दुर्गा पूजा पर पाना है परफेक्ट बंगाली लुक? इस बार वॉर्डरोब में शामिल करें बंगाल की ये 5 पारंपरिक साड़ियां

11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। इस दौरान महिलाएं पूजा-पाठ के अलावा अपने लुक का भी खास ध्यान रखती हैं। दरअसल, दुर्गा पूजा सिर्फ पूजा-पाठ और पंडाल घूमने का त्योहार नहीं है बल्कि इस दौरान बंगाली कल्चर और पहनावे की भी खास झलक देखने को मिलती है। खासकर साड़ी में बंगाली लुक की बात ही कुछ अलग होती है।
ऐसे में अगर आप इस दुर्गा पूजा 2026 में बिल्कुल पारंपरिक बंगाली अंदाज में तैयार होना चाहती हैं, तो अपनी वॉर्डरोब में बंगाल की कुछ खास साड़ियां शामिल कर सकती हैं। तांत की साड़ी से लेकर बालूचरी की खूबसूरत सिल्क तक, हर साड़ी का अपना अलग अंदाज है। आइए इनके बारे में जानते हैं जिन्हें आप सप्तमी, अष्टमी, नवमी या दशमी पर पहन सकती हैं।
दुर्गा पूजा में पहनें बंगाल की ये 5 साड़ियां
दुर्गा पूजा की धूम बंगाल में खासतौर से देखने को मिलती है। इस दौरान अगर आप बंगाली लुक पाना चाहती हैं तो ये 5 साड़ियां स्टाइल कर सकती हैं।

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1. बालूचरी साड़ी
अगर आपको थोड़ा रॉयल लुक पसंद है, तो बालूचरी साड़ी आपके लिए सही रहेगी। यह वेस्ट बंगाल के बिष्णुपुर की फेमस साड़ी है। इसकी सबसे खास बात इस पर बने खूबसूरत डिजाइन होते हैं। इनमें पौराणिक कहानियों, साहित्य, इमारतों और रोजाना की जिंदगी से जुड़े चित्र भी देखने को मिलते हैं। बालूचरी सिल्क से बनाई जाती है, इसलिए शाम की पूजा या किसी खास फंक्शन के लिए यह काफी सुंदर लगेगी।
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2. गरद साड़ी
गरद साड़ी भी अपने सिंपल लुक के लिए जानी जाती है। आमतौर पर इसका बेस व्हाइट या ऑफ-व्हाइट होता है और किनारों के साथ-साथ पल्लू पर रेड कलर की पट्टी होती है। बंगाल में इस तरह की साड़ी सदियों से पहनी जा रही है। ऐसे में अगर आपको ज्यादा हैवी साड़ी पसंद नहीं है, तो आप दुर्गा पूजा के दौरान गरद साड़ी पहन सकती हैं।
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3. तांत साड़ी
दुर्गा पूजा के लिए तांत साड़ी का नाम आते ही बंगाली लुक की याद आ जाती है। यह कॉटन से बनाई जाती है, इसलिए यह काफी लाइट वेट की होती है और पहनने में कंफर्टेबल भी। सफेद साड़ी पर लाल बॉर्डर वाला क्लासिक कॉम्बिनेशन सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। हालांकि, अब तांत साड़ियां कई अलग-अलग रंगों में भी मिलती हैं। ऐसे में आप यह साड़ी भी नवरात्रि या दुर्गा पूजा के दौरान पहन सकती हैं।
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4. कोरियल साड़ी
कोरियल साड़ी भी बंगाली त्योहारों के लिए एक बढ़िया ऑप्शन है। इसका कलर और बॉर्डर ही इसकी खासियत है। रेड और व्हाइट कलर रंग का कॉम्बिनेशन बंगाली फेस्टिव लुक देता है।
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5. मुर्शिदाबाद सिल्क साड़ी
अगर आपको सिल्क साड़ी पसंद है, तो मुर्शिदाबाद सिल्क साड़ी दुर्गा पूजा के दौरान पहन सकती हैं। यह वेस्ट बंगाल के मुर्शिदाबाद इलाके की ट्रेडिशनल सिल्क साड़ी है। इसकी खासियत इसकी बुनाई और सुंदर लुक है।
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ऐसे करें बंगाली लुक को और खास
अगर आप दुर्गा पूजा के दौरान बंगाली लुक को और खास बनाना चाहती हैं तो इन बातों का ध्यान रखें। जैसे-
- व्हाइट-रेड साड़ी के साथ लाल बिंदी और सिंपल गोल्ड ज्वेलरी ट्राई करें।
- बालों में गजरा लगाकर लुक को और ट्रेडिशनल बना सकती हैं।
- तांत साड़ी के साथ लाइट वेट ज्वेलरी और मिनिमल मेकअप अच्छा लगेगा।
- बालूचरी या मुर्शिदाबाद सिल्क के साथ गोल्ड झुमके पहन सकती हैं।
- दशमी के लिए लाल-सफेद साड़ी के साथ रेड लिपस्टिक वाला लुक ट्राई करें।
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- बंगाली साड़ियों में 'लाल और सफेद' रंग का कॉम्बिनेशन ही क्यों सबसे खास माना जाता है?
- बंगाल की संस्कृति में सफेद या ऑफ-व्हाइट रंग पवित्रता और सादगी का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ऊर्जा, उत्सव और सौभाग्य को दर्शाता है। इसलिए पूजा, अष्टमी और नवमी के खास मौकों पर 'लाल-सफेद' कॉम्बिनेशन की साड़ी सबसे ज्यादा पहनी जाती है।
- तांत (Tant) और गरद (Garad) साड़ी में क्या अंतर है?
- तांत साड़ी शुद्ध कॉटन (सूती) से बनी होती है जो बहुत हल्की और रोजमर्रा या दिन की पूजा के लिए कम्फर्टेबल होती है। वहीं गरद साड़ी सिल्क फैब्रिक से बनती है, जिसका बेस आमतौर पर ऑफ-व्हाइट होता है और उस पर लाल बॉर्डर होता है।
- सिल्क साड़ियों में बालूचरी (Baluchari) साड़ी क्यों इतनी महंगी और खास होती है?
- बालूचरी साड़ी की सबसे बड़ी खासियत इसका पल्लू और बॉर्डर है, जिस पर रामायण, महाभारत या पौराणिक कहानियों के सीन बारीक बुनाई से उकेरे जाते हैं। इसकी भव्यता और शाही लुक की वजह से इसे खास मौकों पर पहना जाता है।
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