अरुणाचल की 'माधुरी लेक' क्यों है खास? भूकंप से जुड़ी है इसकी अनोखी कहानी
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अरुणाचल प्रदेश अपनी हसीन वादियों, बर्फ से ढकी पहाड़ियों और खूबसूरत झीलों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। इस राज्य के तवांग जिले में समुद्र तल से लगभग 12,000 फीट की ऊंचाई पर एक ऐसी खूबसूरत और रहस्यमयी जगह मौजूद है, जिसे देखने के लिए विदेश से भी लोग यहां आते हैं। इस स्थान को स्थानीय भाषा में 'संगेश्तर त्सो झील' के नाम से जाना जाता है। हालांकि बाहर से आने वाले पर्यटकों के लिए यह झील 'माधुरी लेक' के नाम से ज्यादा प्रसिद्ध है। यहां चारों तरफ फैली बर्फ की चादर, पहाड़ और झील सुकून भरा एहसास देते हैं।
अरुणाचल प्रदेश की खूबसूरत झील
अरुणाचल प्रदेश की यह खूबसूरत झील शुरू से ऐसी नहीं थी, इसका वजूद सन 1950 में आए विनाशकारी भूकंप से जोड़ा जाता है। आइए जानते हैं माधुरी लेक से जुड़े कुछ दिलचस्प तथ्यों के बारे में -
1950 के भूकंप में हुआ झील का निर्माण
अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिला प्रशासन के आधिकारिक पोर्टल के अनुसार 15 अगस्त 1950 को असम और अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाके में 8.6 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप आया था। इस भूकंप की वजह से यहां की भौगोलिक स्थिति पूरी तरह बदल गई। यही नहीं, चट्टानें और पहाड़ भी धंस गए थे। पहाड़ों के बीच स्थित घने चीड़ के जंगल वाली घाटी अचानक जलमग्न हो गई और धंसी हुई घाटी ने एक विशाल प्राकृतिक झील का रूप ले लिया, जिसे आज लोग संगेश्तर त्सो झील के नाम से जानते हैं।

नीले पानी के बीच सूखे पेड़ों का अद्भुत दृश्य
आपको जानकर हैरानी होगी कि इस झील का दृश्य बाकी झीलों से काफी अलग है। 1950 के भूकंप में जब पूरा जंगल पानी में डूब चुका था, तब वहां मौजूद चीड़ के पेड़ भी जलमग्न हो गए थे। भूकंप के दशकों बाद भी उन विशाल वृक्षों के सूखे और बिना पत्तियों वाले तने झील के नीले पानी के बीच से बाहर निकलते हुए नजर आते हैं। देखने में यह दृश्य बड़ा ही अद्भुत और हैरान कर देने वाला लगता है।
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कैसे पड़ा 'माधुरी लेक' नाम?
अब आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि संगेश्तर झील का नाम 'माधुरी लेक' कैसे पड़ा? बता दें कि साल 1997 में एक ब्लॉकबस्टर फिल्म रिलीज हुई थी, जिसका नाम 'कोयला' था। इसकी शूटिंग इसी झील के किनारे हुई थी। फिल्म में एक गाना था, तन्हाई तन्हाई, जिसमें अभिनेत्री माधुरी दीक्षित ने अभिनेता शाहरुख़ खान के साथ इस झील के आसपास डांस किया था। यह फिल्म सुपरहिट रही और इसी वजह से यह झील पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई। पर्यटक और स्थानीय लोग इस फिल्म के बाद से ही इसे 'माधुरी लेक' के नाम से जानने लगे।
भारतीय सेना की देखरेख और पहाड़ी जायका
इस झील का रख-रखाव और सुरक्षा भारतीय सेना के जवान करते हैं। झील के किनारे पर खूबसूरत कैफे और रेस्टोरेंट भी चलाए जाते हैं। ऐसे में बर्फीली वादियों के बीच आप यहां मैगी और गरमा-गरम चाय के अलावा पहाड़ी मोमोज तथा कई तरह की लोकल पहाड़ी डिशेज का स्वाद ले सकती हैं।
माधुरी लेक कैसे पहुंचें?
अगर आप भी माधुरी लेक तक जाना चाहती हैं, तो इसके सबसे नजदीकी एयरपोर्ट लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (गुवाहाटी) और तेजपुर एयरपोर्ट हैं। इसके अलावा रांगापारा नॉर्थ और गुवाहाटी रेलवे स्टेशन सबसे नजदीक पड़ेंगे। एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन से आप शेयरिंग सरकारी बसें या प्राइवेट टैक्सी लेकर आसानी से इस झील तक पहुंच सकती हैं।

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निष्कर्ष: अरुणाचल प्रदेश की माधुरी लेक एक बेहद खूबसूरत और ऐतिहासिक पर्यटन स्थल है, जिसका स्वरूप 1950 के भूकंप के बाद पूरी तरह बदल गया था। आज भी यहां देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी लोग घूमने आते हैं। अगर आप भी इस खूबसूरत झील का दीदार करना चाहती हैं, तो तवांग ट्रिप के दौरान यहां आसानी से पहुंच सकती हैं। यह आपके चेहरे की खूबसूरती में चार चांद लगा देगा। यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हरजिंदगी से।
(image credit: MAGNIFIC/shutterstock)
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