Chaitra Purnima Date 2026: आज या कल, कब है चैत्र पूर्णिमा? यहां जानिए सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व

हिंदू धर्म में किसी भी एकादशी तिथि का विशेष महत्व होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से युक्त होता है और चंद्र पूजन करने से उसकी ऊर्जा का पूर्ण फल मिलता है। इन सभी पूर्णिमा तिथियों में से खास मानी जाती है चैत्र पूर्णिमा। यह चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है और इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने के साथ दान-पुण्य करना भी विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। इस साल भी चैत्र पूर्णिमा की तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है और यह 1 अप्रैल को मनाई जाएगी या 2 अप्रैल को इस बात को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं। ऐसे में पंचांग में बताई तिथि को ही किसी भी पर्व के लिए शुभ माना जाता है। आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें इस साल चैत्र पूर्णिमा कब मनाई जाएगी और इसकी पूजा के लिए शुभ मुहूर्त क्या है?
चैत्र पूर्णिमा कब है? (Chaitra Purnima Kab Hai 2026)

- हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र पूर्णिमा इस साल 01 अप्रैल 2026, बुधवार को मनाई जाएगी।
- चैत्र पूर्णिमा का आरंभ- 01 अप्रैल 2026 प्रातः 7:06 बजे से
- पूर्णिमा तिथि का समापन-02 अप्रैल 2026, गुरुवार को प्रातः 7:41 बजे
- ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, चैत्र पूर्णिमा 02 अप्रैल को है, लेकिन पूर्णिमा की पूजा चंद्रोदय से मानी जाती है, इसलिए चैत्र पूर्णिमा 01 अप्रैल को मनाई जाएगी।
- हालांकि, आप उदया तिथि में 02 अप्रैल को स्नान और दान कर सकती हैं।
- चैत्र पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य करना भी बहुत शुभ माना जाता है और इस दिन मुख्य रूप से भगवान विष्णु और चंद्रमा की पूजा की जाती है।
चैत्र पूर्णिमा पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है? (Chaitra Purnima Puja Muhurat 2026)

- ब्रह्म मुहूर्त 02 अप्रैल, प्रातः 4:38 से 5:24 बजे तक। यही समय स्नान के लिए सबसे शुभ है। यदि आप इस समय गंगा जैसी पवित्र नदी में स्नान करेंगी तो शुभ फल मिलेंगे।
- अभिजीत मुहूर्त- 01 अप्रैल, दोपहर 12:00 से 12:50 बजे तक। यह मुहूर्त पितरों की पूजा के लिए शुभ माना जाता है
- प्रदोष काल मुहूर्त- 01 अप्रैल, शाम 6:39 बजे से। इस मुहूर्त में माता लक्ष्मी की पूजा करना बहुत शुभ माना जा रहा है।
- पूर्णिमा की रात में चंद्रमा को अर्घ्य देना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने का शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
- चंद्रमा को अर्घ्य देने का शुभ समय 02 अप्रैल रात्रि 08:15 बजे से है।
चैत्र पूर्णिमा का महत्व क्या है?

चैत्र पूर्णिमा को चंद्रमा की पूजा के लिए अत्यंत शुभ समय माना जाता है। इस दिन चंद्रमा की पूजा और अर्घ्य से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कला से युक्त होता है, इसलिए चंद्र देव की पूजा और उन्हें अर्घ्य देने से मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चंद्रमा मन का कारक होता है, इसलिए इस दिन चंद्रमा की पूजा करने से मन से नकारात्मक विचार दूर होते हैं। इस दिन व्रत रखकर सत्यनारायण भगवान की कथा सुनना और दान-पुण्य करना बहुत फलदायी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि चैत्र पूर्णिमा के दिन स्नान, दान और पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं, पापों से मुक्ति मिलती है।
यदि आप भी इस शुभ तिथि और मुहूर्त के अनुसार चैत्र पूर्णिमा की पूजा करेंगी, तो सभी पापों से मुक्ति के द्वार खुलेंगे। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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