2000 साल में एक भी बार बंद नहीं हुआ यह मंदिर, जानिए मुंडेश्वरी देवी का अद्भुत इतिहास

हमारे भारत को विविधता का देश कहा जाता है। यहां ऐसे कई मंदिर हैं जिनसे जुड़ी अपनी अलग कहानी और मान्यताएं हैं, लेकिन बिहार के कैमूर में मौजूद मां मुंडेश्वरी देवी मंदिर की बात ही कुछ अलग है। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां सदियों से पूजा-पाठ चलता आ रहा है और मंदिर कभी एक दिन के लिए भी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। इसी वजह से इसकी गिनती दुनिया के सबसे पुराने सक्रिय हिंदू मंदिरों में होती ह&्वै।
क्या है मुंडेश्वरी देवी मंदिर का इतिहास?
आपको बता दें कि यह मंदिर पंवरा पहाड़ के ऊपर बना है और इसके आसपास हर तरफ हरियाली और पहाड़ का सुंदर नजारा देखने को मिलता है। यहां पहुंचकर आपको मंदिर की न केवल सुंदर बनावट देखने को मिलेगी बल्कि अंदर मौजूद देवी की प्राचीन मूर्ति और पंचमुखी शिवलिंग भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचती हैं। यह मंदिर करीब 2000 साल पुराना है। आज हम आपको इस मंदिर का इतिहास और इससे जुड़ी रोचक बातें बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं-
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पंवरा पहाड़ पर बना है मंदिर
मां मुंडेश्वरी देवी मंदिर पंवरा पहाड़ की चोटी पर है। यह पहाड़ करीब 600 फीट की ऊंचाई पर है। यहां चारों ओर फैली हरियाली के बीच बना यह मंदिर दूर से ही नजर आ जाता है। खास बात तो यह है कि मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब 524 फीट तक सड़क बनी हुई है, जहां छोटी गाड़ियां जा सकती हैं।
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क्यों कहा जाता है सबसे पुराने सक्रिय मंदिरों में से एक?
लोग इस मंदिर को सबसे पुराने सक्रिय मंदिरों में से एक मानते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यहां लगातार होने वाली पूजा है। माना जाता है कि यहां पूजा और धार्मिक रस्में लंबे समय से बिना रुके होती आ रही हैं।
मंदिर का इतिहास भी है काफी पुराना
ऐसा कहा जाता है कि पुरातत्वविदों को यहां से एक शिलालेख भी मिला है, जो करीब 389 ईस्वी के आसपास का है। इसी शिलालेख से लोगों को मालूम चलता है कि यह मंदिर कितना पुराना है। साथ ही मंदिर की जो नक्काशी है और यहां मूर्तियों में भी उत्तर गुप्तकाल की कला की झलक दिखाई देती है। इस मंदिर को पत्थरों से बनाया गया है और इसका डिजाइन भी बाकी मंदिरों से अलग है।
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आठ कोणों वाला है मंदिर
आपने ज्यादातर मंदिरों में देखा होगा कि उसका डिजाइन गुंबद या तिकोने वाला होगा, लेकिन मुंडेश्वरी मंदिर की बनावट इसकी सबसे खास चीजों में से एक है। दरअसल, यह आठ कोणों वाला मंदिर है। शायद ही इस डिजाइन का कोई और मंदिर होगा। इस मंदिर में चार एंट्री प्वॉइंट हैं। ये अलग-अलग दिशाओं में ही खुलते हैं। हालांकि, इनमें से एक द्वार को बंद कर दिया गया है और एक अर्धद्वार है।
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मां मुंडेश्वरी की प्राचीन मूर्ति है खास
मंदिर के अंदर की बात करें तो यहां के पूर्वी हिस्से में मां मुंडेश्वरी की पत्थर से बनी प्राचीन मूर्ति है। यहां देवी वाराही रूप में विराजमान हैं और उनका वाहन महिष (भैंसा) है। इसके अलावा मंदिर में देवी के साथ भगवान शिव और दूसरे देवी-देवताओं की मूर्तियां भी हैं।
