why bathing in ganga is most important in magh mela rather than any other river

Magh Mela Ganga Snan 2026: कोई भी और नदी नहीं, क्यों माघ मेले में सिर्फ गंगा स्नान का है सबसे ज्यादा महत्व?

वैसे तो भारत में कई पवित्र नदियां हैं, लेकिन माघ मेले के दौरान गंगा स्नान का महत्व सबसे अधिक इसलिए है क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय गंगा का जल अमृत के समान हो जाता है।
Editorial
Updated:- 2026-01-02, 14:43 IST

भारत में नदियों को केवल जल का स्रोत नहीं बल्कि जीवनदायिनी और मोक्षदायिनी माना जाता है जिनमें गंगा का स्थान सर्वोपरि है। हिंदू धर्म में माघ का महीना अत्यंत पवित्र माना गया है और प्रयागराज में आयोजित होने वाला माघ मेला श्रद्धा का महाकुंभ होता है। वैसे तो भारत में कई पवित्र नदियां हैं, लेकिन माघ मेले के दौरान गंगा स्नान का महत्व सबसे अधिक इसलिए है क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय गंगा का जल अमृत के समान हो जाता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है तब गंगा के पावन तट पर देवताओं का वास होता है। माघ स्नान के माध्यम से मनुष्य अपने जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति और मोक्ष की कामना करता है। ऐसे में वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से आइये जानते हैं कि आखिर क्यों माघ मेले के दौरान सिर्फ गंगा स्नान से ही पुण्य की प्राप्ति होती है? 

अमृत की बूंदों का धार्मिक महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश निकला था तब देव-असुर संग्राम में अमृत की कुछ बूंदें प्रयागराज में गिरी थीं जहां गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम है।

माघ मेले के दौरान, विशेषकर मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी पर गंगा का जल आध्यात्मिक रूप से ऊर्जावान हो जाता है। माना जाता है कि अन्य समय की तुलना में माघ मास में गंगा स्नान करने से प्राप्त होने वाला पुण्य हजार गुना अधिक होता है। शास्त्रों में कहा गया है कि माघ के महीने में सभी तीर्थ और देवता स्वयं गंगा स्नान के लिए प्रयाग पधारते हैं।

Magh Mela Ganga Snan 2026

मोक्षदायिनी गंगा और पापों का शमन

गंगा को भगवान विष्णु के चरणों से निकलने वाली और शिव की जटाओं में निवास करने वाली नदी माना जाता है। अन्य नदियों की तुलना में गंगा को पतित पावनी कहा गया है जिसका अर्थ है पतितों का उद्धार करने वाली।

माघ के ठिठुरते महीने में जब भक्त गंगा की लहरों में डुबकी लगाता है तो यह उसके तप का प्रतीक होता है। यह शारीरिक कष्ट सहकर अपनी आत्मा को शुद्ध करने की प्रक्रिया है। मान्यता है कि माघ स्नान से न केवल वर्तमान जीवन के कष्ट दूर होते हैं बल्कि स्वर्ग के मार्ग भी खुल जाते हैं।

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ज्योतिषीय और खगोलीय कारण

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, माघ के महीने में सूर्य और चंद्रमा की विशेष स्थिति होती है। जब सूर्य मकर राशि में होता है और चंद्रमा पूर्णता की ओर बढ़ता है तब जल तत्व में एक विशेष प्रकार की चुंबकीय शक्ति का संचार होता है।

गंगा का जल जो हिमालय की जड़ी-बूटियों से युक्त होकर आता है, इस समय विशेष औषधीय गुणों से भर जाता है। गंगा स्नान से न केवल आध्यात्मिक लाभ मिलता है बल्कि यह त्वचा संबंधी रोगों को दूर करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक माना जाता है।

magh mela 2026 ganga snan

कल्पवास और त्याग की परंपरा

माघ मेले में गंगा के किनारे 'कल्पवास' की परंपरा है, जहां लोग एक महीने तक सात्विक जीवन जीते हैं। अन्य नदियों की तुलना में गंगा का रेतीला तट और वहां का वातावरण ध्यान और साधना के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है।

'पद्म पुराण' में उल्लेख है कि संगम पर माघ स्नान करने से मिलने वाला फल दान, तप और कठिन यज्ञों से मिलने वाले फल से भी बड़ा है। यही कारण है कि करोड़ों श्रद्धालु कष्ट सहकर भी केवल गंगा स्नान के लिए खिंचे चले आते हैं।

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