Fri Sep 11, 2026 | Updated 06:41 PM IST

इस ऐतिहास‍िक प्रांगण में आते ही दूर हो जाता है सबसे बड़ा डर, अनाखी है मां काली के इस मंदि‍र की कहानी

Goddess Kali Temple In Meerut: मेरठ के सदर इलाके में स्‍थ‍ित मां काली का मंद‍िर सैकड़ों साल पुराना है। बताया जाता है क‍ि यहां कभी श्‍मशान घाट हुआ करता था।  
Updated:- 2026-09-07, 17:00 IST
meerut maa kali temple mystery

उत्तर प्रदेश के मेरठ में मां काली का एक ऐसा मंदिर है, जिसकी कहानी बाकी मंदिरों से थोड़ी अलग है। सदर इलाके में बना यह मंदिर करीब 450 साल पुराना है। सबसे खास बात यह है कि इस मंदिर का संबंध उस जगह से रहा है, जहां कभी श्मशान हुआ करता था। आज यहां दूर-दूर से लोग मां काली के दर्शन करने आते हैं और मन की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। भक्तों का मानना है कि मां काली अपने भक्तों को डर, नकारात्मकता और परेशानियों से बचाती हैं।

मंदिर में नवरात्रि और मां काली की खास पूजा के समय काफी श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां की घंटियों की आवाज, पूजा-पाठ और भक्ति का माहौल लोगों को अलग तरह का सुकून देता है। आज हम आपको अपने इस लेख में बताएंगे क‍ि इस मंदिर की कहानी क्या है और यहां मां काली की पूजा का क्या महत्व है? आइए जानते हैं-

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450 साल पुराना है मेरठ का मां काली मंदिर

मेरठ के सदर इलाके में स्थित सिद्धपीठ मां काली मंदिर का इतिहास करीब 450 साल पुराना है। मंदिर की शुरुआत से जुड़ी कहानी पुरानी मान्यताओं और धार्मिक परंपराओं से जुड़ी हुई है। समय के साथ मंदिर में कई तरह के बदलाव भी हुए।

कभी यहां हुआ करता था श्मशान

इस मंदिर की कहानी की सबसे खास बात इसका पुराना माहौल है। बताया जाता है कि जिस जगह आज मंदिर है, वहां पहले श्मशान हुआ करता था। उस समय इस इलाके में लोग जाने से भी डरते थे, लेकिन मां काली के मंदिर की स्थापना के बाद इस जगह को लेकर लोगों की सोच बदलने लगी। धीरे-धीरे यहां श्रद्धालुओं का आना शुरू हुआ और यह जगह आस्था का केंद्र बन गई।

आज मंदिर के आसपास का इलाका काफी जाना-पहचाना है और यहां लोगों का आना जाना लगा रहता है। इस तरह जिस जगह को कभी डर की वजह से देखा जाता था, वही जगह आज भक्तों के लिए आस्था से जुड़ गई है।

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मां काली को माना जाता है रक्षक

आपको बता दें क‍ि मां काली को शक्ति का एक उग्र रूप माना जाता है। भक्तों की मान्यता है कि मां अपने सच्चे भक्तों को बुरी चीजों, डर और मुश्किलों से बचाती हैं। इसी भरोसे के साथ लोग मंदिर में पहुंचते हैं। कोई मानसिक ताकत के लिए मां से प्रार्थना करता है, तो कोई परिवार में सुख-शांति की कामना लेकर आता है। कई लोग अपने काम और करियर से जुड़ी परेशानियों को दूर करने की इच्छा से भी मां के सामने माथा टेकते हैं।

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दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु

समय के साथ यह मंदिर मेरठ और आसपास के इलाकों के लोगों के लिए आस्था की खास जगह बन गया है। मां काली में विश्वास रखने वाले लोग यहां दर्शन करने आते हैं। मंदिर की करीब 450 साल पुरानी कहानी, इसका धार्मिक महत्व और इससे जुड़ी मान्यताएं इसे खास बनाती हैं। कभी जिस जगह को श्मशान होने की वजह से डरावना माना जाता था, आज वही जगह मां काली की भक्ति और आस्था से जुड़ी हुई है।

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Source- https://kalimandirsewatrust.org/

Image Credit- Freepik/AI

FAQ
क्या मेरठ का मां काली का रहस्‍यमयी मंदिर रात में खुला रहता है?
नहीं, रात की पूजा और आरती के बाद मंदिर के कपाट भक्तों के लिए बंद कर दिए जाते हैं।
तंत्र साधना के लिए मेरठ का मां काली का रहस्‍यमयी मंदिर कैसा है?
यह एक जाग्रत सिद्धपीठ है, जहां कई साधक गुप्त रूप से तंत्र साधना और मां काली की उपासना करते हैं।
मंदिर में बलि की प्रथा कब बंद हुई?
 मंदिर में बलि स्थल है, लेकिन अब यहां जानवरों की बलि पूरी तरह से बंद कर दी गई है।
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