हिंदू धर्म में सभी देवी-देवताओं को कोई न कोई मंत्र समर्पित होता है। उन मंत्रों के पाठ से आपके जीवन में खुशहाली बनी रहती है। ऐसे ही हनुमान जी के मंत्रों में से एक है बजरंग बाण का पाठ।
ऐसा कहा जाता है कि बजरंग बाण, भगवान हनुमान को समर्पित एक अत्यंत प्रभावशाली मंत्र है। यह विशेष रूप से संकटों, शत्रुओं और नकारात्मकता को समाप्त करने के लिए पढ़ा जाता है। इस मंत्र में भगवान हनुमान की उग्र और शक्तिशाली ऊर्जा का आह्वान किया गया है, जो किसी भी प्रकार की विपत्ति से मुक्ति दिलाने में सहायक माना जाता है।
ऐसा माना जाता है कि यदि कोई व्यक्ति विपत्ति में हो और इस मंत्र का जाप करे तो उसे सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और जीवन में शुभता बनी रहती है, लेकिन मान्यता है कि बजरंग बाण का पाठ नियमित रूप से नहीं करना चाहिए और इसके पाठ के अपने अलग नियम बनाए गए हैं जिनका पालन जरूरी होता है। आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें इस मंत्र के पाठ के सही नियम, विधि और इस बारे में विस्तार से कि इसका पाठ नियमित रूप से क्यों नहीं करना चाहिए।
बजरंग बाण का पाठ रोजाना क्यों नहीं करना चाहिए?
बजरंग बाण में एक उग्र और शक्तिशाली ऊर्जा होती है, जिसे यदि बार-बार और बिना उद्देश्य के पढ़ा जाता है तो यह मानसिक और शारीरिक शांति को बाधित कर सकता है। यदि इसे रोजाना पढ़ा जाए तो यह अत्यधिक उत्तेजना और मानसिक अशांति का कारण भी बन सकता है, क्योंकि यह उग्र ऊर्जा से भरपूर होता है, जो बिना संकट के आवश्यकता नहीं होती।
इसके अलावा बजरंग बाण में भगवान हनुमान के उग्र रूप का आह्वान किया जाता है, जो किसी प्रकार की विपत्ति से निपटने के लिए होता है। अगर इसे बिना किसी विशेष आवश्यकता के रोजाना पढ़ा जाए, तो यह आक्रामक ऊर्जा का आह्वान कर सकता है, जो मानसिक स्थिति को असंतुलित कर सकता है और व्यक्ति को अधिक आक्रामक और उत्तेजित बना सकता है। इसका नियमित पाठ करने से व्यक्ति की ऊर्जा जागृत हो सकती है और इसके फायदे की जगह नुकसान हो सकते हैं।
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कब कर सकते हैं बजरंग बाण का पाठ?
बजरंग बाण का पाठ किसी विशेष संकट, शत्रुओं से मुक्ति और तत्काल सुरक्षा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। यह नियमित और मंत्र नियमित पाठ के लिए नहीं होता है, क्योंकि इसका उद्देश्य संकट के समय भगवान हनुमान से विशेष आशीर्वाद प्राप्त करना है। जब इसे बिना किसी विशेष कारण के पढ़ा जाता है, तो इसकी प्रभावशीलता कम होने लगती है और इससे राम भक्त हनुमान रुष्ट हो सकते हैं।
बजरंग बाण का पाठ करने के लिए व्यक्ति का मानसिक और शारीरिक रूप से शुद्ध होना जरूरी है। यह न केवल शक्तिशाली है, बल्कि इसका सही उद्देश्य और भावनात्मक स्थिति भी महत्वपूर्ण है।
किस समय करना चाहिए बजरंग बाण का पाठ?
बजरंग बाण का पाठ करने का सही समय और विधि का पालन करना भक्तों के लिए अत्यंत आवश्यक है। अगर आप इसे गलत समय पर बिना नियमों का पालन किए हुए पढ़ते हैं तो यह अपनी पूरी शक्ति को नहीं प्राप्त करता और न ही इसका पूरा असर होता है। इस पाठ का सही उपयोग संकट के समय ही किया जाना चाहिए, ताकि इसकी शक्ति पूरी तरह से काम करे। यदि इस पाठ को मंगलवार के दिन पढ़ा जाता है तो ये ज्यादा शुभ माना जाता है।
बजरंग बाण का पाठ तब करना चाहिए जब आप जीवन में किसी बहुत बड़े संकट का सामना कर रहे हों, किसी शत्रु पर विजय पाना चाहते हों या जब आपके जीवन में किसी प्रकार की नकारात्मकता, शारीरिक समस्या या मानसिक दबाव हो।
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बजरंग बाण का पाठ करने के लाभ
यह मंत्र आपके और आपके परिवार की सुरक्षा के लिए सबसे ज्यादा उपयुक्त है। जब आपको या आपके परिवार को किसी प्रकार की शारीरिक या मानसिक हानि का डर हो, तो बजरंग बाण का पाठ सुरक्षा के लिए किया जा सकता है। यदि आप किसी और की मदद करना चाहते हैं जो किसी संकट में फंसा हो, तो आप बजरंग बाण का पाठ उनके लिए भी कर सकते हैं। यह उन्हें संकट से बाहर निकालने में सहायक हो सकता है।
बजरंग बाण का पाठ करने की सही विधि
बजरंग बाण का पाठ करते समय कुछ खास नियमों का पालन करना चाहिए ताकि इसका पूरा लाभ मिल सके-
बजरंग बाण का पाठ करने के लिए सही समय का चुनाव करना चाहिए। आप मंगलवार और शनिवार को इसे पढ़ सकते हैं क्योंकि ये दिन भगवान हनुमान को समर्पित होता है। इन दिनों में इसका पाठ विशेष रूप से शुभ माना जाता है। यह पाठ सुबह जल्दी या फिर शाम के समय शांतिपूर्ण वातावरण में करना शुभ होता है। पाठ करने से पहले स्नान करें और साफ़ कपड़े पहनें।
इसका जाप करने के लिए मानसिक रूप से शांत और एकाग्र होना जरूरी होता है। ध्यान लगाकर भगवान हनुमान के रूप का ध्यान करें।
भगवान हनुमान की तस्वीर या मूर्ति को स्वच्छ स्थान पर रखें और इस पाठ का आरंभ करें। बजरंग बाण का पाठ ध्यानपूर्वक और शुद्धता के साथ करना चाहिए।
यदि आप किसी बहुत बड़ी विपत्ति में हैं तो बजरंग बाण का पाठ कर सकते हैं, लेकिन इसके नियमों का पालन करना और इसे नियमित रूप से न पढ़ने की सलाह दी जाती है।
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