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रेलवे स्टेशन का नाम हमेशा पीले बोर्ड पर ही क्यों लिखा जाता है? जानें

रेलवे स्टेशन पर पीले बोर्ड पर लिखा स्टेशन का नाम सिर्फ एक ही जगह पर नहीं होता, यह यात्रियों की सुविधा और ट्रेन लोको पायलट की सुरक्षा के लिए अलग-अलग लोकेशन पर भी लगाया जाता है।
Updated:- 2026-08-20, 12:17 IST
why every railway station name written on a yellow board on platform

ट्रेन की खिड़की से बाहर देखते हुए जब पीला बोर्ड आंखों के सामने से गुजरता है, तो आपका ध्यान केवल रेलवे स्टेशन के नाम पर जाता है, लेकिन क्या आपने सोचा है कि स्टेशन का नाम हमेशा पीले बोर्ड पर ही क्यों लिखा जाता है? बचपन से लेकर आज तक हमने हर स्टेशन पर यह पीला बोर्ड देखा है। इसके साथ ही एक और सवाल मन में आता है कि पीले रंग के बोर्ड पर हमेशा काले अक्षरों से से ही नाम क्यों लिखा जाता है? आइए जानते हैं इस 'पीले बोर्ड और काले अक्षर' के मैच के पीछे छुपा दिलचस्प कारण।

कोहरे और अंधेरे में भी साफ नजर आता है बोर्ड

सर्दियों के मौसम में धुंध की वजह से ट्रेक भी दिखाई नहीं देता, ऐसे में अगर किसी और रंग के बोर्ड पर स्टेशन का नाम लिखा जाएगा, तो अंधेरे में पढ़ना मुश्किल हो जाएगा। वहीं पीले रंग लाइट पड़ते ही चमकने लगता है, जिससे आप आसानी से स्टेशन पर लिखा नाम पढ़ पाती हैं।

  • पीले रंग से कोहरे के बीच भी लोको पायलट और गार्ड को स्टेशन की लोकेशन समझ आ जाती है।
  • इस रंग के बोर्ड पर नाम लिखने से किसी भी मौसम या समय पर स्टेशन मिस होने का डर नहीं रहता।

Indian Railways yellow board reaso

नाम पढ़ने में नहीं होती दिक्कत

हमेशा नाम पीले बोर्ड पर ही इसलिए लिखा जाता है, ताकि चलती ट्रेन में भी यात्री प्लेटफॉर्म का नाम आसानी से पढ़ पाएं। पीला रंग बहुत चमकदार होता है और इसके ऊपर काले रंग से नाम लिखने पर शब्द खिलकर दिखाई देते हैं। जब ट्रेन बहुत तेज स्पीड में प्लेटफॉर्म से निकलती है, तब भी आपको पढ़ने में दिक्कत नहीं होगी। पीले बैकग्राउंड पर काले अक्षरों का कॉम्बिनेशन होने की वजह से आप दूर से भी आराम से स्टेशन का नाम पढ़ पाती हैं।

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  • पीला रंग पर लिखे काले शब्द को आंखें बहुत जल्दी कैच करती हैं, जिससे दूर से ही ध्यान चला जाता है।
  • पीला रंग पर शब्द धूंधले नहीं लिखते, अंग्रेजी या हिंदी दोनों में ही शब्द पढ़ना आसान होता है।

Station name board color meanin

सेफ्टी और काम में मदद मिलती है

पीले बोर्ड पर लिखा स्टेशन का नाम रेलवे कर्मचारियों के लिए भी मददगार होता है। इससे ट्रैक पर काम चल रहा है या कोई स्टेशन आने वाला है, इसपर ड्राइवर की पहले ही नजर पड़ जाकी है, जिससे ट्रेन कब धीमी करनी है और कहां रोकनी है और सिग्नल पर क्या करना है? इसके बारे में उसे सोचने का वक्त मिल जाता है।

  • ब्रेक लगाने और स्टेशन पर गाड़ी खड़ी करने में कोई गड़बड़ी नहीं होती।
  • यात्रियों के साथ-साथ ट्रेन चलाने वाली टीम की मदद के लिए बनाई गई है।
  • बोर्ड साफ दिखेगा तो ड्राइवर ट्रेन को सही टाइम पर कंट्रोल कर पाएगा।

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रेलवे स्टेशन का नाम पीले बोर्ड पर लिखने का चलन ब्रिटिश काल से ही तय हो गया था। उस समय से रेलवे ने पीले रंग को एक फिक्स नियम बना दिया था।

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Image Credit- gemini, indian railway

FAQ
क्या बिना ट्रेन टिकट के प्लेटफॉर्म पर जाया जा सकता है?
नहीं, स्टेशन प्लेटफॉर्म के अंदर जाने के लिए आपके पास या तो वैलिड ट्रेन टिकट होना चाहिए या फिर प्लेटफॉर्म टिकट होना जरूरी है।
रेलवे ट्रैक के किनारे लगे 'W/L' बोर्ड का क्या मतलब होता है?
ट्रैक के किनारे लगा W/L (Whistle for Level Crossing) मतलब है कि आगे रेलवे फाटकआने वाला है। यह बोर्ड देखते ही ड्राइवर को लगातार सीटी (Horn) बजानी होती है।
प्लेटफॉर्म के साइन बोर्ड्स पर बने C1, C2 का क्या मतलब होता है?
यह बताता है कि आपकी ट्रेन का कौन सा कोच किस जगह पर रुकने वाला है।
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