तंदूर में खाना पकाने से जुड़ी ये 7 बातें, जो शायद ही पता होंगी आपको

तंदूर का जिक्र आते ही गर्मागर्म तंदूरी रोटी और मुंह में पानी ला देने वाले कबाब की तस्वीर दिमाग में बन जाती है। क्या आपको पता है तंदूर देखने में भले ही मिट्टी का ओवन लगे, लेकिन यह खाना पकाने की एक बेहतरीन मशीन है? आग, हवा और तेज गर्मी मिलकर ऐसा जायका और टेक्सचर तैयार करते हैं, जो किसी और तरीके से मुमकिन ही नहीं। फिर चाहे बात अमृतसर के नान की हो या फिर दिल्ली और मुंबई के नामी रेस्टोरेंट की। बता दें कि तंदूर में जादू सिर्फ मसालों का नहीं बल्कि आंच के सही इस्तेमाल का है। यह पढ़ने के बाद मन में सवाल आता है कि तंदूर खाने में इतना बेहतरीन स्वाद कैसे ला सकता है? तो देर किस बात की चलिए शेफ जगदीश सिंह से जानते हैं तंदूर से जुड़ी 7 कमाल की बातें, जो शायद ही किसी को पता होंगी।
तंदूर में खाना पकाने से जुड़ी 7 दिलचस्प बातें
अगर तंदूर में खाना पकने की प्रक्रिया को आप केवल कोयले की आंच से जुड़ा हुआ देखती हैं, तो आपको बता दें कि इसके पीछे 7 मुख्य कारण है। इनकी वजहों से खाने का स्वाद स्मोकी और कमाल का लगता है।
1. तंदूर का बहुत ज्यादा तापमान
पारंपरिक तंदूर का तापमान 430°C से 500°C तक हो सकता है। इसी तेज गर्मी से नान तुरंत फूल जाता है और कबाब बाहर से जल्दी भुन जाते हैं। कबाब के लिए लगभग 230°C और रोटी-नान के लिए लगभग 330°C तापमान की जरूरत होती है। तंदूर के भीतर ओवन की गर्म दीवारों से निकलने वाली रेडिएंट हीट, चारकोल से मिलने वाली सीधी आग और अंदर तेजी से चक्रवात की तरह घूम रही गर्म हवा का अनूठा मेल काम करता है।

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2. तंदूर की खास सीजनिंग प्रोसेस
लोहे के तवे की तरह तंदूर भी सालों के इस्तेमाल से अपना एक खास गुण विकसित कर लेता है। समय के साथ तेल और मसाले मिट्टी में मिल जाते हैं, जिससे पुराने तंदूर में खाना पकाने का मजा ही अलग होता है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि ओवन के अंदर के हिस्से को गंदा छोड़ दिया जाए। यह एक तरह से मेंटेन किए गए तंदूर को नियमित रूप से साफ किया जाता है और बहुत सावधानी से इस्तेमाल किया जाता है, ताकि मिट्टी अपने सभी प्राकृतिक कुकिंग गुणों को बरकरार रखे।
3. धुएं को सही से कंट्रोल करना
तंदूर में पकाए व्यंजनों में जो खास स्मोकी स्वाद लोगों को आकर्षित करता है, वह केवल भट्टी में बहुत सारा कोयला डालने से नहीं मिलता। असल में जब मीट या सब्जियों का रस नीचे सुलगते कोयलों पर गिरता है, तब जाकर असली और खुशबूदार धुआं उत्पन्न होता है जो ओवन के संकरे घेरे में ऊपर की ओर उठता है। यही वजह है कि शेफ आग की तीव्रता, हवा के बहाव और पकाने के सही समय को बेहद बारीकी से कंट्रोल करते हैं, ताकि डिश का प्राकृतिक स्वाद खराब हुए बिना एकदम संतुलित और मनचाहा स्मोकी फ्लेवर मिल सके।

4. कबाब और नान के अलावा और भी बहुत कुछ
चिकन टिक्का और गार्लिक नान तंदूर की सबसे मशहूर डिश हैं, लेकिन तंदूर सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। यह खाना पकाने की एक बहुत ही कमाल की मशीन है। इसमें तंदूरी मछली, रसीले झींगे, पनीर के बड़े टुकड़े, मशरूम, फूलगोभी, ब्रोकली और गाजर-चुकंदर जैसी जड़ वाली सब्जियों को भी बहुत शानदार तरीके से पकाया जा सकता है।
तंदूर की तेज गर्मी सब्जियों को बाहर से कुरकुरा और सौंधा बना देती है, जबकि अंदर उनका रस और नमी पूरी तरह सुरक्षित रहती है। यही खूबी इसे मांसाहारी खाने के साथ-साथ सेहतमंद और हल्की शाकाहारी डिश बनाने का भी बेहतरीन जरिया बनाती है।
5. मिट्टी से बदल जाता है स्वाद
तंदूर में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी सिर्फ एक ढांचा नहीं है बल्कि यह खाना पकाने की असली जान है। इस मिट्टी की मोटी और मजबूत दीवारें आग की तेज गर्मी को अच्छी तरह सोख लेती हैं और उसे काफी देर तक एक जैसी बनाए रखती हैं। इससे तंदूर के अंदर खाना पकाने के लिए सबसे बेहतरीन और स्थिर माहौल तैयार होता है।
जब गीले मैदे से बनी नान को तंदूर की गर्म दीवारों पर जोर से थापकर चिपकाया जाता है, तो वह एक ही सेकंड में भयंकर गर्मी के संपर्क में आ जाती है। इस तेज गर्मी की वजह से नान की सतह पर सुंदर छाले और खास जले हुए सोंधे निशान उभर आते हैं।
6. नमक मिलाने का सही समय और प्रभाव
मैरिनेशन में नमक मिलाने का सही समय खाने का पूरा टेक्सचर बदल सकता है। विज्ञान के अनुसार, ऑस्मोसिस प्रक्रिया से नमक सामग्री की नमी बाहर खींच सकता है और प्रोटीन की बनावट पर गहरा असर डालता है। जब तंदूरी ओवन के लिए मीट या पनीर तैयार किया जाता है, तो नमक की सही मात्रा और समय से ही अंदर की नरमी और सतह का क्रिस्पीपन तय होता है। सही अनुपात में बना मैरिनेड सामग्री को ज्यादा गीला किए बिना अंदर तक बेहतरीन स्वाद और मसाले सोखने में मदद करता है।

7. दूर का प्राकृतिक वेंटिलेशन और सांस लेना
तंदूर को अच्छे से चलाने और तेज गर्मी बनाए रखने के लिए हवा का सही बहाव बहुत जरूरी है। इसके निचले हिस्से के वेंट और ऊपर के मुहाने से आने-जाने वाली हवा चारकोल को अंदर से अच्छे से सुलगने में मदद करती है। यह हवा तय करती है कि तंदूर के अंदर गर्मी और धुआं किस तरह घूमेंगे।
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लेख पढ़कर आपको तंदूर में खाना इतना स्वादिष्ट क्यों बनता है इसके बारे में पता चल गया होगा। अगर आपको यह लेख पसंद आया है, तो इसे शेयर करें। साथ ही ऐसे आर्टिकल को पढ़ने के लिए जुड़े रहे हरजिंदगी के साथ।
Image Credit- shef jagdish
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