त्योहार हमारी भारतीय संस्कृति और परंपरा का एक बड़ा हिस्सा हैं। भारत की विविधता की झलक यहां के त्योहारों में भी नजर आती है। अलग-अलग राज्यों में विविध त्योहार मनाए जाते हैं, जो उस राज्य की समृद्ध संस्कृति का बखान करते हैं। ऐसा ही कुछ ओडिशा में भी देखने को मिलता है। आमतौर पर जब ओडिशा के त्योहारों की बात होती है तो इसे केवल रथयात्रा से जोड़कर देखा जाता है। जबकि राज्य में इससे कहीं अधिक जश्न मनाए जाते हैं। जिसके बारे में अधिकतर लोगों को पता नहीं होता। दुर्गा पूजा और रथ यात्रा के अलावा भी ऐसे कई फेस्टिवल्स होते हैं, जिन्हें लेकर स्थानीय लोगों में बेहद उत्सुकता दिखाई देती है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको ओडिशा में मनाए जाने वाले कुछ कलरफुल फेस्टिवल्स के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें जानने के बाद आप भी इन उत्सवों का हिस्सा बनना चाहेंगी-

दुर्गा पूजा

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दुर्गा पूजा बंगालियों के लिए जितनी महत्वपूर्ण है, वही ओडिशा के लोगों के लिए भी इसका बहुत महत्व है। यह आश्विन या कार्तिक के महीने में, सितंबर या अक्टूबर के दौरान, बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाने के लिए मनाया जाता है। त्योहार महिषासुर के खिलाफ अपनी जीत पर दुर्गा मां की शक्ति का जश्न मनाता है। सड़कों पर चारों ओर टिमटिमाती रोशनी जगमगाती हुई नजर आती है। वहीं सड़कों के पार पंडालों में भगवान गणेश और कार्तिक के साथ देवी सरस्वती और लक्ष्मी के साथ दुर्गा माँ की विशाल मूर्तियां हैं। यह त्योहार ओडिशा में लोगों द्वारा मनाए जाने वाले सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है।

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रथ यात्रा

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दुर्गा पूजा के अलावा, एक और महत्वपूर्ण त्यौहार जो ओडिशा के लिए एक रथ यात्रा या रथ उत्सव है। यह त्योहार इतना लोकप्रिय है कि ओडिशा में इसे मनाने के लिए देश और कभी-कभी दुनिया भर से लोग आते हैं। यह ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा की रात को आयोजित किया जाता है। यह त्योहार भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के लिए मनाया जाता है। ओडिशा के पुरी में उस दिन के दौरान, उनकी मूर्तियों को सुदर्शन चक्र के साथ स्नान के लिए निकाला जाता है। इस त्योहार का उत्सव एक पखवाड़े तक चलता है, जो 14 दिनों का होता है। त्योहारों के दौरान कई रीति-रिवाजों और धार्मिक प्रथाओं को परंपराओं के अनुसार किया जाता है।

कलिंग महोत्सव

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कलिंग महोत्सव ओडिशा में लोगों द्वारा मनाए जाने वाले लोकप्रिय त्योहारों में से एक है। इस त्योहार को मनाने के पीछे की अपनी एक अलग कहानी है, जिसके बारे में आपको शायद ना पता हो। ओडिशा का एक बड़ा हिस्सा कलिंग के रूप में जाना जाता था, अशोक के शासन के दौरान कई शहीदों की हत्या का गवाह था। कलिंग महोत्सव को युद्ध पर शांति की जीत का जश्न मनाने के लिए शुरू किया गया था। इस उत्सव में कई मार्शल आर्ट शामिल होते हैं जो मौर्य वंश के शहीदों के योगदान को सेलिब्रेट करते हैं। प्रदर्शन भुवनेश्वर के धौली शांति स्तूप में किया जाता है।

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छाऊ महोत्सव

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ओडिशा में एक और महत्वपूर्ण और काफी लोकप्रिय त्योहार है छाऊ महोत्सव। यह त्योहार 3 दिनों तक मनाया जाता है और ओडिशा में भुइयां जनजातियों द्वारा मनाया जाता है। इस त्योहार के दौरान ओडिशा में लोगों द्वारा छऊ नृत्य का प्रदर्शन किया जाता है। छाई नृत्य, नृत्य का एक पारंपरिक रूप है जिसमें मार्शल आर्ट और लोक नृत्य शामिल है। छऊ नृत्य के दौरान नकाब पहने जाते हैं और पारंपरिक पोशाक नृत्य के रोमांच को और बढ़ाता है।

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सीतल षष्ठी कार्निवाल

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जितना इस त्योहार का नाम अनोखा है, उतना ही अदभुत है यह त्योहार। सीतल षष्ठी कार्निवल एक कार्निवल के रूप में मनाया जाने वाला एक बहुत ही लोकप्रिय त्योहार है। कार्निवल या त्योहार में भगवान शिव का विवाह भगवान पार्वती के साथ मनाते हैं। यह सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से एक है और यह ओडिशा के सभी शिव मंदिरों में मनाया जाता है। यह त्योहार ज्येष्ठ के महीने में शुभ पंचमी के दिन मनाया जाता है। अक्सर, यह गर्मी के मौसम के अंत और आने वाले मानसून को दर्शाने के लिए भी मनाया जाता है। यह मुख्य रूप से ओडिशा के पश्चिमी भाग में मनाया जाता है।

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