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Katran Market History: कपड़ों के छोटे टुकड़ों से कैसे पड़ा दिल्ली के कतरन मार्केट का नाम? इतिहास है दिलचस्प

दिल्ली की मंगोलपुरी स्थित कतरन मार्केट, जो कभी बंजर जमीन थी, आज एशिया की सबसे बड़ी कतरन बाजार है। यह बाजार छोटे कपड़ों के टुकड़ों से शुरू होकर अब ब्रांडेड फैब्रिक का केंद्र बन गई है, जो हजारों लोगों को आजीविका प्रदान करती है।
Updated:- 2026-08-24, 22:38 IST
Ktran Market History In Hindi

History of Katran Market: बात जब कपड़ों के फैब्रिक की आती है, तो लोगों को जुबान पर दिल्ली के मंगोलपुरी की मशहूर कतरन मार्केट का नाम जरूर आता है। यह जगह आज न केवल दिल्ली बल्कि एशिया की सबसे बड़ी कतरन बाजार है। अगर इसके नाम पर गौर करें, तो कतरन यानी कपड़ों के छोटे-छोटे टुकड़े और मार्केट यानी बाजार। इसका सीधा अर्थ है कि ऐसा बाजार जहां कपड़ों को टुकड़े मिलते हैं। हालांकि, वर्तमान में यहां पर सस्ते फैब्रिक से लेकर ब्रांडेड फैब्रिक मिलते हैं।

मगर क्या आपको पता है कि यह मार्केट आज जिस जगह पर बसी है वह कभी बंजर जमीन हुआ करती थी? नीचे लेख में जानें इस जगह का इतिहास।

बंजर जमीन पर बसी है कतरन मार्केट

मंगोलपुरी का वह इलाका जहां आज कतरन मार्केट शान से खड़ी है, कभी बंजर जमीन हुआ करती थी। दशकों पहले दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में छोटे दर्जी, कपड़ा व्यापारी और पटरी वाले अपनी रोजी-रोटी चलाया करते थे। जब प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई, तो इन छोटे दुकानदारों और कारोबारियों के सामने रोजी-रोटी का बड़ा संकट खड़ा हो गया।

katran market history

ऐसे में सरकार और स्थानीय प्रशासन ने मंगोलपुरी की इस खुली और बंजर जमीन को इन विस्थापित दुकानदारों के पुनर्वास के लिए चुना। शुरुआत में यहां सिर्फ कुछ टिनशेड और फट्टियां लगाकर काम शुरू किया गया था।

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'कतरन मार्केट' नाम के पीछे की कहानी

दिल्ली की प्रसिद्ध कतरन मार्केट नाम के पीछे कपड़ों के बचे हुए टुकड़ों का एक दिलचस्प इतिहास जुड़ा हुआ है। आज से कई दशक पहले, जब दिल्ली में दर्जी कपड़ों की सिलाई किया करते थे, तो सिलाई के बाद जो छोटे-छोटे कपड़े के टुकड़े बच जाते थे, उन्हें कतरन कहा जाता था।

शुरुआती दौर में इन कतरनों को या तो बेकार समझकर फेंक दिया जाता था या बहुत ही कम कीमत पर बेच दिया जाता था। धीरे-धीरे कुछ स्थानीय व्यापारियों ने इन बचे हुए और रंग-बिरंगे टुकड़ों को इकट्ठा कर कम आय वाले लोगों और छोटे कारीगरों को बेचना शुरू कर दिया।

katran bazar in delhi

समय के साथ, जब इस खास जगह पर केवल इसी तरह के कपड़ों और छोटे कतरनों का व्यापार बड़े पैमाने पर होने लगा, तो लोगों ने इस जगह का नाम ही 'कतरन मार्केट' रख दिया।

छोटे टुकड़ों से ब्रांडेड फैब्रिक तक का सफर

समय के साथ कतरन मार्केट का स्वरूप भी पूरी तरह बदल चुका है। आज भले ही इसका नाम कतरन मार्केट है, लेकिन अब यहां सिर्फ छोटे टुकड़े ही नहीं बल्कि देश-विदेश के बेहतरीन और ब्रांडेड फैब्रिक भी थोक और खुदरा दामों पर मिलते हैं। यहां सिल्क, कॉटन, जॉर्जेट, शिफॉन, वेलवेट और ब्रोकेड जैसे तमाम कपड़े आसानी से मिल जाते हैं।

यहां बुटीक चलाने वाले लोग और फैशन डिजाइनिंग के छात्र अक्सर अपनी अनोखी और कम बजट की जरूरतों को पूरा करने के लिए इसी बाजार का रुख करते हैं। यह बाजार आज हजारों लोगों के लिए आजीविका का एक बड़ा साधन बन चुका है।

दिल्ली की अर्थव्यवस्था में कतरन मार्केट का योगदा 

आज कतरन मार्केट सिर्फ कपड़ों की खरीदारी की जगह नहीं है बल्कि यह दिल्ली की उस जीती-जागती संस्कृति का प्रतीक है जो कम संसाधनों में भी अपनी एक अलग पहचान बनाना जानती है।

katran market

सिलाई के छोटे टुकड़ों से शुरू हुआ यह सफर आज एक बाजार का रूप ले चुका है, जो दिल्ली की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देता है। यहां आने वाले हर ग्राहक को सस्ते दामों पर वैरायटी मिल जाती है, जो इस बाजार की सबसे बड़ी खूबी है।

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यकीनन आप दिल्ली के कतरन मार्केट के इतिहास के बारे में जान गई होगी। मार्केट से जुड़ी ऐसी स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहे हरजिंदगी के साथ। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें।

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FAQ
कतरन मार्केट कहां स्थित है?
कतरन मार्केट दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके में स्थित एक प्रसिद्ध कपड़ा बाजार है।
कतरन मार्केट की शुरुआत कब और कैसे हुई थी?
कतरन मार्केट की शुरुआत 1970 के दशक में गुजरात से आए शरणार्थियों द्वारा पटरी पर कतरन बेचने से हुई थी।
कतरन मार्केट में किस प्रकार का सामान मिलता है?
 कतरन मार्केट में थान के कपड़े, बुटीक फैब्रिक, राजस्थानी प्रिंट, बॉर्डर, गोटा-पत्ती और होम फर्निशिंग का सामान मिलता है।
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