हर समस्या के लिए दूसरों को देते हैं दोष, जानें क्या है Locus of Control?

किसी भी समस्या के प्रति व्यक्ति का व्यवहार कैसा होगा, इसके मनोविज्ञान की भाषा में 'लोकस ऑफ कंट्रोल' कहा जाता है। अगर कोई व्यक्ति हर मुश्किल के लिए खुद को जिम्मेदार मानते हुए स्वयं उसका हल ढूंढने की कोशिश करता है, तो इसे इंटरनल लोकस ऑफ कंट्रोल कहा जाता है। वहीं दूसरी ओर, जब कोई अपनी हर समस्या के लिए बाहरी कारणों को दोषी मानता है, तो उसे एक्सटर्नल लोकस ऑफ कंट्रोल कहा जाता है।
अपनाएं इमोशनल मैनेजमेंट
इंटरनल एलओसी वाले लोगों को खुद पर यह विश्वास रहता है कि वे अपनी इच्छाओं और व्यवहार को नियंत्रित कर सकते हैं। इसके ठीक विपरीत एक्सटर्नल एलओसी वाले लोग यह मानते हैं कि बाहरी लोग उनकी जिंदगी को नियंत्रित करते हैं।
क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट जया सुकुल के अनुसार, लोकस ऑफ कंट्रोल उस मनोदशा की जांच करता है जिसके तहत लोग यह विश्वास करते हैं कि उनके स्वास्थ्य या किसी अन्य हालात पर आंतरिक या बाहरी कारणों का किस सीमा तक नियंत्रण है। दरअसल, यह मस्तिष्क के कार्य करने के तरीके का अध्ययन है।
एक्सटर्नल एलओसी: ऐसे लोगों के मन में यह धारणा बनी रहती है कि उनके जीवन की स्थितियां भाग्य या किस्मत के नियंत्रण में हैं।
इंटरनल एलओसी: ये लोग मानते हैं कि उनका जीवन जैसा भी है, वह उनके अपने कार्यों का ही प्रत्यक्ष परिणाम है।
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उदाहरण: जो लोग वजन कम करने के लिए दवाओं की मदद लेना चाहते हैं, वे इस कार्य में उतने सफल नहीं होते; जबकि नियमित एक्सरसाइज और संतुलित खानपान अपनाने वाले लोग आसानी से अपना वजन नियंत्रित कर पाते हैं।
इस लिहाज से अपनी मनोदशा को समझते हुए खुद इमोशनल मैनेजमेंट करना ज्यादा सकारात्मक और सही प्रयास है। इसके विपरीत एक्सटर्नल एलओसी वाले लोगों में धैर्य कम होता है। फिर भी कई बार समस्या के स्वरूप के अनुसार उसके समाधान के लिए संतुलित ढंग से इन दोनों तरीकों को अपनाते हुए इमोशनल मैनेजमेंट की जरूरत होती है।
छोटी हो शुरुआत
आपको रोजमर्रा के छोटे-छोटे निर्णय दूसरों से बिना पूछे खुद लेने की कोशिश करनी चाहिए। बदलते वक्त की जरूरतों के अनुकूल जीवनशैली में बदलाव लाने की कोशिश करें। लोकस ऑफ कंट्रोल आपके बारे में बहुत कुछ कहता है। अगर आप इसे मैनेज करना सीख जाएंगे तो आपके लिए हर समस्या का हल ढूंढना आसान हो जाएगा।
खुशियों का पासवर्ड
आत्मसम्मान बनाए रखें: दूसरों के सामने अपनी अच्छी छवि बनाने के लिए कोई भी ऐसा कार्य न करें, जो आपको नापसंद हो।
संतुलन बनाए रखें: उतार-चढ़ाव सभी के जीवन में आते हैं, दोनों ही स्थितियों में संयमित रहना जरूरी है। सफलता के बाद अति उत्साह और नाकामी से मिलने वाली निराशा की वजह से अक्सर लोग गलतियां करते हैं, इसलिए दोनों ही स्थितियों में शांत रहना आवश्यक है।
बातचीत करें:अगर कभी मन तनावग्रस्त हो और आप अपनी किसी समस्या का हल ढूंढ नहीं पा रहे हों, तो परिवार के सदस्यों या किसी करीबी दोस्त से उसके बारे में बातचीत करें।
