वेडिंग सीजन आने ही वाला है मगर, जिनकी इस साल शादियां होनी हैं, उन्‍होंने इसकी तैयारियां अीभी से शुरू कर दी है। खासतौर पर दिवाली आने वाली है इसलिए होने वाली ब्राइड्स ने अभी से अपनी शॉपिंग शुरू कर दी है। शादी की शॉपिंग में ज्‍वैलरी खरीदने का भी बड़ महत्‍व है। शादी एक ऐसा अवसर होता है जब लड़की के माता पिता उसे सोने और हीरे की ज्‍वैलरी गिफ्ट करते हैं। मगर, अब वक्‍त बदल चुका है और अब सोने और हीरे के जेवर के साथ ही मोती, कुंदन, चांदी और मीनाकारी के जेवर भी दुल्‍हन पहनना पसंद करती है। बेशक आप अपने ने लिए सोने और हीरे के जेवर खरीदें मगर आप ज्‍वेलरी में और भी वैराइटी अपने ट्रूजो बैग में रखनी है तो आज हम आपको देश की कुछ ऐसी जगह बताएंगे जहां से आप मोती, कुंदन, चांदी और मीनाकारी वाली ज्‍वैलरी खरीद सकती हैं। 

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हैदराबाद के मोती  

गले में खूबसूरत मोतियों की माला भला किसे अच्छी नहीं लगती। साड़ी हो या वेस्‍टर्न ड्रेस दोनों ही तरह के आउटफिट्स में मोतियों की माला अच्‍छी लगती है। वैसे मोती में बहुत सुंदर-सुंदर जेवर आते हैं। अगर आप को मोती का ज्‍वेलरी सेट खरीदना है तो आपको यह हैदराबाद की मोती बाजार से लेना चाहिए। यह बाजार पुराने हैदराबाद में ऐतिहासिक चारमीनार इमारत के पास है। यहां आपको सफेद मोती से लेकर किस्म किस्म की मोतियों की माला, टॉप्स, झुमके और दूसरे गहने खरीद सकते हैं। हैदराबाद में मोतियों का लंबा चौड़ा कारोबार है। यहां से खरीदे गए मोतियों के गहने बाकी शहरों से 50 फीसदी तक सस्ते हो सकते है। थोड़ा सा मोल भाव करके आप यहां से अच्छे और सस्ते में मोतियों के गहने खरीद सकते हैं। 

मोतियों के खरीदने में ये सावधानी जरुर बरतें कि मोती जितना अधिक गोल होगा और आकार उसका जितना बड़ा होगा उतना ही अच्छा माना जाता है। तरासे जाने के आधार पर मोतियों की ग्रेडिंग होती है। ए, ए ए और ए ए ए। हालांकि हैदराबाद में मोतियों का उत्पादन नहीं होता, पर यह बिक्री का बड़ा केंद्र बन गया है। बाजार में आने वाले मोती श्रीलंका, चीन और जापान से आता है। हालांकि कई जगह भारत में भी कल्चर्ड मोतियों का निर्माण होने लगा है। यह मोती भी यहां पर मिलते हैं। 

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कटक की चांदी 

चांदी की तार को कलात्मक बारीकी से तोड़-मरोड़ कर आकर्षक रूप देने की कला को फिलिग्री वर्क कहा जाता है। पूरी दुनिया में उड़ीसा के कटक जिले में ही इस काम को जानने वाले कलाकार हैं। अगर आप अपनी शादी के लिए सोने और हीरे की ज्‍वेलरी के साथ ही चांदी की ज्‍वेलरी भी लेना चाहती है तो आप एक बार कटक जरूर आएं। कटक दुनिया भार में चांदी के जेवरों के लिए फेमस है। यहां पर आपको फिलिग्री कला के साथ तैयार किए हुए गहने मिलेगे। आपको बता दें कि चांदी के गहनों का इस वक्‍त काफी ट्रेंड चल रहा है। यह गहत सस्‍ते भी होते हैं, इनकी रीसेल वैल्‍यू भी होती है और यह खराब भी नहीं होते हैं। आपको बता दें कि इस आर्ट की सिल्‍वर ज्‍वेलरी आपको केवल कटक में ही मिलेगी। अगर आप यहां से सिल्‍वर ज्‍वेलरी खरीदेंगी तो आपको यह सस्‍ती भी पड़ेगी और वैराइटी भी मिलेगी। 

