Fri Sep 11, 2026 | Updated 08:39 PM IST

बर्फ से ढके पहाड़ों के बीच बसा है दुनिया का सबसे ऊंचा गांव, जानिए भारत में कहां है यह जन्नत?

ह‍िमाचल प्रदेश में दुन‍िया का सबसे ऊंचा गांव है। खास बात तो यह है क‍ि इसी गांव में सबसे ऊंचा रेस्‍टोरेंट भी है जहां गरमा-गरम चाय पीने का अपना ही मजा है। हम आपको इस गांव के बारे में व‍िस्‍तार से जानकारी दे रहे हैं।
Updated:- 2026-08-21, 20:00 IST
worlds highest village in himachal pradesh

अगर आपको ऐसी जगहों पर घूमना पसंद है, जहां चारों ओर बर्फ से ढके पहाड़ हों, हवा एकदम शुद्ध हो और दूर-दूर तक स‍िर्फ पहाड़ ही नजर आ रहे हों, तो ह‍िमाचल प्रदेश से बेहतरीन जगह भला कोई और हो सकती है? यहां ऐसे कई शहर, कस्‍बे और गांव हैं, जि‍नके नजारे देखने लायक होते हैं, लेक‍िन क्‍या आप जानती हैं क‍ि हि‍माचल प्रदेश में एक ऐसा गांव भी है जो दुन‍िया में सबसे ऊंचा गांव है?

समुद्र तल से करीब 15000 फीट की ऊंचाई पर बसा यह गांव बहुत ही खूबसूरत है। यहां 150 लोग ही रहते हैं। अगर आप भी इस अनोखे गांव को अपनी ट्रैवल लिस्ट में शामिल करना चाहती हैं, तो यहां जाने से पहले इससे जुड़ी जरूरी बातें जान लीजिए।

क्‍या है दुन‍िया के सबसे ऊंचे गांव का नाम?

ज‍िसे दुन‍िया का सबसे ऊंचा गांव कहा जाता है उसका नाम कौमिक गांव है। यह हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले की स्पीति वैली में है। इसकी ऊंचाई समुद्र तल से करीब 15 हजार फीट की ऊंचाई पर है। इतनी ऊंचाई पर होने की वजह से यहां का मौसम काफी ठंडा रहता है। आमतौर पर यहां का टेंपरेचर जीरो रहता है। सर्दियों में तो यहां हैवी रेनफॉल भी होता है। यही वजह है कि कौमिक को देखकर आपको ऐसा लगेगा जैसे आप किसी अलग ही दुनिया में पहुंच गई हैं। चारों तरफ ऊंचे पहाड़, बर्फ और शांत वातावरण इस गांव की सबसे बड़ी खूबसूरती है।

कौमिक नाम का क्या मतलब है?

आपको बता दें क‍ि यह कोई साधारण नाम नहीं है, वहां क‍ी भाषा में इसका बहुत खूबसूरत मतलब है। कौ का मतलब है स्नोकॉक यानी हिमालय में बहुत ऊंचाई पर उड़ने वाला एक बड़ा पक्षी, वहीं मिक का मतलब आंख है। इस तरह कौमिक का मतलब स्नोकॉक पक्षी की आंख हुआ।

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नाम के पीछे की कहानी क्‍या है?

कहा जाता है कि बहुत समय पहले जब बौद्ध भिक्षु यहां मठ बना रहे थे, तब उन्होंने इस ऊंची जगह को देखा। पहाड़ों और सूखी जमीन के बीच इस जगह और मठ की बनावट बिल्कुल स्नोकॉक पक्षी की तेज आंख जैसी दिखाई देती थी। इस वजह से इसका नाम कौम‍िक गांव पड़ गया।

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कौम‍िक गांव के लोगों का ज‍ीवन भी है खास

