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Magh Mela 2026 Kalpvas Niyam: क्या होता है कल्पवास? माघ मेले में कौन-कौन कर सकता है इसे

माघ के पवित्र महीने में माघ मेले के दौरान विशेषकर प्रयागराज के संगम तट पर कल्पवास की परंपरा सदियों से चली आ रही है। यह केवल नदी किनारे रहना नहीं है बल्कि सांसारिक मोह-माया को त्यागकर एक महीने तक सादगी और कठिन नियमों का पालन करते हुए ईश्वर की शरण में रहने का नाम है।
Editorial
Updated:- 2026-01-05, 14:50 IST

हिंदू धर्म में कल्पवास को आध्यात्मिक शुद्धि और धैर्य की सबसे कठिन, लेकिन फलदायी साधना माना गया है। 'कल्प' का अर्थ होता है युग और 'वास' का अर्थ है निवास करना, अर्थात एक ऐसी साधना जो साधक को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति दिलाकर एक नए युग की ओर ले जाती है। माघ के पवित्र महीने में माघ मेले के दौरान विशेषकर प्रयागराज के संगम तट पर कल्पवास की परंपरा सदियों से चली आ रही है। यह केवल नदी किनारे रहना नहीं है बल्कि सांसारिक मोह-माया को त्यागकर एक महीने तक सादगी और कठिन नियमों का पालन करते हुए ईश्वर की शरण में रहने का नाम है। ऐसे में आइये जानते हैं वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से कि माघ मेले के दौरान कौन-कौन कल्पवास कर सकता है और आखिर क्या होता है कल्पवास? 

क्या होता है कल्पवास?

कल्पवास माघ मेले के दौरान गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम तट पर एक महीने तक निवास करने की प्रक्रिया है। यह पौष मास की पूर्णिमा से शुरू होकर माघ की पूर्णिमा तक चलता है। इस दौरान श्रद्धालु अपना घर-बार छोड़कर नदी के किनारे छोटी सी कुटिया या तंबू में रहते हैं।

kalpvas ke niyam

कल्पवास का मुख्य उद्देश्य मन और इंद्रियों पर विजय पाना है। मान्यता है कि संगम के तट पर एक महीने तक जप, तप और ध्यान करने से व्यक्ति को कई जन्मों के पुण्यों का फल एक साथ मिल जाता है और उसके सभी पाप धुल जाते हैं।

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कल्पवास के नियम और दिनचर्या

कल्पवासी दिन में केवल एक बार सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। वे स्वयं अपने हाथों से भोजन बनाते हैं। प्रतिदिन सुबह सूर्योदय से पहले संगम में पवित्र स्नान करना अनिवार्य होता है।

कल्पवासी बिस्तर या पलंग का त्याग कर जमीन पर चटाई या पुआल बिछाकर सोते हैं। इस दौरान झूठ बोलना, क्रोध करना, निंदा करना और किसी भी प्रकार के नशे से पूरी तरह दूर रहना होता है। ब्रह्मचर्य का पालन करना इस साधना की पहली शर्त है।

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कौन-कौन कर सकता है कल्पवास?

कल्पवास कोई भी व्यक्ति कर सकता है जिसकी ईश्वर में अटूट श्रद्धा हो और जो कठिन नियमों का पालन करने की शारीरिक क्षमता रखता हो। मुख्य रूप से गृहस्थ लोग अपनी जिम्मेदारियों से कुछ समय के लिए विराम लेकर आत्मिक शांति के लिए कल्पवास करते हैं।

kalpvas kaun kaun kar sakta hai

प्रयागराज में बड़ी संख्या में बुजुर्ग महिलाएं और पुरुष अपनी आयु के अंतिम पड़ाव में मोक्ष की प्राप्ति के लिए कल्पवास करते हैं। विभिन्न अखाड़ों के साधु-संन्यासी तो वहां होते ही हैं, लेकिन कल्पवास विशेष रूप से आम जनमानस के लिए बनाया गया एक आध्यात्मिक शिविर जैसा है।

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