Toilet Ka Jyotish: पहले के समय में क्यों घर के बाहर हुआ करते थे टॉयलेट? आजकल के लोग नहीं जानते होंगे ये वजह

पहले के समय में और अब के समय में हर तरह से जमीन-आसमान का अंतर आ गया है। उदाहरण के रूप में पहले के समय में, घरों में देहरी यानी कि चौखट हुआ करती थी, लेकिन आज के समय में घरों में चौखट बननी ही बंद हो गई है। पहले के समय में चूल्हे पर नीचे बैठकर खाना बनाया जाता था, लेकिन अज के समय में मॉडर्न किचन आ गई है। ठीक ऐसे ही, अगर आपने कभी गौर किया हो तो पहले के समय में टॉयलेट घर से बाहर हुआ करता था, लेकिन आजकल तो घर के अंदर ही होता है और वो भी अटेच्ड टॉयलेट-बाथरूम।
वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स ने हमें बताया कि पहले के समय में घर से बाहर टॉयलेट का होना कोई आम बात नहीं थी बल्कि इसके पीछे गहरा ज्योतिष छुपा हुआ है जिसके बारे में आजकल के लोगों को नहीं पता होगा। ऐसे में आइये जानते हैं कि आखिर पहले के समय में घरों से बाहर ही क्यों हुआ करते थे शौचालय।
पहले के समय में घर से बाहर टॉयलेट होने का क्या है कारण?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, घर के भीतर शौचालय बनाना अशुभ माना जाता था क्योंकि शौचालय में राहु और केतु जैसे अशुभ ग्रहों का प्रभाव होता है। ये ग्रह नकारात्मक ऊर्जा से जुड़े होते हैं और इनका घर के अंदर होना परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए अच्छा नहीं माना जाता था।

ऐसी मान्यता थी कि घर के अंदर शौचालय होने से परिवार में झगड़े बढ़ते हैं, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां आती हैं और आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है। इसलिए नकारात्मकता को घर से दूर रखने के लिए शौचालय हमेशा घर के बाहर बनाए जाते थे।
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वास्तु शास्त्र भी इस बात का समर्थन करता है। वास्तु के अनुसार, घर के हर हिस्से का एक निश्चित ऊर्जा क्षेत्र होता है। शौचालय को नकारात्मक ऊर्जा का स्रोत माना जाता है और इसे घर के अंदर बनाने से यह ऊर्जा पूरे घर में फैल सकती थी।

घर के बाहर शौचालय बनाने से यह नकारात्मक ऊर्जा घर से दूर रहती थी, जिससे घर का वातावरण शुद्ध और सकारात्मक बना रहता था। इसके अलावा, घर के बाहर शौचालय होने से स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं कम होती थीं और घर के अंदर साफ-सफाई बनी रहती थी।
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image credit: herzindagi
- घर की किस दिशा में होना चाहिए टॉयलेट?
- घर की दक्षिण-पश्चिम में टॉयलेट का होना सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है।
- टॉयलेट में रोजाना दीया जलाने से क्या होता है?
- टॉयलेट में रोजाना दीया जलाने से, उस स्थान से आने वाली नकारात्मकता कम होने लगती है।
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