कौमिक की खूबसूरती देखकर शायद आपको लगे कि यहां रहना किसी सपने जैसा होगा, लेकिन इतनी ऊंचाई पर जिंदगी बिताना आसान नहीं है। इस गांव में करीब 150 लोग रहते हैं। यहां खेती करना भी काफी मुश्किल है। इसके बावजूद लोग जौ और मटर जैसी फसलें उगाते हैं। यहां रहने वाले लोगों की ज‍िंदगी जानवरों पर नि‍र्भर है। लोग भेड़, याक और बकरियां पालते हैं। इनसे उन्हें दूध और ऊन मिलता है। यहां के घर भी मौसम को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं। घरों में मिट्टी और पत्थरों का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि ठंड के मौसम में अंदर का तापमान ज्यादा गर्म रह सके।

कौमिक पहुंचकर जरूर देखें सांग्ये टंगयुद मठ

कौमिक गांव की पहचान सिर्फ इसके पहाड़ों और बर्फ से नहीं है। यहां का सांग्ये टंगयुद मठ भी इस जगह की खास पहचान माना जाता है। बताया जाता है क‍ि यह बौद्ध धर्म के शाक्य संप्रदाय से जुड़ा एक पुराना केंद्र है। यहां बौद्ध भिक्षु रहते हैं। अगर आप यहां घूमने जाती हैं तो मठ जरूर जाएं।

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दुनिया के सबसे ऊंचे रेस्‍टोरेंट में प‍िएं चाय

आपको बता दें क‍ि कौमिक में एक छोटा सा रेस्‍टोरेंट भी है, जिसे दुनिया का सबसे ऊंचा रेस्टोरेंट कहा जाता है। जरा सोचिए, करीब 15 हजार फीट की ऊंचाई पर बैठकर चाय या कॉफी पीना और सामने बर्फीले पहाड़ देखना, कैसा लगेगा? यहां जाे लोग आते हैं, वो यहां चाय या कॉफी जरूर पीते हैं। इसके अलावा यहां आपको लोकल खाने का स्वाद लेने का भी मौका मिलेगा।

कौमिक के पास इन जगहों को भी करें एक्‍सप्‍लोर

अगर आप इतनी दूर कौमिक तक जा ही रही हैं, तो आसपास की दूसरी खूबसूरत जगहों को भी अपनी ट्रिप में शामिल कर सकती हैं।

1. हिक्किम

कौमिक के पास ही हिक्किम है। यहां दुनिया का सबसे ऊंचा डाकघर यानी क‍ि पोस्‍ट ऑफ‍िस भी ह‍ै। इतनी ऊंचाई पर बना डाकघर देखने लायक है।

2. लांगजा

लांगजा भी इस इलाके की खास जगहों में शामिल है। यहां भगवान बुद्ध की एक बड़ी सी मूर्ती है। यह जगह अपने फॉसिल्स (Fossils) यानी जीवाश्मों के लिए भी जानी जाती है। इसलिए अगर आपको पहाड़ों के साथ ऐसी जगहें देखना पसंद है जहां कुछ अलग देखने को मिले, तो लांगजा को भी प्लान में रख सकती हैं।

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आसान नहीं है कौमिक तक पहुंचना

कौमिक की खूबसूरती जितनी खास है, वहां तक पहुंचना उतना ही मुश्‍क‍िल है। क्‍योंक‍ि यह गांव काफी ऊंचाई पर है और पहाड़ी रास्ते भी ऊबड़-खाबड़ हैं। जैसे-जैसे आप ऊंचाई पर चढ़ाई करेंगी, हवा में ऑक्सीजन का लेवल कम होता जाएगा। इस वजह से कुछ लोगों को एल्टीट्यूड सिकनेस की परेशानी भी हो जाती है। इसल‍िए यहां जाने से पहले मौसम और अपनी तबीयत को देख लें।

कौम‍ि के ल‍िए क‍ितनी द‍िन की प्‍लान करें ट्र‍िप?

अगर आप सिर्फ कौमिक देखकर वापस नहीं आना चाहती हैं बल्‍क‍ि उसके आसपास की जगहों को भी एक्‍सप्‍लोर करना चाहती हैं, ताे 5 द‍िनों की ट्र‍िप प्‍लान कर सकती हैं। कौमिक के साथ हिक्किम और लांगजा को भी एक्‍सप्‍लोर कर लें। इससे आपको बार-बार अलग से ट्र‍िप प्‍लान करने की जरूरत नहीं पड़ेगरी।

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कौम‍िक जा रही हैं तो कहां रुकें?

