Mon Oct 12, 2026 | Updated 10:19 PM IST

तारीफ कानों से गुजर जाती है... ताना दिल में क्यों उतर जाता है? Psychology में छुपा है जवाब

क्या आपने कभी सोचा है कि अगर कोई हमारी तारीफ करे तो कैसे हमें उसे मिनटों में भूल जाते हैं, लेकिन अगर कोई ताना दे तो हमें सालों तक याद रहता है। यह कोई इत्तेफाक नहीं है। चलिए Psychology में छुपा हुआ इसका जवाब जानते हैं।
Updated:- 2026-10-12, 19:24 IST
why we remember criticism more than praise psychology behind this

कोई हमारी तारीफ में कुछ कहे, तो बेशक हमें अच्छा लगता है, लेकिन उसे हमें कुछ मिनट या कुछ दिन में भूल जाते हैं, पर जब कोई हमें किसी बात को लेकर ताना देता है या गुस्से में कोई कमेंट करता है, तो वह हमें हमेशा याद रहता है। आपके साथ भी बेशक ऐसा होता होगा। बता दें कि यह कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि यह घटना 'नेगेटिविटी बायस' (नकारात्मकता की ओर झुकाव) नामक मनोवैज्ञानिक सिद्धांत (Psychological Principle) पर आधारित है। चलिए इसके बारे में एक्सपर्ट से विस्तार में समझते हैं। इस बारे में Dr. Pragya Rashmi, Consultant Psychologist at Yashoda Hospitals, Secunderabad जानकारी दे रही हैं।

तारीफ याद नहीं रहती, पर ताना क्यों याद रह जाता है?

यह अनुभव लगभग सभी ने कभी न कभी किया होगा कि एक आलोचनात्मक टिप्पणी कई दिनों तक मन में बनी रहती है, जबकि ढेरों प्रशंसाएं जल्दी ही फीकी पड़ जाती हैं। ऐसा 'नेगेटिविटी बायस' (नकारात्मकता की ओर झुकाव) नाम के मनोवैज्ञानिक सिद्धांत के चलते होता है। असल में हमारे दिमाग की संरचना इस तरह की गई है कि वह खतरों को प्राथमिकता देता है। आलोचना या सामाजिक अस्वीकृति जैसी नकारात्मक बातें दिमाग को संभावित खतरे का संकेत देती हैं। इससे एमिग्डाला (Amygdala) सक्रिय हो जाता है, जिसे दिमाग का इमोशनल अलार्म सिस्टम भी कहा जाता है। इसकी सक्रियता बढ़ने से नकारात्मक अनुभव हमारी यादों में सकारात्मक अनुभवों की तुलना में अधिक गहराई से दर्ज हो जाते हैं।

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why we remember criticism more than praise

दिमाग 'नेगेटिव' कमेंट्स को लेकर करता है खुद से सवाल

कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि पॉजिविट कमेंट्स की तुलना में नेगेटिव कमेंट्स या इस तरह की घटनाएं हमारे दिमाग में पांच गुना तक मजबूत न्यूरल पाथवे (तंत्रिका मार्ग) बना सकती हैं। यही कारण है कि किसी आलोचना या नेगेटिव कमेंट को समझने में हमारा दिमाग काफी एनर्जी लगाता है। कई बार खुद से सवाल करता है, 'क्या यह बात सच है?' वहीं, तारीफ को बिना ज्यादा सोच-विचार किए स्वीकार कर लेता है या उस पर उतना ध्यान नहीं देता। इसी के चलते कोई भी ताना या नेगेटिव कमेंट हमें गहराई से याद रह जाता है, लेकिन तारीफ में कहीं गई बातें हम भूल जाते हैं।

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एक्सपर्ट की सलाह पर दें ध्यान

डॉक्टर प्रज्ञा का कहना है कि बेशक हमारा दिमाग ताने या नकारात्मक घटनाओं को ज्यादा याद रखता है, लेकिन मेंटल हेल्थ को दुरुस्त और दिमाग को शांत रखने के के लिए एक हेल्दी बैलेंस बनाए रखना जरूरी है। अगर किसी ने आपके बारे में कोई नेगेटिव कमेंट किया है या कोई ऐसी बात कही है, जो आपको बुरी लग रही है, तो उस पर कम ध्यान दे। कोशिश करें कि आप उस बात पर ध्यान न दें। बेशक ऐसा करने में आपको मुश्किल आएगी, लेकिन धीरे-धीरे आप अपने दिमाग को उस बात से हटाएं वरना नेगेटिव कमेंट्स को सोचते वक्त आपके दिमाग में गुस्सा, दुख या एंग्जायटी जैसी नेगेटिव भावनाएं आ सकती हैं।

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FAQ
क्या दूसरों की आलोचना का हमारे आत्मविश्वास पर असर पड़ सकता है?
हां, लगातार आलोचना या अपमानजनक टिप्पणियां आत्मविश्वास को कमजोर कर सकती हैं। व्यक्ति अपनी क्षमताओं पर संदेह करने लग सकता है और दूसरों की स्वीकृति पर अधिक निर्भर हो सकता है। 
क्या बार-बार आलोचना के बारे में सोचना ओवरथिंकिंग का संकेत है?
जरूरी नहीं कि हर बार ऐसा होना ओवरथिंकिंग हो। किसी दुखद टिप्पणी के बारे में सोचना सामान्य है। लेकिन अगर वही बात बार-बार दिमाग में घूमती रहे, नींद या काम प्रभावित करे और मन में लगातार नकारात्मक विचार आएं, तो यह रुमिनेशन यानी एक ही बात को बार-बार सोचते रहने का पैटर्न हो सकता है।
दूसरों की नकारात्मक बातों को दिल पर लेने से कैसे बचें?
सबसे पहले, किसी की राय को अपनी पूरी पहचान न बनने दें। खुद से पूछें कि क्या उस टिप्पणी में कोई तथ्य है या वह केवल दूसरे व्यक्ति की धारणा है।
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