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जब घर भी Safe नहीं लगता... महिलाओं की मेंटल हेल्थ पर क्या पड़ता है असर?

बेंगलुरु में हाल ही में हुई घटना ने महिलाओं के मन में घर के अंदर भी अपनी सुरक्षा को लेकर डर पैदा हो गया है। क्या आपको पता है कि जब घर में किसी महिला को सेफ नहीं लगता है, तो इसका उसकी मानसिक सेहत पर क्या असर होता है?
Updated:- 2026-07-13, 20:12 IST
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बेंगलुरु की एक घटना ने इन दिनों सबको हैरान कर दिया है। बताया जा रहा है कि एक महिला के घर डिलीवरी देने आए डिलीवरी ब्वॉय ने पहले जबरदस्ती उसके घर का वॉशरूम इस्तेमाल किया और फिर उस महिला को अपना प्राइवेट पार्ट दिखाया। महिला ने उस व्यक्ति का एक वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। इस वीडियो में महिला काफी डरी और घबराई हुई नजर आ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इसके बाद उस व्यक्ति को जॉब से निकाल दिया गया है और उसे गिरफ्तार भी कर लिया गया है। बेशक महिला की हिम्मत और इंटरनेट पर उठाई आवाज ने उस व्यक्ति को सजा दिलवाई, लेकिन कहीं न कहीं इस घटना ने महिला की मेंटल हेल्थ पर बुरा असर जरूर डाला।

जब किसी भी महिला को किसी भी कारण से अपने ही घर में असुरक्षित महसूस होने लगता है, तो इसकी वजह से उसकी मेंटल हेल्थ बहुत प्रभावित होती है। इस तरह के किसी हादसे, घर में हुई किसी मॉलेस्टेशन या घरेलू हिंसा की घटना समेत कई कारणों के चलते ऐसा हो सकता है। घर किसी भी व्यक्ति के लिए सबसे सेफ जगह होती है और जब इस सेफ जगह पर अनसेफ फील होता है, तो महिलाओं की मेंटल हेल्थ पर इसका क्या असर होता है, चलिए एक्सपर्ट से जानते हैं। इस बारे में Dr. Samant Darshi, Consultant- Psychiatrist , Yatharth Hospitals, Noida जानकारी दे रहे हैं।

डिप्रेशर का हो सकती हैं शिकार

जब घर ही सुरक्षित महसूस न हो, तो इसका सबसे गहरा असर महिलाओं की मानसिक सेहत पर पड़ता है। घर को आमतौर पर सुकून, अपनापन और सुरक्षा का स्थान माना जाता है, लेकिन जब वहीं डर, हिंसा, अपमान या लगातार तनाव का माहौल बन जाए, तो मानसिक संतुलन पर बुरा असर होने लगता है।

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जब कोई भी महिला ऐसी किसी घटना का शिकार होती है और उसे अपने घर के अंदर भी सेफ फील नहीं आता, तो उन्हें चिंता (एंग्जायटी), अवसाद (डिप्रेशन), लगातार डर, आत्मविश्वास में कमी और अकेलेपन जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

भावनाओं को बताने में आती है मुश्किल

कई बार जब घर में कुछ ऐसा होता है, जो महिलाओं को डरा देता है और वो उसके बारे में बात भी नहीं कर पाती हैं, तो धीरे-धीरे उन्हें अपनी भावनाओं को बताने में मुश्किल आने लगती हैं। वो अपनी फीलिंग्स को अपने मन के अंदर रखने लगती हैं। लंबे समय तक तनाव में रहने से नींद की समस्या, चिड़चिड़ापन, थकान, सिरदर्द और काम में मन न लगना जैसी दिक्कतें भी सामने आ सकती हैं।

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लोगों के साथ घुलने-मिलने में होती है परेशानी

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अगर कोई महिला घर में मानसिक, शारीरिक या भावनात्मक हिंसा का लगातार शिकार होती है, तो इसका असर महिलाओं के आत्मसम्मान, रिश्तों और निर्णय लेने की क्षमता पर भी पड़ता है। कई महिलाओं को यह महसूस होने लगता है कि उनकी बातों या भावनाओं की कोई अहमियत नहीं है, जिससे वे सामाजिक रूप से भी खुद को अलग-थलग करने लगती हैं।


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Image Credit:Freepik, Shuttersotck, Gemini

 

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