गांव में कुछ स‍िंपल से होमस्टे हैं और मठ से जुड़े बहुत ही साधारण कमरे भी हैं। यहां के कमरे मिट्टी के होते हैं। साथ ही यहां आपको मोटे कंबल, शेयर‍िंग वॉशरूम और ठंड से बचने के ल‍िए चूल्‍हे की सुव‍िधा म‍िलेगी। वैसे तो यहां आने वाले लोग एक रात जरूर रुकते हैं क्‍योंक‍ि यहां सनराइज यानी उगता हुआ सूरज देखने लायक होता है। वहीं, रात में आसमान का नजारा बहुत ही सुंदर लगता है।

कौम‍िक में क्या खाएं?

कौमिक में एक छोटा रेस्‍टोरेंट भी है। यहां आप गर्म चाय, कॉफी और लोकल खाने का स्वाद ले सकती हैं। इतनी ठंडी जगह पर गर्म चाय या कॉफी पीना भी आपकी यात्रा का यादगार बना सकता है। हालांक‍ि, यहां खाने के सीम‍ित ऑप्‍शन ही हैं। इसल‍िए अपने साथ कुछ स्‍नैक्‍स लेकर ही जाएं।

कौमिक जाते समय इन बातों का रखें ध्यान

इतनी ऊंचाई वाली जगह पर घूमने जा रही हैं तो कुछ बातों का ध्‍यान जरूर रखना चाह‍िए। खासकर पहली बार जाने वाले लोगों के लिए यह जरूरी है।

  • कौमिक करीब 15 हजार फीट की ऊंचाई पर है।
  • यहां ज्यादातर समय काफी ठंड रहती है।
  • सर्दियों में भारी बर्फबारी होती है।
  • ऊंचाई बढ़ने पर ऑक्सीजन कम होने से एल्टीट्यूड सिकनेस हो सकती है।
  • पहाड़ी रास्ते ऊबड़-खाबड़ हैं।
  • सफर के दौरान धीरे-धीरे आगे बढ़ें।
  • मौसम को ध्यान में रखकर ही ट्र‍िप की प्लानिंग करें।
  • कौमिक के साथ हिक्किम और लांगजा भी घूम सकती हैं।

कब जाएं?

कौमिक में सर्दियों के समय भारी बर्फबारी होती है और तापमान भी माइनस में चला जाता है, इसल‍िए यहां मई से अक्‍टूबर के बीच जाने की सलाह दी जाती है।

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कैसे पहुंचें कौमिक गांव?

अगर आप द‍िल्‍ली से कौम‍िक गांव जा रही हैं, तो बस सबसे बढ़‍िया ऑप्‍शन रहेगा। आप बस लेकर स्पीति वैली पहुंच सकती हैं। यहां से बाइक या स्‍कूटी रेंट पर म‍िल जाएगी। इससे आप कौमिक गांव पहुंच सकती हैं।

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Image Credit- Freepik/AI

FAQ
क्या कौमिक गांव जाने के लिए परमिट की आवश्यकता होती है?
भारतीय नागरिकों के लिए परमिट जरूरी नहीं है, लेकिन विदेशी पर्यटकों को 'प्रोटेक्टेड एरिया परमिट' (PAP) लेना अनिवार्य है।
क्या कौमिक गांव में मोबाइल नेटवर्क या एटीएम की सुविधा है?
नहीं, कौमिक में मोबाइल नेटवर्क और एटीएम नहीं चलते। सबसे नजदीकी सुविधा काजा में मिलती है।
कौमिक गांव जाने के लिए सबसे नजदीकी पेट्रोल पंप कहां है?
सबसे नजदीकी पेट्रोल पंप लगभग 18 किलोमीटर दूर काजा में स्थित है।
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