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कुंदन ज्‍वेलरी

अगर आपको गुजराती कलचर पसंद है तो आपको गुजराती गहने भी खूब पसंद आएंगे। गुजराती महिलाएं कुंदन से बनी ज्‍वेलरी खूब पहनती हैं। यह एक प्रकार का चमकीला स्‍टोन होता है। गुजरात राजा महाराजा और रानिया इस तरह के जेवर पहनते थे जो कुंदन से तैयार किए जाते थे। अगर आप इसे पहनती हैं तो आप भी रॉयल अंदाज पा सकती हैं। अपनी शादी के किसी फंक्‍शन में आप इसे पहन सकती हैं। कुंदन - प्रेशियस या सेमी-प्रेशियस ग्लास होता है, डिपेंड करता है कि किस तरह के स्टोन का इस्तेमाल किया गया है. इसे पॉलिश करके इसके लुक को और भी बारीक बनाया जाता है. वैसे सोने के गहनों में भी कुंदन वर्क मिल जाता है। मगर गुजरात से आप सस्‍ती और अच्‍छी आर्टीफीशियल कुंदन ज्‍वेलरी खरीद सकती हैं। 

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मीनाकारी 

मिनाकारी जूलरी, राजस्थान, दिल्ली और गुजरात में सबसे ज़्यादा पॉपुलर है. मीनाकारी इनैमल-कोटेड मेटल जूलरी होती है। इसमें आपको आर्टीफीशियल और गोल्‍ड दोनों तरह के गहने मिल जाएंगे। अगर आप आर्टीफीशियल गहनों पर मीनाकारी वर्क तलाश रही हैं तो आपको राजस्‍थान आना चाहिए। यहां आपको डिज़ाइन और कारीगरी के आधार पर आपक कई रंगों में मीनाकारी वाली ज्‍वेलरी मिल जाएगी. दरअसल इसकी सतह को खुरच कर उसमें अलग-अलग रंग भरे जाते हैं. मिनाकारी एक डेलिकेट क्राफ्ट है जिसके लिए काफी स्किल्स की ज़रूरत पड़ती है. इसे बनाने वाले सोनार को मिनाकार्स भी कहा जाता है, जो सिर्फ अपने परिवार के अंदर ही इस क्राफ्ट की प्रैक्टिस करते हैं. ऐसा बहुत कम ही होता है कि ये कला परिवार से बाहर के किसी सदस्य को मिले.मिनाकारी आर्ट को आर्टिटेक्चर से लिया गया है। सबसे पहले मिना वर्क, मुगलों के महल की दीवारों पर किया जाता था. इसके बाद इसका जूलरी में इस्तेमाल होने लगा. मिनाकारी वर्क मुगल दौर में काफी पॉपुलर हुआ था। राजस्थान में इसे पहली बार इंड्रोडूयस्ड किया Ajmer के Raja Mansingh ने, जिन्होंने लाहौर के कारीगरों को इसपर काम करते हुए देखा था. लंबे समय तक मिनाकारी जूलरी को ट्रेडिशनल पोल्की जूलरी में बैक डिज़ाइन की तरह इस्तेमाल किया जाता था. बाद में यह खुद ही एक डिज़ाइन बन गई और इसके साथ ही रिवर्सिबल जूलरी की शुरूआत हुई, जो की आज हर तरफ छाई हुई है.

  • Anuradha Gupta
  • Her Zindagi Editorial