Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या पर कब करें पितृ तर्पण? जानें शुभ मुहूर्त और विधि

हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है और इस दिन पितृों को याद कर तर्पण देने की परंपरा है। सालभर में कई अमावस्याएं आती हैं, मगर मौनी अमावस्या का अपना अलग महत्व है। मौनी अमावस्या पर पितृों की आत्माओं की शांति के लिए दिया गया तर्पण आपको पितृ दोष के प्रभाव से मुक्ति दिला सकता है और पितृ दोष में आ रही कठिनाइयों को कम भी कर सकता है। इसलिए हमने मध्य प्रदेश, उज्जैन के पंडित एवं ज्योतिषाचार्य मनीष शर्मा से बात की। वह कहते हैं, " हमारे परिवार के वह लोग, जो अब इस दुनिया में नहीं है, उन्हें समय-समय पर याद करना और उनके लिए कुछ धार्मिक अनुष्ठान करना हमारे लिए बहुत ही आवश्यक होता है। हर तीज-त्योहार पर हमारे पितृ इसी आशा के साथ घर आते हैं कि हम उन्हें याद कर रहे होंगे, मगर जब हम ऐसा नहीं कर रहे होते हैं , तो उन्हें दुख होता है। ऐसी अवस्था में हमारे ऊपर पितृ दोष लग जाता है। मौनी अमावस्या एक ऐसा दिन होता है, जब हम अपने पितृों को याद कर उन्हें श्रृद्धा पूर्वक तर्पण देते हैं। "
पंडित जी ने हमें मौनी अमावस्या के दिन पितृों को तर्पण देने का मुहूर्त और सही विधि भी बताई है।
कब है मौनी अमावस्या?
हिंदी पंचांग के अनुसार, माघ के महीने में पड़ने वाली अमावस्या का खासा महत्व होता है। इस बात यह तिथि 18 जनवरी 2026 को दोपहर 12 बजकर 3 मिनट से शुरू होगी और 19 जनवरी 2026 को दोपहर 1 बजकर 21 मिनट तक रहेगी। इस तरह से उदय तिथि के हिसाब से मौनी अमावस्या 18 जनवरी को ही मनाई जाएगी।
मौनी अमावस्या पर पितृों को तर्पण देने का मुहूर्त
पितृों को तर्पण देने के लिए सबसे अच्छा समय अभिजीत मुहूर्त होता है। 18 जनवरी 2026 को अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर शुरू होगा और 12 बजकर 52 मिनट पर खत्म हो जाएगा। इसलिए इस वक्त आप गंगाजल से पितृों को तर्पण दे सकती हैं। इस विषय में पंडित मनीष कहते हैं, " पूरे दिन 30 मुहूर्त आते हैं। वहीं सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक 15 मुहूर्त पड़ते हैं और जो सबसे बीच का समय होता है, वह अभिजीत मुहूर्त कहलाता है।"

मौनी अमावस्या पर पितृों को तर्पण देने का सही तरीका
- सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सिकी पवित्र नदी जैसे गंगा, यमुना, गोदावरी, छिपरा आदि में स्नान करें। यदि आप किसी नदी में स्नान करने नहीं जा सकते हैं, तो आपको घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिक्स कर लेना चाहिए और उससे स्नान कर लेना चाहिए।
- हमेशा स्नान करते वक्त आपको अपना मुख दक्षिण दिशा की ओर रखना चाहिए यह दिशा पितृों की दिशा कहलाती है।
- पितृों को तर्पण देने के लिए एक तांबे के लोटे में जल लेना चाहिए। यह गंगा नदी का पानी हो, तो और भी अच्छी बात है। इसी जल से आपको पितृों का तर्पण करना चाहिए।
- इस जल में कुश, काले तिल और अक्षत जरूर मिलाएं। इससे यह पानी पितृों के लिए और भी ज्यादा उपयोक्त हो जाता है।
- पितृों को तर्पण देते वक्त मंत्र जाप: "ॐ पितृभ्यो नमः" या "ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः" मंत्र का जाप करते हुए और अपने पितरों को याद करते हुए जल अर्पित करें। यह काम आपको कम से कम 11 बार जरूर करना चाहिए।
- यदि संभव हो तो आपको मौनी अमावस्या के दिन पिंडदान जरूर करें। आप चावल और काले तिल का पिंड बनाकर पितरों को अर्पित करें और फिर इस पर जल चढ़ाएं।
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- मौनी अमावस्या पर पितृ तर्पण क्यों किया जाता है?
- मान्यता है कि इस दिन पितृ लोक के द्वार खुल जाते हैं और पितर अपने वंशजों से तर्पण की अपेक्षा रखते हैं। श्रद्धा से किया गया तर्पण पितरों को शांति देता है और उनकी कृपा प्राप्त होती है।
- पितृ दोष क्या होता है और यह कैसे लगता है?
- जब पितरों का समय पर श्राद्ध, तर्पण या स्मरण नहीं किया जाता, तो पितृ दोष लगता है। इसके कारण जीवन में आर्थिक परेशानी, विवाह में देरी, संतान सुख में बाधा और मानसिक तनाव हो सकता है।
- मौनी अमावस्या पर तर्पण करने का सही समय क्या होता है?
- तर्पण करने का सबसे शुभ समय प्रातःकाल स्नान के बाद से लेकर दोपहर तक माना जाता है। ब्रह्म मुहूर्त या सूर्य उदय के बाद तर्पण करना विशेष फलदायी होता है।
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