Adhik Maas 2026: कब से शुरू हो रहा है अधिक मास? इस दौरान भूलकर भी न करें ये 3 काम

साल 2026 में ज्येष्ठ के महीने में अधिक मास लग रहा है, इसका मतलब यह है कि हिंदू पंचांग के अनुसार यह महीना दो माह तक चलेगा। अधिक मास का आरंभ 17 मई से होगा और यह 15 जून तक रहेगा, जिसमें पूजा-पाठ, दान और साधना का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि इस दौरान कुछ नियमों का पालन करने और गलतियों से बचने पर जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक बदलाव आते हैं। आइए जानें आपको इस दौरान किन कामों को करने से बचना चाहिए?
Updated:- 2026-05-08, 18:37 IST
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हिंदू धर्म में अधिक मास को बहुत पवित्र और पुण्यदायी महीना माना जाता है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, क्योंकि यह महीना भगवान श्रीहरि विष्णु की भक्ति को समर्पित होता है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह विशेष महीना हर तीन साल में एक बार आता है और साधना, जप, तप, दान और आत्म शुद्धि के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दौरान किए गए आध्यात्मिक कार्यों का कई गुना ज्यादा फल प्राप्त मिलता है। इस साल 2026 में भी ज्येष्ठ का महीना अधिक मास है। इसी वजह से इस साल दो ज्येष्ठ महीने होंगे। इस समय को अत्यंत शुभ माना जाता है और जो इस दौरान दान-पुण्य करता है उसे सभी सुखों की प्राप्ति होती है। इस दौरान दान-पुण्य करना भी होता है। इस साल अधिक मास 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक रहेगा। इस पूरे महीने में भगवान विष्णु की आराधना, मंत्र जाप और दान-पुण्य का विशेष महत्व है। आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानते हैं अधिक मास 2026 की तिथि, शुभ मुहूर्त और इस दौरान किन कामों से बचना चाहिए।

अधिक मास 2026 कब से कब तक रहेगा?

adhik mas date

  • हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल 2026 में अधिक मास की शुरुआत 17 मई 2026, रविवार से हो रही है।
  • अधिक मास का समापन 15 जून 2026, सोमवार को होगा।
  • ऐसी मान्यता है कि इस पूरे समय में भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना, व्रत और विशेष साधना करने से पुण्य फलों को प्राप्ति होती है और जीवन में खुशहाली बनी रहती है।
  • धार्मिक मान्यता के अनुसार अधिक मास आत्मिक उन्नति और सकारात्मक बदलाव के लिए काफी अच्छा और शुभ समय माना जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है और जीवन में खुशहाली के संकेत मिलते हैं।

अधिक मास 2026 के पहले दिन का शुभ मुहूर्त

अधिक मास के पहले दिन यानी 17 मई 2026 को कई शुभ योग बन रहे हैं। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त और पूजा-पाठ का समय विशेष फलदायी माना गया है। इस महीने की शुरुआत में यदि आप कुछ शुभ मुहूर्त में पूजा-पाठ करेंगी तो विशेष फलों की प्राप्ति होती है और भगवान विष्णु का आशीर्वाद बना रहता है।

  • ब्रह्म मुहूर्त: 17 मई, प्रातः 4:06 बजे से 4:48 बजे तक
  • सूर्योदय: प्रातः 5:29 बजे
  • संकल्प और स्नान-दान का शुभ समय: 17 मई, प्रातः 4:27 बजे से 5:29 बजे तक
  • संध्या पूजा मुहूर्त: 17 मई, शाम 7:06 बजे से 8:08 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: 17 मई, प्रातः 11:50 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक
  • अमृत काल: 17 मई, दोपहर 12:26 बजे से दोपहर 1:50 बजे तक
  • विजय मुहूर्त: 17 मई, दोपहर 2:34 बजे से 3:28 बजे तक

अधिक मास में क्या करना नहीं करना चाहिए?

what not to do in adhik mas

अधिक मास में किसी भी शुभ काम की मनाही होती है और ऐसा कहा जाता है कि इस दौरान कुछ विशेष काम भूलकर भी नहीं करने चाहिए। आइए जानें उनके बारे में-

मांगलिक कार्य करने से बचें

अधिक मास में किसी भी तरह के मांगलिक कार्यों जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और नए शुभ कार्यों की शुरुआत करना शुभ नहीं माना जाता है। इस समय को आध्यात्मिक साधना के लिए श्रेष्ठ माना गया है। इस दौरान शादी-विवाह से जुड़ी रस्में भी नहीं करनी चाहिए।

तामसिक भोजन न करें

अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और इस दौरान आपको भूलकर भी तामसिक भोजन न करने की सलाह दी जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस दौरान तामसिक भोजन का सेवन करने से आपके जीवन में इसके नकारात्मक प्रभाव भी हो सकते हों। यही नहीं ऐसा करने से विष्णु जी की कृपा प्राप्त नहीं होती है। इसी वजह से आपको इस दौरान मांस, मदिरा या किसी भी तरह के तामसिक भोजन से बचना चाहिए।

किसी का अपमान न करें

अधिक मास में दान, सेवा और विनम्रता का विशेष महत्व होता है। इस दौरान आपको किसी गरीब, बुजुर्ग या जरूरतमंद व्यक्ति का अपमान करने से बचना चाहिए। ऐसा करने से आपके जीवन में दोष लग सकता है और जीवन में समस्याएं आ सकती हैं।

अधिक मास में क्या करें?

  • अधिक मास में व्यक्ति को भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की नियमित पूजा करनी चाहिए।
  • इस दौरान दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है और यदि आप जरूरतमंदों को उनकी आवश्यकता की चीजें दान में देंगी तो आपके लिए फलदायी हो सकता है।
  • इस दौरान आप सात्विक भोजन ही ग्रहण करें।
  • यदि आप इस दौरान गीता, विष्णु पुराण या रामायण जैसे धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें, तो अत्यंत फलदायी माना जाता है।

अगर आप भी अधिक मास के दौरान यहां बताए नियमों का पालन करेंगी, तो आपके जीवन में खुशहाली बनी रहेगी। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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