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ण को मनोविज्ञान की भाषा में 'लोकस ऑफ कंट्रोल' कहा जाता है। अगर कोई व्यक्ति हर मुश्किल के लिए खुद को जिम्मेदार मानते हुए स्वयं उसका हल ढूंढने की कोशिश करता है, तो इसे इंटरनल लोकस ऑफ कंट्रोल कहा जाता है। वहीं दूसरी ओर, जब कोई अपनी हर समस्या के लिए बाहरी कारणों को दोषी मानता है, तो उसे एक्सटर्नल लोकस ऑफ कंट्रोल कहा जाता है।
अपनाएं इमोशनल मैनेजमेंट
इंटरनल एलओसी वाले लोगों को स्वयं पर यह विश्वास रहता है कि वे अपनी इच्छाओं और व्यवहार को नियंत्रित कर सकते हैं। इसके ठीक विपरीत एक्सटर्नल एलओसी वाले लोग यह मानते हैं कि बाहरी लोग उनकी जिंदगी के हर क्रियाकलाप को नियंत्रित करते हैं।
क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट जया सुकुल के अनुसार, लोकस ऑफ कंट्रोल उस मनोदशा की जांच करता है जिसके तहत लोग यह विश्वास करते हैं कि उनके स्वास्थ्य या किसी अन्य हालात पर आंतरिक या बाहरी कारणों का किस सीमा तक नियंत्रण है। दरअसल, यह मस्तिष्क के कार्य करने के तरीके का अध्ययन है।
एक्सटर्नल एलओसी: ऐसे लोगों के मन में यह धारणा बनी रहती है कि उनके जीवन की स्थितियां भाग्य या किस्मत के नियंत्रण में हैं।
इंटरनल एलओसी: ये लोग मानते हैं कि उनका जीवन जैसा भी है, वह उनके अपने कार्यों का ही प्रत्यक्ष परिणाम है।
उदाहरण: जो लोग वजन कम करने के लिए दवाओं की मदद लेना चाहते हैं, वे इस कार्य में उतने सफल नहीं होते; जबकि नियमित एक्सरसाइज और संतुलित खानपान अपनाने वाले लोग आसानी से अपना वजन नियंत्रित कर पाते हैं।
इस लिहाज से अपनी मनोदशा को समझते हुए खुद इमोशनल मैनेजमेंट करना ज्यादा सकारात्मक और सही प्रयास है। इसके विपरीत एक्सटर्नल एलओसी वाले लोगों में धैर्य कम होता है। फिर भी कई बार समस्या के स्वरूप के अनुसार उसके समाधान के लिए संतुलित ढंग से इन दोनों तरीकों को अपनाते हुए इमोशनल मैनेजमेंट की जरूरत होती है।
छोटी हो शुरुआत
आपको रोजमर्रा के छोटे-छोटे निर्णय दूसरों से बिना पूछे खुद लेने की कोशिश करनी चाहिए। बदलते वक्त की जरूरतों के अनुकूल जीवनशैली में बदलाव लाने की कोशिश करें। लोकस ऑफ कंट्रोल आपके बारे में बहुत कुछ कहता है। अगर आप इसे मैनेज करना सीख जाएंगे तो आपके लिए हर समस्या का हल ढूंढना आसान हो जाएगा।
खुशियों का पासवर्ड
आत्मसम्मान बनाए रखें: दूसरों के सामने अपनी अच्छी छवि बनाने के लिए कोई भी ऐसा कार्य न करें, जो आपको नापसंद हो।
संतुलन बनाए रखें: उतार-चढ़ाव सभी के जीवन में आते हैं, दोनों ही स्थितियों में संयमित रहना जरूरी है। सफलता के बाद अति उत्साह और नाकामी से मिलने वाली निराशा की वजह से अक्सर लोग गलतियां करते हैं, इसलिए दोनों ही स्थितियों में शांत रहना आवश्यक है।
बातचीत करें: अगर कभी मन तनावग्रस्त हो और आप अपनी किसी समस्या का हल ढूंढ नहीं पा रहे हों, तो परिवार के सदस्यों या किसी करीबी दोस्त से उसके बारे में बातचीत करें।
(नोट: निर्देशानुसार इस पूरे पाठ से नुक्ता जैसे 'ज़', 'फ़' और चंद्रबिंदु को पूरी तरह हटाकर मानक अनुस्वार और सामान्य अक्षरों का उपयोग किया गया है।)
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