paush purnima 2026 puja vidhi and samagri

Paush Purnima Puja Vidhi & Samagri 2026: कैसे करें पौष पूर्णिमा की पूजा? जानें संपूर्ण विधि और सामग्री लिस्ट

Paush Purnima Puja Vidhi 2026: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पौष पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं। इसी दिन से माघ स्नान की शुरुआत भी होती है।
Editorial
Updated:- 2026-01-02, 14:37 IST

हिंदू धर्म में पौष मास की पूर्णिमा का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। यह तिथि दान, स्नान और सूर्य देव की उपासना के लिए समर्पित मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पौष पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं। इसी दिन से माघ स्नान की शुरुआत भी होती है। इस पावन अवसर पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त पूजा का विधान है जिससे घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। सादगी और श्रद्धा के साथ इस दिन की गई पूजा जातक के जीवन के अंधकार को मिटाकर उसे प्रकाश की ओर ले जाती है। ऐसे में वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से आइये जानते हैं पौष पूर्णिमा की संपूर्ण पूजा विधि और सामग्री के बारे में विस्तार से।

पौष पूर्णिमा पूजा सामग्री (Paush Purnima Puja Samagri 2026)

पौष पूर्णिमा की पूजा शुरू करने से पहले इन सामग्रियों को एक स्थान पर एकत्रित कर लें:

paush purnima 2026 puja samagri

  • देव प्रतिमा: भगवान विष्णु (सत्यनारायण रूप) और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र।
  • पूजा के बर्तन: तांबे या पीतल का लोटा, पंचपात्र, दीपक, और आरती की थाली।
  • अभिषेक सामग्री: गंगाजल, कच्चा दूध, दही, शहद, और शुद्ध घी।
  • पुष्प और नैवेद्य: पीले फूल, तुलसी के दल, केले, पंचामृत, और चूरमा या हलवे का भोग।
  • अन्य सामग्री: अक्षत, रोली, कलावा, कुमकुम, धूपबत्ती, कपूर, और चंदन।

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पौष पूर्णिमा पूजा विधि (Paush Purnima Puja Vidhi 2026)

पौष पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है। यदि यह संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान के बाद स्वच्छ पीले या सफेद वस्त्र धारण करें और हाथ में जल लेकर व्रत या पूजा का संकल्प लें।

पूजा स्थान की सफाई करें और एक छोटी चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी को स्थापित करें। सबसे पहले उन्हें जल और फिर पंचामृत से अभिषेक कराएं। इसके बाद भगवान को अक्षत, तिलक और पीले फूल अर्पित करें। ध्यान रखें कि भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी के पत्ते जरूर शामिल करें क्योंकि इसके बिना उनकी पूजा अधूरी मानी जाती है।

paush purnima 2026 puja vidhi

पौष पूर्णिमा पर भगवान सत्यनारायण की कथा पढ़ना या सुनना अत्यंत लाभकारी होता है। इसके साथ ही 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें। माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए आप श्री सूक्त या लक्ष्मी चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं। यह पाठ घर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर धन के मार्ग खोलता है।

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पूजा के अंत में घी के दीपक से भगवान की आरती करें और भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें। रात के समय जब चंद्रमा उदय हो, तो चंद्रमा को जल, दूध और चीनी मिलाकर अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय चंद्रमा से अपने परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।

पूजा संपन्न होने के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को तिल, गुड़, कंबल या अन्न का दान करें। पौष पूर्णिमा पर किया गया दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है और जन्म-जन्मांतर के कष्टों से मुक्ति दिलाता है।

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