क्या इस मंदिर में मां काली ने दिए थे साक्षात दर्शन? कोलकाता के इस रहस्यमयी मंदिर के बारे में जानें

भारत में देवी-देवताओं के कई मंदिर हैं। इन चमत्कारिक और रहस्यमयी मंदिरों के दर्शन करने के लिए लोग दूर-दूर से यहां आते हैं। ऐसा ही एक प्रसिद्ध मंदिर पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में है। कोलकाता कई ऐतिहासिक धरोहरों को समेटे हुए है, लेकिन यहां मौजूद 'कालीघाट मंदिर' अपने चमत्कारों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है।
कोलकाता का रहस्यमयी काली मंदिर
भारत में अलग-अलग जगहों पर 51 शक्तिपीठ मौजूद हैं और यह मंदिर भी उन्हीं शक्तिपीठों में से एक है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां मां काली ने कभी अपने भक्तों को साक्षात दर्शन दिए थे। आइए जानते हैं इस प्राचीन और रहस्यमयी मंदिर से जुड़े इतिहास के बारे में।
(Image Credit: pinterest/Rengha Chidhambaram)
क्या है कालीघाट मंदिर का इतिहास?
1. पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से माता सती के अंगों को अलग किया था, तब माता के दाहिने पैर की उंगलियां इसी जगह पर गिरी थीं। यही कारण है कि इस स्थान को एक शक्तिशाली शक्तिपीठ के रूप में पूजा जाता है।
2. लोक कथाओं के हिसाब से देखें, तो सदियों पहले महान संत आत्माराम को भागीरथी नदी के तट पर दिव्य शक्ति की अनुभूति हुई थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर और स्वप्न के आधार पर इस जगह पर मां काली के रूप में पूजा की जाने लगी।
3. साक्षात चमत्कारों की अनुभूति के आधार पर इस मंदिर के गर्भगृह में मां काली की ऊर्जा इतनी तीव्र और जाग्रत है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है और कुछ संतों को यहां मां की उपस्थिति का अहसास भी होता है।
मंदिर की बनावट और पूजा से जुड़ी जरूरी जानकारी
इस मंदिर को 19वीं सदी में सबारणा राय चौधरी परिवार के द्वारा बनवाया गया था। इसे बंगाल की पारंपरिक आठ छतों वाली झोपड़ी की तरह डिजाइन किया गया है। मंदिर में मां काली की एक खूबसूरत मूर्ति है, जो काले बलुआ पत्थर से बनी हुई है। हर जगह माता की मूर्ति की दो आंखें होती हैं, मगर इस मंदिर में माता की तीन आंखें हैं। यही नहीं, सोने की लंबी जीभ और चार हाथ भी हैं, जो बाकी मूर्तियों से थोड़े अलग हैं। इस मंदिर में सालों पुराना एक तालाब भी है, जिसे 'कुंडुपुकुर' के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इसी तालाब में माता सती का अंग मिला था।
रामकृष्ण परमहंस ने भी किए थे मां काली के साक्षात दर्शन
कोलकाता में केवल कालीघाट मंदिर ही नहीं, बल्कि दक्षिणेश्वर काली मंदिर भी है, जो पूरी दुनिया में मशहूर है। दक्षिणेश्वर मंदिर का नाता रामकृष्ण परमहंस से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि इस मंदिर में भी रामकृष्ण परमहंस ने अपने जीवनकाल में मां काली के साक्षात दर्शन किए और उनकी अलौकिक शक्ति का अनुभव किया था।
(Image Credit: pinterest/Prasanta Chatterjee)
कैसे पहुंचें कोलकाता के कालीघाट मंदिर?
अगर आप भी कोलकाता के इस मंदिर तक जाना चाहती हैं, तो यहां पहुंचने के लिए इन आसान रास्तों को अपना सकती हैं -
- आप नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक की टिकट ले सकती हैं।
- रेलवे स्टेशन की बात करें, तो आप हावड़ा जंक्शन तक ट्रेन से आ सकती हैं।
- हावड़ा अड्डा या एयरपोर्ट पहुंचने के बाद आप मेट्रो से सीधे मंदिर तक जा सकती हैं। इसके लिए सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन कालीघाट मेट्रो स्टेशन है, जो ब्लू लाइन पर स्थित है।
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निष्कर्ष:कोलकाता का कालीघाट मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि आस्था, रहस्य और सनातन संस्कृति का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है। 51 शक्तिपीठों में से एक इस मंदिर के दर्शन करने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। सती के अंग गिरने की पौराणिक कथा और यहां आने वाले भक्तों के चमत्कारी अनुभवों ने इस स्थान को बेहद खास और प्रसिद्ध बना दिया है। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से।
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