बीच में है पंचमुखी शिवलिंग
मंदिर के बीच वाले हिस्से की बात करें तो यहां पर पंचमुखी शिवलिंग स्थापित हैं। यह शिवलिंग भी मंदिर की खास पहचान है। इसके बारे में एक दिलचस्प बात बताई जाती है कि जिस पत्थर से यह शिवलिंग बना हुआ है, उसका रंग सूरज के ढलने और उगने पर बदलता हुआ दिखाई देता है।
मंदिर के बाहर है नंदी की बड़ी मूर्ति
जहां शिव होते हैं, वहां नंदी न हों, ऐसा हो ही नहीं सकता है। ऐसे में मंदिर के पश्चिम साइड पर पूर्व दिशा की तरफ मुंह किए हुए नंदी की भी बड़ी सी मूर्ति है। यह मूर्ति आज भी काफी अच्छी हालत में है।
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यहां बलि की परंपरा है बिल्कुल अलग
मुंडेश्वरी मंदिर से जुड़ी एक और खास बात बताई जाती है और वो है यहां की बलि की परंपरा। जी हां, यहां पर बकरे की बलि चढ़ाने की परंपरा है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि बकरे का वध यानी कि मारा नहीं जाता है। यह बलि की सात्विक परंपरा है।
मंदिर में पहले किसकी पूजा होती थी?
समय के साथ हर जगह बदलाव आते हैं और ऐसा ही इस मंदिर के इतिहास और पूजा-पाठ के तरीकों में भी हुआ था। सातवीं शताब्दी की बात है जब शैव परंपरा (भगवान शिव की भक्ति) का असर बढ़ा था तब विनितेश्वर भगवान को यहां के मुख्य देवता के रूप में पूजा जाने लगा। उनके चार मुख वाले शिवलिंग (चतुर्मुखलिंग) को मंदिर के बीचों-बीच स्थापित किया गया। इसके बाद कैमूर की पहाड़ों पर रहने वाले चेरो समुदाय का प्रभाव बढ़ा। चेरो समाज के लोग देवी शक्ति की पूजा करते थे। इसी समय माता मुंडेश्वरी को मंदिर की मुख्य देवी का स्थान मिला, हालांकि शिवलिंग पहले की तरह मंदिर के बीच में ही रहा।
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रामनवमी और शिवरात्रि पर जुटते हैं श्रद्धालु
मंदिर में तो वैसे पूरे साल श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन रामनवनी और शिवरात्रि के समय यहां खास रौनक देखने को मिलती है। इन मौकों पर बड़ी संख्या में लोग मंदिर पहुंचकर पूजा और दर्शन करते हैं।
पटना से कैसे पहुंचें मुंडेश्वरी देवी मंदिर?
अगर आप मां मुंडेश्वरी देवी मंदिर जाने का प्लान बना रही हैं, तो आपको पहले पटना आना होगा। पटना से भभुआ के लिए गाड़ियां मिल जाती हैं। आप यहां से आराम से पहुंच जाएंगी।
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Source-
- https://tourism.bihar.gov.in/en/destinations/kaimur/mundeshwari-devi-temple
- https://kaimur.nic.in/hi/tourist-place/%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%B2/
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Image Credit- Bihar Tourism
- मुंडेश्वरी मंदिर किस जिले में स्थित है?
- यह प्रसिद्ध मंदिर बिहार के कैमूर जिले में भभुआ के पास पंवरा पहाड़ी पर स्थित है।
- मुंडेश्वरी मंदिर का निकटतम रेलवे स्टेशन कौन सा है?
- सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन भभुआ रोड (मोहनिया) है, जो मंदिर से लगभग 30 किलोमीटर दूर है।
- मां मुंडेश्वरी मंदिर के दर्शन का समय क्या है?
- यह मंदिर आमतौर पर सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक दर्शन के लिए खुला रहता है।
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