Maha Kumbh Amrit Snan Muhurat 2025: आज है बसंत पंचमी पर महाकुंभ का तीसरा अमृत स्नान, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व

Mahakumbh 2025 3rd Amrit Snan: 144 वर्षों के बाद लगने वाले महाकुंभ का आयोजन इस वर्ष प्रयागराज में किया गया है। इस पर्व में शामिल होने के लिए देश-दुनिया से करोड़ों की संख्या में रोजाना लोग त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। महाकुंभ में पहला अमृत स्नान मकर संक्रांति पर संपन्न हुआ था, जबकि दूसरा अमृत स्नान मौनी अमावस्या पर हुआ। वहीं अब अगला अमृत स्नान वसंत पंचमी के दिन होने वाला है। इस लेख में हम आपको वसंत पंचमी के दिन होने वाले अमृत स्नान का शुभ मुहूर्त और महत्व के बारे में बताने जा रहे हैं।
कब मनाई जाएगी वसंत पंचमी ?
हिंदू पंचांग के अनुसार वसंत पंचमी माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल वसंत पंचमी का पर्व 2 फरवरी को सुबह 9:14 बजे से प्रारंभ होकर और 3 फरवरी को प्रातः 6:52 बजे पर समाप्त होगी। हालांकि उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए, वसंत पंचमी का व्रत और पूजन 2 फरवरी को मनाया जाएगा।
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वसंत पंचमी पर अमृत स्नान का शुभ मुहूर्त कब है? (Maha Kumbh Amrit Snan Muhurat 2025)

वसंत पंचमी के दिन महाकुंभ में विशेष अमृत स्नान का आयोजन किया जाएगा, जो 3 फरवरी को ब्रह्म मुहूर्त में होगा। इस दिन पवित्र स्नान का शुभ समय सुबह 05:23 बजे से 06:16 बजे तक रहेगा। मान्यता है कि इस समय संगम में स्नान करने से पुण्य प्राप्त होता है और सभी पापों का नाश होता है।
| अमृत स्नान तिथि | अमृत स्नान मुहुर्त का नाम | स्नान का समय |
| 02 फरवरी, 2025 | अभिजीत मुहूर्त | दोपहर 12 बजकर 45 से 01 बजकर 02 मिनट |
| 02 फरवरी, 2025 | अमृत काल | रात 09 बजकर 02 मिनट से 10 बजकर 32 मिनट |
| 03 फरवरी, 2025 | ब्रह्म मुहूर्त | सुबह 05 बजकर 33 मिनट से 06 बजकर 21 मिनट |
वसंत पंचमी पर अमृत स्नान का महत्व

वसंत पंचमी का दिन भारतीय धर्म और संस्कृति में खास महत्व रखता है, क्योंकि इसे ज्ञान की देवी सरस्वती की पूजा का दिन माना जाता है। इस दिन को खासतौर पर बोध और शुद्धि का दिन भी माना जाता है, और जब यह दिन महाकुंभ के साथ मेल खाता है तो इसकी विशेषता और बढ़ जाती है।
अमृत स्नान का बेहद ही खास महत्व है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसे ब्रह्म मुहूर्त में करने से विशेष पुण्य लाभ मिलता है। ऐसा मानना है कि इस समय संगम में स्नान करने से समस्त पापों का नाश होता है और व्यक्ति को आध्यात्मिक शुद्धता प्राप्त होती है। वसंत पंचमी के दिन होने वाला अमृत स्नान न केवल शारीरिक शुद्धता लाता है, बल्कि यह मानसिक और आत्मिक उन्नति का भी एक जरिया है।
इस दिन गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में स्नान करने से जीवन में शांति, समृद्धि और कल्याण की प्राप्ति होती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन किए गए स्नान से व्यक्ति के समस्त पाप समाप्त हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग भी प्रशस्त होता है। इसलिए, वसंत पंचमी पर अमृत स्नान को एक अत्यंत पवित्र और पुण्यदायिनी क्रिया माना जाता है।
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- बसंत पंचमी पर अमृत स्नान कैसे करें?
- बसंत पंचमी के दिन महाकुंभ में अमृत स्नान करते समय जहां एक ओर त्रिवेणी संगम में खड़े होकर सूर्य को जल दें और भगवान शिव का ध्यान करें, वहीं, उसके बाद मां सरस्वती के मंत्रों का जाप करें।
- बसंत पंचमी पर अमृत स्नान के क्या लाभ हैं?
- यूं तो महाकुंभ में अमृत स्नान करने से पाप नष्ट हो जाते हैं तो वहीं, आज बसंत पंचमी के दिन अमृत स्नान करने से व्यक्ति में ज्ञान का संचार बढ़ता है और कला एवं शिक्षा में वृद्धि होती है।
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