
हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में पूर्णिमा की तिथि का विशेष महत्व है। पूर्णिमा वह समय होता है जब चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ आकाश में चमकता है। ज्योतिष में चंद्रमा को मन, माता और सुख-शांति का कारक माना गया है। चूंकि चंद्रमा का रंग सफेद है, इसलिए पूर्णिमा के दिन सफेद वस्तुओं के दान की महिमा बताई गई है। चावल को अक्षत कहा जाता है जिसका अर्थ है जो कभी क्षय न हो। पूर्णिमा पर चावल का दान करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि घर में बरकत भी आती है और चंद्र दोषों से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा, पूर्णिमा तिथि पर चावल का दान करने से अन्य लाभ भी प्राप्त होते हैं जिनके बारे में हमें बताया वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स ने।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चावल का संबंध सीधे तौर पर चंद्र ग्रह से है। चावल की तासीर ठंडी होती है और इसका रंग सफेद होता है जो चंद्रमा की शीतलता और शुद्धता का प्रतीक है।
पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी सबसे शक्तिशाली अवस्था में होता है जिससे वह हमारी भावनाओं और मन को प्रभावित करता है। इस दिन चावल का दान करने से कुंडली में चंद्रमा मजबूत होता है जिससे व्यक्ति का मन शांत रहता है और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।

चावल को 'धान्य' माना गया है और इसे देवी लक्ष्मी से जोड़कर देखा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, पूर्णिमा पर चावल का दान करने से घर में अन्न और धन की कभी कमी नहीं होती।
अगर किसी के पास पैसा टिकता नहीं है या आर्थिक तंगी बनी रहती है तो उन्हें पूर्णिमा के दिन कच्चे चावल का दान किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को करना चाहिए। इसे अक्षय दान माना जाता है जिसका फल अनंत काल तक मिलता रहता है।
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आज के दौर में बहुत से लोग तनाव और चिंता से परेशान रहते हैं। ज्योतिष के अनुसार, यह कमजोर चंद्रमा का लक्षण है। पूर्णिमा के दिन जब समुद्र में ज्वार-भाटा आता है ठीक उसी तरह हमारे शरीर के भीतर का जल तत्व और मन भी अशांत हो सकता है।
इस दिन चावल का दान करने से मानसिक उथल-पुथल शांत होती है। यह उपाय उन लोगों के लिए रामबाण है जिन्हें बहुत ज्यादा गुस्सा आता है या जिनका मन हमेशा विचलित रहता है।

पूर्णिमा पर दान करना केवल ग्रहों के लिए ही नहीं बल्कि पितरों की तृप्ति के लिए भी उत्तम माना गया है। चावल और दूध से बनी खीर का दान करना या चावल का सीधा दान करना पितृ दोष को कम करने में मदद करता है।
जब हमारे पितर प्रसन्न होते हैं तो परिवार में वंश वृद्धि होती है और घर के सदस्यों की उन्नति के रास्ते खुलते हैं। साथ ही, यह शुक्र ग्रह को भी शुभ फल देने के लिए प्रेरित करता है जिससे जीवन में भौतिक सुख-सुविधाएं बढ़ती हैं।
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