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Kaju Katli History: ग्वालियर फोर्ट की कोठरी से निकलकर थाली की शान बनी काजू कतली, जानें कैसे हुई इसकी शुरूआत?

त्योहार हो या कोई खुशी का पल, काजू कतली लोगों की पहली पसंद बन गया है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि काजू कतली को पहली बार कब और कहां बनाया गया है? अगर नहीं, तो चलिए नीचे लेख में जानिए
Updated:- 2026-05-02, 17:05 IST
Kaju Katli history

Kaju Katli History: आज हर भारतीय त्योहार और जश्न की पहली पसंद काजू कतली है। आज यह मिठाई भले ही स्टेटस सिंबल बन गई हो, लेकिन क्या आपको पता है कि इसकी शुरूआत महल या मशहूर हलवाई की दुकान से नहीं हुई थी। इसके आविष्कार को लेकर वैसे तो कई कहानियां हैं, जिसमें से एक मशहूर है। माना जाता है कि इस शाही मिठाई की शुरुआत मुगल काल के दौरान हुई थी और इसका सीधा संबंध मध्य प्रदेश के ग्वालियर किले से है। यह सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि कैद से आजादी और एक सूफी संत की सूझबूझ की कहानी है। नीचे लेख में जानिए इस मिठाई की कैसे हुई शुरूआत?

जहांगीर और सिखों के गुरु की कहानी से जुड़ी काजू कतली

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काजू कतली की कहानी मुगल बादशाह जहांगीर के समय से शुरू होती है। उस समय ग्वालियर का किला एक जेल के रूप में इस्तेमाल किया जाता था, जहां कई राजाओं और सिखों के छठे गुरु, गुरु हरगोबिंद साहिब जी को बंदी बनाकर रखा गया था। कहा जाता है कि जब गुरु जी की रिहाई का वक्त आया, तो उन्होंने शर्त रखी कि उनके साथ किले में बंद अन्य 52 हिंदू राजाओं को भी आजाद किया जाए। जहांगीर ने शर्त मान ली, लेकिन एक पेच फंसाया कि केवल वही राजा बाहर जा पाएंगे जो गुरु जी के पोशाक को पकड़ सकेंगे।

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शाही बावर्ची और सूफी संत को आया था विचार

उस दौरान जेल में बंद कैदियों के लिए खाना बनाने वाले शाही बावर्ची और सूफी संतों ने कुछ ऐसा बनाने का सोचा जो ताकत भी दे और लंबे समय तक खराब न हो। चूंकि काजू उस समय एक महंगा और शाही मेवा माना जाता था, इसलिए काजू को पीसकर उसमें चीनी की चाशनी मिलाकर एक नई मिठाई तैयार की गई। इसे 'काजू कतली' या उस समय के हिसाब से 'काजू का हलवा' जैसा रूप दिया गया।

कोठरी से बाहर कैसे आई यह मिठाई?

kaju katli

जब गुरु हरगोबिंद साहिब जी 52 राजाओं के साथ ग्वालियर किले की कोठरी से बाहर आए, तो इस जीत और आजादी की खुशी में वही काजू से बनी मिठाई बांटी गई। चांदी के वर्क का इस्तेमाल इसे और भी शाही दिखाने और ठंडा रखने के लिए किया गया। धीरे-धीरे यह मिठाई ग्वालियर के किले की दीवारों से बाहर निकली और मुगल दरबार का हिस्सा बन गई। मराठा शासकों के समय ग्वालियर में इस मिठाई को और भी ज्यादा प्रसिद्धि मिली और यह खास मौकों पर बनाई जाने वाली सबसे मुख्य मिठाई बन गई।

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Image Credit- Freepik

 


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