Vivah Muhurat January 2026: मकर संक्रांति के बाद जनवरी में कब-कब हैं शादी के शुभ मुहूर्त? जानें तिथियां

मकर संक्रांति का त्योहार हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसी दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण होते हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से इसे अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मकर संक्रांति के साथ ही खरमास समाप्त हो जाता है और सभी मांगलिक कार्यों पर लगा प्रतिबंध हट जाता है। यही कारण है कि इस दिन के बाद से ही देश भर में शहनाइयों की गूंज और विवाहों का सिलसिला फिर से शुरू हो जाता है। अगर आप भी जनवरी 2026 में शादी के लिए शुभ मुहूर्त ढूंढ रहे हैं तो मकर संक्रांति के बाद विवाह के 3 शुभ संयोग बन रहे हैं। आइये जानते हैं वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से।
जनवरी 2026 में शादी के शुभ मुहूर्त
24 जनवरी 2026 (शनिवार): मकर संक्रांति के बाद यह विवाह का एक बहुत ही उत्तम मुहूर्त है। इस दिन पंचमी तिथि और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का संयोग बन रहा है। शनिवार का दिन होने के बावजूद, ज्योतिषीय गणना के अनुसार ग्रहों की स्थिति विवाह के लिए अनुकूल है। जो लोग सप्ताहांत पर विवाह समारोह आयोजित करना चाहते हैं उनके लिए यह दिन सबसे उपयुक्त है।

25 जनवरी 2026 (रविवार): जनवरी महीने का अगला शुभ मुहूर्त अगले ही दिन यानी 25 जनवरी को है। इस दिन षष्ठी तिथि और रेवती नक्षत्र रहेगा। रेवती नक्षत्र को मांगलिक कार्यों के लिए बहुत ही कोमल और शुभ माना जाता है। रविवार होने के कारण मेहमानों और रिश्तेदारों के शामिल होने के नजरिए से भी यह तारीख काफी लोकप्रिय रहने वाली है।
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28 जनवरी 2026 (बुधवार): महीने के अंत में 28 जनवरी को विवाह का एक और शानदार मुहूर्त बन रहा है। इस दिन नवमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। शास्त्रों में रोहिणी नक्षत्र को बहुत भाग्यशाली माना गया है क्योंकि यह चंद्रमा का प्रिय नक्षत्र है। इस मुहूर्त में किया गया विवाह स्थिरता और सुख-समृद्धि लाने वाला माना जाता है।
जनवरी 2026 में क्यों हैं इतने कम विवाह मुहूर्त?
भारतीय पंचांग और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि एक पवित्र संस्कार है जिसे ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं के तालमेल के साथ संपन्न किया जाना चाहिए। मकर संक्रांति के बाद सूर्य के उत्तरायण होने के बावजूद, जनवरी 2026 में विवाह के बहुत कम मुहूर्त उपलब्ध हैं। इसका सबसे प्रमुख और गहरा ज्योतिषीय कारण 'शुक्र तारा अस्त' होना है।

ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को प्रेम, वैवाहिक सुख, विलासिता और दांपत्य जीवन का कारक माना जाता है। जब शुक्र ग्रह सूर्य के बहुत करीब आ जाता है, तो वह अपनी चमक खो देता है और ज्योतिष की भाषा में इसे 'तारा डूबना' या 'शुक्र अस्त' कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, विवाह जैसे महत्वपूर्ण कार्य के लिए शुक्र का उदय होना अनिवार्य है।
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अस्त शुक्र की स्थिति में विवाह करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम और सुख की कमी रह सकती है। जनवरी 2026 में शुक्र ग्रह पूरे महीने अस्त रहेंगे जिस कारण बड़े स्तर पर विवाह के साए नहीं बन रहे हैं। शुक्र ग्रह 11 दिसंबर 2025 को अस्त हुए थे और यह स्थिति जनवरी 2026 के अंत तक बनी रहेगी। ज्योतिष गणना अनुसार, शुक्र का उदय 1 फरवरी 2026 को होगा।
जनवरी 2026 में कई तिथियों पर चंद्रमा और अन्य ग्रहों का गोचर विवाह के लिए आवश्यक 'दशम शुद्धि' या 'अष्टम शुद्धि' प्रदान नहीं कर रहा है। विवाह के लिए नक्षत्र जैसे रोहिणी, रेवती, उत्तराभाद्रपद आदि का शुभ होना जितना जरूरी है उतना ही जरूरी शुक्र और बृहस्पति जैसे ग्रहों का उदय और मजबूत स्थिति में होना है। हालांकि 23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी होने के कारण इस दिन विवाह तय करना शुभ होगा।
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image credit: herzindagi
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