उत्तराखंड का रहस्यमयी मंदिर, पत्थर थपथपाते ही सुनाई देती है डमरू जैसी आवाज
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भारत का खूबसूरत पहाड़ी राज्य उत्तराखंड आस्था, अध्यात्म और अनसुलझे रहस्यों के लिए जाना जाता है। हिमालय की गोद में बसे इस राज्य में एक से बढ़कर एक ढेरों मंदिर हैं, जिनकी अनूठी परंपराएं हैं। ऐसा ही एक चमत्कारिक मंदिर उत्तराखंड के चमोली जिले के गोपेश्वर में स्थित है। हम बात कर रहे हैं प्रसिद्ध गोपीनाथ मंदिर की। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर अपनी भव्य नक्काशी और सुंदर बनावट के लिए जाना जाता है।
चमोली के गोपीनाथ मंदिर से जुड़ी रहस्यमयी और रोचक बातें
गोपेश्वर में स्थित गोपीनाथ मंदिर में एक ऐसा रहस्यमयी पत्थर मौजूद है, जिसे हाथों से थपथपाने पर डमरू की गूंज सुनाई देती है। आइए जानते हैं इस पावन धाम से जुड़ी खास बातें -
1. गोपीनाथ मंदिर का इतिहास और पौराणिक कथा
गोपीनाथ मंदिर का इतिहास द्वापर युग और महाभारत काल से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण कत्यूरी राजवंश के राजाओं ने करवाया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भोलेनाथ इस स्थान पर तपस्या कर रहे थे, तब कामदेव ने उनकी साधना भंग करने की कोशिश की थी। इससे भगवान शिव क्रोधित हो गए और उन्होंने अपना तीसरा नेत्र खोलकर कामदेव को भस्म कर दिया था। इसके अलावा यह भी माना जाता है कि इस मंदिर में श्रीकृष्ण ने भगवान शंकर की पूजा की थी, तभी से इसका नाम 'गोपेश्वर' यानी ग्वालों के ईश्वर पड़ा।

(image credit: MAGNIFIC)
2. पत्थर को थपथपाते ही आती है डमरू जैसी आवाज
इस मंदिर परिसर में एक खास चट्टान और ऐतिहासिक त्रिशूल मौजूद है। कहा जाता है कि जब कोई भक्त या यात्री इस पत्थर को अपनी हथेली से हल्का सा थपथपाता है, तो इसके अंदर से डमरू जैसी आवाज आने लगती है। स्थानीय लोगों और पुजारियों का मानना है कि यह चमत्कार महादेव की मौजूदगी का अहसास कराता है। वहीं कई वैज्ञानिकों ने भी इस पत्थर की बनावट को समझने का प्रयास किया, लेकिन इससे निकलने वाली आवाज का सही कारण आज भी एक रहस्य ही बना हुआ है।
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3. चमत्कारी त्रिशूल, जो छोटी उंगली से छूते ही कांपने लगता है
मंदिर के गर्भगृह के ठीक बाहर एक विशाल और प्राचीन त्रिशूल मौजूद है, जो सालों से बिना किसी जंग के वैसे ही खड़ा है। कहा जाता है कि अगर कोई इंसान अपनी पूरी ताकत लगाकर भी इसे हिलाना चाहे, तो यह जरा सा भी नहीं हिलता। वहीं अगर कोई सच्चा भक्त श्रद्धा और भक्ति भाव से इसे अपनी छोटी उंगली से छूता है, तो इसमें हल्की सी कंपन होने लगती है।
4. इस मंदिर में शिवलिंग पर नहीं चढ़ाया जाता जल
ज्यादातर शिव मंदिरों में शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाने का विशेष महत्व होता है, लेकिन इस मंदिर में एक अनोखी परंपरा है। माना जाता है कि यहां शिवलिंग पर किसी भी तरह का जल चढ़ाना मना है। यहां श्रद्धालु भगवान शिव को केवल फूल और बेलपत्र ही अर्पित करते हैं।

गोपीनाथ मंदिर कैसे पहुंचे?
अगर आप भी इस रहस्यमयी और अनोखे धाम के दर्शन करना चाहती हैं, तो यहां पहुंचना बेहद आसान है -
- आप ऋषिकेश या हरिद्वार से बस या टैक्सी बुक करके सीधे गोपेश्वर पहुंच सकती हैं।
- यहां का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश और नजदीकी हवाई अड्डा जौली ग्रांट है।
- यहां जाने के लिए मई से अक्टूबर के बीच का समय सबसे बढ़िया माना जाता है।
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जब भी आप किसी काम से या घूमने के इरादे से उत्तराखंड जाएं, तो चमोली के इस प्रसिद्ध गोपीनाथ मंदिर के दर्शन करने जरूर जाएं। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से।
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