इस साल बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का पहला जत्था रवाना हो चुका है। माना जाता है कि भोलेनाथ के दर्शन करने से बड़ी से बड़ी बाधा दूर हो जाती है। इसीलिए हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए जाते हैं। लेकिन क्या आप जानती हैं कि अमरनाथ की यात्रा से भी मुश्किल है श्रीखंड महादेव की चढ़ाई, क्योंकि यहां भगवान शिव करते हैं वास। लेकिन यहां ना घोड़ा जाता है और ना पालकी, पैदल ही करनी पड़ती है चढ़ाई। हिमालय की गोद में विराजमान श्रीखंड महादेव के दर्शन करना आसान नहीं है यहां पहुंचने के लिये पैदल ही चलना पड़ता है। दुनिया की सबसे दुर्गम धार्मिक यात्राओं में शामिल होने के बावजूद श्रीखंड महादेव यात्रा के लिए देश के कोने-कोने से भक्त यहां पहुंचते हैं। कुल्लू जिला के आनी में यह इलाका है। निरमंड से श्रीखंड यात्रा के लिए 25 किलोमीटर की सीधी चढ़ाई श्रद्धालुओं के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होती है। कई बार तो इस यात्रा के दौरान कई श्रद्धालुओं की मौत भी हो जाती है। अमरनाथ की यात्रा से भी मुश्किल मानी जाती है श्रीखंड महादेव की चढ़ाई। 

shrikhand mahadev lord shiva

घोड़ा, खच्चर और पालकी कुछ नहीं मिलता यहां 

अमरनाथ यात्रा के दौरान लोग खच्चरों का सहारा लेते हैं लेकिन श्रीखंड महादेव की 35 किलोमीटर की इतनी कठिन चढ़ाई है जिसपर कोई खच्चर, घोड़ा या पालकी नहीं जा सकती है। श्रीखण्ड का रास्ता रामपुर बुशैहर से जाता है। यहां से निरमण्ड उसके बाद बागीपुल और आखिर में जांव के बाद पैदल यात्रा शुरू होती है। 

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यहां है भगवान शिव का वास 

कैलाश मानसरोवर की यात्रा सबसे कठिन धार्मिक यात्रा मानी जाती है। उसके बाद अमरनाथ यात्रा को मुश्किल माना जाता है लेकिन हिमाचल प्रदेश के श्रीखंड महादेव की यात्रा अमरनाथ यात्रा से भी ज्यादा कठिन है।

अमरनाथ यात्रा में जहां लोगों को करीब 14000 फीट की चढ़ाई करनी पड़ती है तो श्रीखंड महादेव के दर्शन के लिए 18570 फीट की ऊचाई पर चढ़ना होता है और यहां पहुंचने का रास्ता भी बेहद खतरनाक है। ऐसा माना जाता है कि श्रीखंड महादेव की चढ़ाई करते टाइम रूह कांप जाती है। 

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यहां तक कि 18 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित श्रीखंड यात्रा के दौरान सांस लेने के लिए ऑक्सीजन की भी कमी पड़ जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस चोटी पर भगवान शिव का वास है। इसके शिवलिंग की ऊंचाई 72 फीट है। 

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