Sat Sep 12, 2026 | Updated 12:03 AM IST

पेट दर्द हो सकता है गॉल ब्लैडर स्टोन का संकेत, जानें इसके लक्षण और उपचार

गॉल ब्लैडर स्टोन यानी पथरी की समस्या आजकल काफी आम हो गई है, जिसके कारण पेट दर्द, गैस, उल्टी और अन्य पाचन संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। जानें इसके शुरुआती लक्षण, कारण, जोखिम कारक और उपचार के तरीके।
Updated:- 2026-05-29, 19:52 IST
abdominal pain symptoms
Sakhi

आजकल गॉल ब्लैडर में स्टोन यानी पथरी की समस्या काफी आम हो गई है। अक्सर लोग अपने आसपास किसी न किसी व्यक्ति के बारे में सुनते हैं कि उसके गॉल ब्लैडर में स्टोन हो गया और उसे सर्जरी करानी पड़ी। यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ती है और कई बार शुरुआत में इसके लक्षण साफ दिखाई नहीं देते। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक सर्वे के अनुसार भारत में लगभग 8 प्रतिशत लोग गॉल ब्लैडर से जुड़ी समस्याओं से प्रभावित हैं। डॉ. अनिल अरोड़ा, एचओडी गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी डिपार्टमेंट, सर गंगाराम हॉस्पिटल, दिल्ली से बाताते हैं, "गलत खानपान, ज्यादा तला-भुना खाना, मोटापा और अनियमित जीवनशैली इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। समय पर ध्यान न देने पर यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए इसके बारे में सही जानकारी होना बहुत जरूरी है।"

कब होती है समस्या

पाचन के लिए आवश्यक एंजाइम को सुरक्षित रखने वाले इस महत्वपूर्ण अंग से जुड़ी सबसे प्रमुख समस्या यह है कि इसमें स्टोन बनने की आशंका बहुत अधिक होती है, जिन्हें गॉल स्टोन कहा जाता है। दरअसल, जब गॉल ब्लैडर में तरल पदार्थ की मात्रा सूखने लगती है तो उसमें मौजूद चीनी-नमक और अन्य माइक्रोन्यूट्रीएंट तत्व एक साथ जमा होकर छोटे-छोटे पत्थर टुकड़ों जैसा रूप धारण कर लेते हैं, जिन्हें गॉलस्टोन्स कहा जाता है। ये दो तरह के होते हैं-कोलेस्ट्रॉल और पिगमेंट। कोलेस्ट्रॉल स्टोन पीले-हरे रंग के होते हैं। ओबेसिटी से पीड़ित लोगों और स्त्रियों में कोलेस्ट्रॉल स्टोन्स की समस्या नजर आती है। जब ब्लैडर में ब्लैक या ब्राउन कलर के स्टोन्स नजर आती हैं तो पिगमेंट स्टोन्स कहा जाता है। ऐसी स्टोन्स शुद्ध कैल्शियम बिलिरुबिनेट से बनी होती हैं। आमतौर पर जब गॉल ब्लैडर में अनकॉन्जुगेटेड बिलिरुबिन नामक तत्व अधिक मात्रा में जमा हो जाता है तो इससे पिगमेंट स्टोन्स की समस्या होती है।

gallstone symptoms

प्रमुख लक्षण

शुरुआती दौर में गॉलस्टोन के लक्षण नज़र नहीं आते। जब समस्या बढ़ जाती है तो गॉल ब्लैडर सूजन, संक्रमण या पित्त के प्रवाह में रुकावट होने लगती है। ऐसी स्थिति में लोगों को पेट के ऊपरी हिस्से की दायीं तरफ दर्द,अधिक मात्रा में गैस की फार्मेशन, पेट में भारीपन, वोमिटिंग, पसीना आना जैसे लक्षण नजर आते हैं।

क्या है वजह

शारीरिक सक्रियता और एक्सरसाइज़ की कमी, अधिक मात्रा में घी-तेल और मिर्च-मसाले के सेवन को इस समस्या के लिए जिम्मेदार माना जाता है। लंबे समय तक गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करने या हॉर्मोन रिप्लेस्मेंट थेरेपी लेने वाली स्त्रियों में भी इसकी आशंका बढ़ जाती है। मोटापा घटाने वाली दवाओं की साइड इफेक्ट से भी गॉल ब्लैडर में स्टोन हो सकता है।

क्या है उपचार

अगर शुरुआती दौर में इसके लक्षणों के बारे में मालूम हो जाए तो इस समस्या को दवाओं से नियंत्रित किया जा सकता है। ज्य़ादा गंभीर स्थिति में सर्जरी की जरूरत पड़ती है। आजकल लेप्रोस्कोपी द्वारा इसकी सर्जरी करके गॉल ब्लैडर को ही शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है और सर्जरी के दो-तीन महीने बाद मरीज़ पूर्णत: स्वस्थ हो जाता है। सर्जरी के बाद लोगों को सादा और संतुलित खानपान अपनाने की सलाह दी जाती है। इसके पंद्रह दिनों के बाद व्यक्ति सक्रिय जीवनशैली अपना सकता है।

gall bladder stone treatment

यह भी है जरूरी

  • इस समस्या से बचाव के लिए बादाम और अखरोट का नियमित रूप से सेवन करना चाहिए।
  • अपने खानपान में दलिया, मल्टीग्रेन आटे से बनी रोटी, सोयाबीन, ओट्स, अंकुरित अनाज, पपीता, गाजर, सेब और अमरूद जैसी फाइबर युक्त चीज़ों को प्रमुखता से शामिल करें।
  • फिश और फ्लैक्स सीड में ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो इस समस्या से बचाव में मददगार होता है।
  • रोज़ाना आठ-दस ग्लास पानी पीएं और अपने खानपान में तरल पदार्थों की मात्रा बढ़ाएं।

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