अगर आपको ट्रैकिंग का शौक है तो खुद को एक्सप्लोर करने के लिए मानसून से बेहतर दूसरा कोई मौसम नहीं हो सकता। इस मौसम में प्रकृति की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। वैसे तो आपको कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक कई ट्रैकिंग प्वाइंट मिल जाएंगे, जहां पर आपको  घने जंगल, खूबसूरत झरने, मैदानी इलाकों की शानदार हरियाली, ग्लेशियर, संकरी घाटियां और ऊंचे पहाड़ देखने को मिलेंगे। लेकिन इस बार अगर आप कुछ अलग करने का मन बना रही हैं तो मुम्बई के पास इन फोर्टस में घूमकर आएं। महाराष्ट्र राज्य में स्थित इन किलों का अपना एक ऐतिहासिक महत्व है। यहां पर मौजूद हर किला अपने शिल्प और सांस्कृतिक विरासत की कहानी कहता है। ऐसे में इन किलों में आप ट्रैकिंग के साथ-साथ इतिहास को भी करीब से देख सकती हैं। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में-

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त्रिंगलवाड़ी फोर्ट, इगतपुरी

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त्रिंगलवाड़ी किला नासिक जिले के इगतपुरी तालुका में स्थित है। त्रिंगलवाड़ी नए हाइकर्स के लिए परफेक्ट वन डे ट्रैक है।  तालवाड़ी गांव किले के पास स्थित है और यहां के त्रिंगलवाड़ी डैम में आप कैंपिंग का मजा भी ले सकती है। त्रिंगलवाड़ी फोर्ट की तलहटी में सुंदर नक्काशीदार प्रवेश द्वार के साथ एक गुफा है, जिसे पांडवलेनी कहा जाता है। किले का पश्चिमी द्वार वास्तुकला की एक अनूठी संरचना है। किले पर पुरानी इमारतों और एक छोटे से भवानी माता मंदिर के खंडहर हैं। किले के ऊपर पहाड़ी की पश्चिमी तरफ गुफाएँ और एक चट्टान से काटे गए पानी के झरने हैं।

सोंदाई, कर्जत

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सोंदाई फोर्ट  कर्जत रेलवे स्टेशन से लगभग 6 किमी दूर है। सोंदाई किले से अधिक एक वाचटावर है। यह माथेरान माउंटेन रेंज का हिस्सा है। इस फोर्ट का नाम  पर्वत के शीर्ष पर देवी सोंडई के मंदिर से लिया गया है। यहां पहुंचकर आपको मोरबे डैम, प्रबलबगड़, इरशाल, राजमाची, करनाला और मानिकगढ़ जैसे सुंदर दृश्य देखने को मिलते हैं।

कलावंती फोर्ट

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कलावंती फोर्ट पनवेल के पास स्थित मुंबई पुणे एक्सप्रेसवे पर प्रबलगढ़ किले के निकट स्थित है और ट्रेकर्स के लिए एक बेहतरीन जगह है। कलावंतिन शिखर ट्रेक को दो पैच में विभाजित किया गया है। पहला, प्राबलम्ची तक एक चढाई वाला चौड़ा रास्ता है जहाँ मार्ग कालावंतिनदुर्ग और प्रबलबाग के लिए द्विभाजित होता है। वहीं, कलावंतिन हाइक के लिए दूसरा पैच काफी कठिन है, क्योंकि रॉक कट कदम बहुत खड़ी हैं, लेकिन कलावंतिन शिखर पर चढ़ने का एकमात्र तरीका है। यह ट्रेक यकीनन काफी कठिन है क्योंकि दुर्ग पर चढ़ते या उतरते समय कोई रेलिंग या सपोर्ट नहीं है।

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माणिकगढ़, माथेरान

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माणिकगढ़ किला सत्रहवीं शताब्दी के शुरुआती दिनों में मराठा नौसैनिक कमांडर कान्होजी आंग्रे द्वारा बनाया गया था। यह भी एक बेहतरीन वन डे ट्रेक है। बेस गांव वडगांव से टाॅप तक पहुंचने में करीबन 2.5 घंटे लगते हैं। शीर्ष तक पहुंचने के लिए 2 मार्ग हैं। एक गली के माध्यम से है जो खडा और एडवेंचर्स है। वहीं दूसरा रास्ता पीछे से है, जो अपेक्षाकृत आसान व लंबा है। फोर्ट के शीर्ष पर पहुंचकर आपको जल कुंड, कुछ पुरानी व जीर्ण संरचनाएं, प्रवेश द्वार के अवशेष और एक छोटा मंदिर नजर आएगा।