Fri Sep 11, 2026 | Updated 11:32 PM IST

Ramayana Mystery: क्या आप जानती हैं हनुमान जी के कितने भाई थे? आखिर क्यों नहीं मिलता है रामचरितमानस में उनका वर्णन

हनुमान जी को भगवान श्रीराम का सबसे बड़े भक्त के रूप में पूजा जाता है। रामायण और रामचरितमानस में उनके पराक्रम और भक्ति का विस्तृत वर्णन मिलता है। क्या आप जानती हैं कि कुछ पौराणिक ग्रंथों के अनुसार हनुमान जी के कई भाई भी थे? आइए जानते हैं इस रोचक धार्मिक रहस्य के बारे में विस्तार से।
Updated:- 2026-03-09, 20:27 IST
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हिंदू धर्म के सबसे लोकप्रिय और पूजनीय देवताओं में से एक हनुमान जी को माना जाता है। उन्हें प्रभु श्री राम के परम भक्त के रूप में पूजा जाता है। हनुमान जी को सभी बाधाएं दूर करने वाला माना जाता है, इसी वजह से उनका एक नाम संकट मोचन भी है। रामायण और राम चरितमानस में हनुमान जी से जुड़े कई ऐसे तथ्य मिलते हैं जो उनकी महिमा का बखान करते हैं। न जाने कितनी बार हनुमान जी ने श्री राम का साथ दिया और उन्हें परेशानियों से निकलने में मदद की। यही नहीं उन्हें कई अन्य नामों जैसे बजरंगबली, अंजनी पुत्र, केसरी नंदन भी कहा जाता है। इतने तथ्यों में से एक यह भी है कि हनुमान जी अपने माता-पिता के अकेले पुत्र नहीं थे बल्कि उनके कई और भाई भी थे। हालांकि रामायण या रामचरित मानस में इस बात का कहीं भी जिक्र नहीं मिलता है, लेकिन अन्य पुराणों में इससे जुड़ी कई बातें बताए गयी हैं। आइए जानें हनुमान जी के भाइयों से जुड़े तथ्यों के बारे में विस्तार से।

हनुमान जी का जन्म कैसे हुआ?

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पौराणिक कथाओं के अनुसार हनुमान जी का जन्म वानरराज केसरी और माता अंजना के घर में हुआ था। माता अंजना अत्यंत रूपवती और तपस्विनी थीं। ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव के आशीर्वाद और वायु देव के अंश से हनुमान जी का जन्म हुआ। इसी कारण से हनुमान जी को पवन पुत्र भी कहा जाता है। कई धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी को भगवान शिव का अंश भी माना जाता है। बचपन से ही हनुमान जी को असाधारण शक्ति, बुद्धि और पराक्रम प्राप्त था और वो अपने पराक्रम के बल पर ही कई लीलाएं दिखाते थे।

हनुमान जी के कितने भाई थे?

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कई पौराणिक ग्रंथों में इस बात का जिक्र है मुख्य रूप से ब्रह्मांड पुराण में वानरों की वंशावली का विस्तृत वर्णन मिलता है। इसी में यह भी बताया गया है कि हनुमान जी के पांच सगे भाई थे। इन भाइयों में मतिमान, श्रुतिमान,केतुमान,गतिमान,धृतिमान कहा जाता है कि इन सभी भाइयों में हनुमान जी सबसे बड़े थे। इन भाइयों का जीवन सामान्य गृहस्थ की तरह बताया गया है और इनके विवाह भी हुए थे। जबकि हनुमान जी को बाल ब्रह्मचारी कहा जाता है।

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रामचरितमानस में क्यों नहीं मिलता उल्लेख?

बहुत से लोगों के मन में सवाल आता है कि हनुमान जी के भाइयों का जिक्र रामचरितमानस में क्यों नहीं मिलता है। रामचरितमानस का उद्देश्य भगवान श्रीराम की जीवन कथा और उनके प्रमुख भक्तों की लीलाओं का वर्णन करना था। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस में मुख्य रूप से श्रीराम, सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और रामभक्तों के चरित्र पर ही ध्यान दिया गया है। रामचरितमानस में हनुमान जी के पराक्रम और उनकी भक्ति का वर्णन तो मिलता है, लेकिन उनके पारिवारिक जीवन या वंशावली के बारे में विस्तार से चर्चा नहीं की गई है। इसी वजह से हनुमान जी के भाइयों का जिक्र किसी भी ग्रंथ में नहीं मिलता है।

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