तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की तरफ से पश्चिम बंगाल की कृष्णानगर सीट से चुनकर आईं सांसद महुआ मोइत्रा ने संसद में अपने पहले ही भाषण में सरकार को कई अहम मुद्दों पर घेर लिया। सोशल मीडिया पर उनका यह भाषण इस समय सुर्खियों में है। मोइत्रा ने अपने भाषण में बीजेपी सरकार की नीतियों पर जमकर प्रहार किया। उन्होंने एनआरसी, राष्ट्रीय सुरक्षा और मॉब लिंचिग जैसे मुद्दों पर सरकार की तीखी आलोचना की। मोइत्रा ने कहा कि मतभेद भारत का राष्ट्रीय चरित्र है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता। महुआ मोइत्रा के इस वायरल भाषण के अहम बिंदुओं के बारे में आइए जानते हैं-

विपक्ष की आवाज सुनना जरूरी

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संसद में सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। महुआ ने विपक्ष की अहम भूमिका के बारे में कहा, 'मैं विनम्रत से जनादेश को स्वीकार करती हूं। इस समय में जबकि विपक्ष कमजोर हो गया है, लोकसभा में natural checks and balances नहीं है, ऐसे में सत्ता से अलग राय रखने वाले पक्ष को सुनना और भी ज्यादा अहम हो गया है। चूकिं यह सरकार बड़े मेंडेट के साथ आई है, इसीलिए आज विरोधी स्वरों को सुनना और भी ज्यादा जरूरी है।' 

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देखें फासीवाद के लक्षण

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महुआ मोइत्रा ने सरकार को चेताते हुए कहा, 'आप भले ही कहें कि अच्छे दिन आ गए, लेकिन आप संकेतों को नहीं देख पा रहे। अगर आप अपनी आंखें खोलेंगे तो पाएंगे कि ये संकेत हर तरफ नजर आ रहे हैं। महुआ ने 7 बिंदु गिनाते हुए कहा कि ये फासीवाद के लक्षण हैं।

महुआ ने कहा कि बीजेपी का हाईपर नेशनलिज्म देश के मूल ढांचे पर चोट कर रहा है, यह देश को एक करने का नहीं, बल्कि बांटने का प्रयास है।' 

देश में 50 साल से रह रहे लोगों से मांगा जा रहा है प्रमाण

महुआ मोइत्रा ने असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजनशिप (एनआरसी) के मुद्दे पर चर्चा करते हुए कहा, 'पिछले पांच सालों में बीजेपी सरकार ने देश को अंधेरे में धकेल दिया है। इस देश को तोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। देश के नागरिकों को उनके घरों से बाहर निकाला जा रहा है और उन्हें 'अवैध अप्रवासी' कहा जा रहा है। जो लोग पिछले 50 साल से इस देश में रह रहे हैं, उन्हें अपनी नगारिकता प्रमाणित करने के लिए दस्तावेज दिखाने के लिए कहा जा रहा है। सरकार में मंत्री अपनी ग्रेजुएशन को साबित करने के लिए एक डिग्री तक नहीं दिखा पा रहे और आप आम लोगों से यह उम्मीद करते हैं कि वह अपनी नागारिकता प्रमाणित करने वाले दस्तावेज सामने रखें।' महुआ ने कहा कि एनआरसी और नागरिकता बिल को सरकार जिस तरह से पेश कर रही है, उससे कुछ खास समुदायों को निशाना बनाया जा रहा है, खासतौर पर मुसलमानों को। उन्होंने कहा 'इस बार का लोकसभा चुनाव किसानों और रोजगार के मुद्दे पर नहीं लड़ा गया। यह चुनाव व्हाट्सएप और फेक न्यूज के माध्यम से लड़ा गया था। 

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हेट क्राइम में हुआ इजाफा

टीएमसी सांसद ने आगे कहा ‘2014 से 2019 तक हेट क्राइम की संख्या में दस गुना इजाफा हुआ है। इस देश में हेट क्राइम को बढ़ाने वाली ताकतें और ज्यादा मजबूत होती जा रही हैं। चाहे वह 2017 में राजस्थान में पहलू खान की लिंचिंग हो या बीते हफ्ते झारखंड में तबरेज अंसारी की मॉब लिंचिंग। यह लिस्ट यहीं खत्म नहीं होती।’

'सेना की उपलब्धियों को हड़पा'

महुआ मोइत्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, 'सेना की उपलब्धियों को एक शख्स ने हड़पा लिया। विडंबना यह है कि आतंकवादी हमलों में कई गुना इजाफा हुआ है। कश्मीर में जवानों की मौत में 106% का इजाफा हुआ है।’ अहम बात ये है कि महुआ मोइत्रा इन्वेस्टमेंट बैंकर की नौकरी छोड़कर राजनीति में आईं हैं। साल 2016 में पहली बार वह करीमपुर से टीएमसी की विधायक चुनी गई थीं। एमएलए के तौर पर मोइत्रा उन चुनिंदा राजनीतिज्ञों में से एक हैं, जिन्होंने मोदी सरकार के सर्वेलांस की कोशिशों के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी थी। इसके बाद उनके काम से प्रभावित होकर टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने उन्हें पार्टी का महासचिव बना दिया। महुआ मोइत्रा को एक कुशल वक्ता के तौर पर भी जाना जाता है।