मचारिणी के पिता हिमालय राज और माता मैना थीं। मां ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठिन तपस्या की थी। कहा जाता है कि उन्होंने लंबे समय तक फल-फूल खाकर और बाद में बहुत कठिन साधना करके भगवान शिव को प्रसन्न किया। उनकी तपस्या इतनी कठिन थी कि उनका शरीर कमजोर हो गया था। मां के इसी तपस्वी रूप के कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी कहा जाता है।

मां ब्रह्मचारिणी मंदिर जाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

अगर आप वाराणसी में मां ब्रह्मचारिणी के दर्शन करने जा रही हैं, तो कुछ बातों का ध्‍यान रखना होगा। जैसे-

  • नवरात्रि के दूसरे दिन दर्शन करने के लिए सुबह जल्दी पहुंचने की कोशिश करें।
  • मंदिर का सही रास्ता और दर्शन का समय निकलने से पहले पता कर लें।
  • नारियल, चुनरी और फूल चढ़ाने हैं, तो इन्हें आसपास की दुकानों से खरीद सकती हैं।
  • भीड़ में अपने मोबाइल, पर्स और जरूरी सामानों की रक्षा स्‍वयं करें।

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