Varuthini Ekadashi Date 2026: 13 या 14 अप्रैल, कब है वैशाख महीने की वरुथिनी एकादशी? यहां जानें सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व

हिंदू धर्म में किसी भी एकादशी तिथि का विशेष महत्व होता है और इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। हर महीने दो एकादशी तिथियां होती हैं और पूरे साल में 24 एकादशी मनाई जाती हैं। हर महीने की एकादशी का विशेष महत्व होता है और इस दिन की पूजा विधि भी अलग होती है। इसी तरह अप्रैल महीने में पड़ने वाली वरुथिनी एकादशी भी बहुत खास है। यह तिथि हिंदू पंचांग के वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष में पड़ती है और इसका बहुत महत्व होता है। वैशाख महीने की एकादशी को शास्त्रों में भी अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। इस साल भी वरुथिनी एकादशी की सही तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें 13 या 14 अप्रैल, कब पड़ेगी वरुथिनी एकादशी, इसका महत्व क्या है और किस शुभ मुहूर्त में पूजा करना फलदायी हो सकता है?
वरुथिनी एकादशी कब है? (Varuthini Ekadashi Kab Hai 2026?)

- हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल वरुथिनी एकादशी का व्रत 13 अप्रैल को रखा जाएगा।
- वरुथिनी एकादशी तिथि आरंभ- 12 अप्रैल, रात्रि 1:17 बजे से
- वरुथिनी एकादशी तिथि समापन- 13 अप्रैल, रात्रि 1:09 बजे
- चूंकि हिंदू धर्म में कोई भी व्रत उदया तिथि के अनुसार रखना ही मान्य होता है, इसलिए वरुथिनी एकादशी भी 13 अप्रैल, सोमवार को मनाई जाएगी।
वरुथिनी एकादशी पूजा मुहूर्त (Varuthini Ekadashi Puja Muhurat 2026)
- वरुथिनी एकादशी पूजा का शुभ समय ब्रह्म मुहूर्त : 13 अप्रैल, प्रातः 4:28 से 5:13 बजे तक।
- अभिजीत मुहूर्त: 13 अप्रैल, प्रातः 11:56 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक।
- एकादशी व्रत पारण का समय -14 अप्रैल, प्रातः 6:54 से 8:31 बजे तक।
वरुथिनी एकादशी का महत्व

हिंदू धर्म शास्त्रों की मानें तो वरुथिनी एकादशी का व्रत करने वाले व्यक्ति के जीवन में सौभाग्य बना रहता है और सुख समृद्धि आती है। इस दिन व्रत करने वाले भक्तों के जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है। इस दिन का व्रत कई एकादशियों का एक साथ फल देता है।वरुथिनी एकादशी के दिन व्रत करने वाले व्यक्ति को भगवान विष्णु किसी भी समस्या से जल्द ही बाहर निकालते हैं। इस एकादशी पर व्रत करने से परिवार और रिश्तों में सामंजस्य बना रहता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा दृष्टि मिलती है।
वरुथिनी एकादशी पूजा विधि

- वरुथिनी एकादशी के दिन आपको प्रातः जल्दी उठकर ब्रह्म मुहूर्त में ही स्नान आदि से मुक्त होकर साफ वस्त्र धारण करें।
- इस दिन यदि आप पीले वस्त्र पहनती हैं तो अत्यंत शुभ माना जाता है।
- पूजा के स्थान को अच्छी तरह से साफ करें और एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर उस पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें।
- पूजा आरंभ करें और विष्णु जी के साथ माता लक्ष्मी का भी पूजन करें। विष्णु जी को पीला चंदन लगाएं और माता लक्ष्मी की मूर्ति में लाल सिंदूर लगाएं।
- सच्चे ह्रदय से पूजन करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
- पूजा के समापन के बाद विष्णु जी की आरती करें और पीले फल और मिठाई का भोग लगाएं।
- भोग सभी परिवारजनों में वितरित करें और स्वयं भी ग्रहण करें।
इस प्रकार वरुथिनी एकादशी के दिन जो व्यक्ति सच्चे ह्रदय से विष्णु जी का पूजन करता है उसकी सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और जीवन में समृद्धि बनी रहती है। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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