Fri Sep 11, 2026 | Updated 10:42 PM IST

1st Day of Navratri Vrat Katha 2025: शारदीय नवरात्रि के पहले व्रत में सुनें मां शैलपुत्री की पौराणिक कथा, सुख-समृद्धि से भर जाएगा जीवन

1st Day of Navratri Vrat Katha 2025: शारदीय नवरात्रि इस साल 22 सितंबर यानि रविवार से शुरू हो रही है। इन 9 दिनों के लिए माता लोगों के घर विराजमान होंगी। नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। ऐसे में व्रत में आप इसकी कथा जरूर कहें।
Updated:- 2025-09-22, 05:43 IST
image

हिंदू पंचाग के अनुसार शारदीय नवरात्रि की शुरूआत इस साल 22 सितंबर से हो रही है। हर कोई मां के आगमन की तैयारियां कर रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि हर कोई मां को अपने घर में बुलाना चाहता है। साथ ही पूरे विधि-विधान से पूजा करना चाहता है। ऐसे में नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है। मां शैलपुत्री जिन्हें पर्वतरात हिमालय की पुत्री भी कहते हैं। सफेद वस्त्र को पहनें मां शैलपुत्री नंदी बैल की सवारी किए आती हैं। इनके माथे पर चंद्रमा और दाहिने हाथ में त्रिशुल होता है। इसलिए हर कोई नवरात्रि के पहले दिन इनकी पूजा करता है। इस नवरात्रि आप इनकी पूजा के साथ-साथ इनकी पौराणिक कथा को जरूर पढ़ें। इससे मां का आशीर्वाद आपको भरपूर मिलेगा।

मां शैलपुत्री की व्रत कथा

नवरात्रि के पहले दिन जिस देवी की पूजा की जाती है, वह हैं मां शैलपुत्री। उनकी कथा बहुत ही महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक है। यह कहानी हमें दिखाती है कि कैसे एक आत्मा अपने स्वरूप को बदलकर भी अपने मूल उद्देश्य को नहीं भूलती।

मां शैलपुत्री का स्वरूप अत्यंत मनमोहक और शांत है। उनके सिर पर अर्धचंद्र सुशोभित है। वह अपने दाहिने हाथ में त्रिशूल धारण करती हैं, जो बुरी शक्तियों का नाश करने का प्रतीक है और बाएं हाथ में कमल का फूल जो पवित्रता और शांति का प्रतीक है।

1 - 2025-09-19T125706.136उनका वाहन वृषभ यानी बैल है इसीलिए उन्हें 'वृषारूढ़ा' भी कहा जाता है। यह बैल धर्म और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है, जो यह दर्शाता है कि देवी हमेशा धर्म और सच्चाई के रास्ते पर चलती हैं। उनका पूरा स्वरूप सादगी और शक्ति का एक अद्भुत संगम है, जो हमें जीवन में धैर्य और साहस के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

मां शैलपुत्री हिमालय पर्वत की बेटी हैं। 'शैल' का अर्थ है पर्वत और 'पुत्री' का अर्थ है बेटी। इनके जन्म की कहानी भगवान शिव से जुड़ी हुई है। पूर्वजन्म में ये प्रजापति दक्ष की पुत्री थीं और उनका नाम सती था। सती ने भगवान शिव से विवाह किया था, लेकिन उनके पिता दक्ष इस विवाह के खिलाफ थे। एक बार दक्ष ने एक बड़ा यज्ञ करवाया और सभी देवी-देवताओं को बुलाया, लेकिन जानबूझकर शिव और सती को निमंत्रण नहीं दिया।

2 - 2025-09-19T125703.118

सती को जब इस बात का पता चला, तो वे बिना बुलाए ही अपने पिता के घर यज्ञ में पहुंच गईं। वहां उन्होंने देखा कि सभी लोग शिव का अपमान कर रहे हैं। उनके पिता दक्ष ने भी शिव के बारे में बहुत बुरा-भला कहा। अपने पति का अपमान सुनकर सती बहुत क्रोधित हुईं। वे इस अपमान को सह नहीं पाईं और उसी यज्ञ कुंड में खुद को भस्म कर लिया।

इसे भी पढ़ें: Shardiya Navratri 2025 Ka Prabhav: शारदीय नवरात्रि के दिव्य नौ दिनों में बदल सकती है इन 9 राशियों की किस्मत, 10वां दिन लाएगा ये शुभ परिणाम

सती के इस बलिदान से शिव बहुत दुखी हुए और उन्होंने दक्ष के यज्ञ को नष्ट कर दिया। इसके बाद, अगले जन्म में सती ने पर्वतराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया, और तभी से उन्हें शैलपुत्री कहा जाने लगा। इस जन्म में भी उन्होंने भगवान शिव को ही अपने पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया।

3 - 2025-09-19T125658.771

 

मां शैलपुत्री की पूजा करने का एक गहरा अर्थ है। यह हमें यह सिखाता है कि भले ही हमारा जीवन बदलता रहे, लेकिन हमें अपने लक्ष्य और विश्वास पर अटल रहना चाहिए। यह कहानी हमें यह भी बताती है कि सही के लिए खड़े होना और अपमान के खिलाफ आवाज़ उठाना कितना जरूरी है।


इसे भी पढ़ें: Navratri Mein Kya Bo Sakte Hain: शारदीय नवरात्रि पर नहीं है 'जौ' तो और क्या बो सकते हैं?

इस बार शारदीय नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की इस कथा को जरूर पढ़ें। इससे आपका व्रत भी पूरा हो जाएगा। साथ ही माता रानी की कृपा भी आपके ऊपर बनी रहेगी। आप इस कथा को सुबह और शाम दोनों समय में कर सकते हैं।

शारदीय नवरात्रि से जुड़े अन्य लेख

इस आर्टिकल के बारे में अपनी राय आप हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। साथ ही,अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें। इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिंदगी के साथ।

image credit- Freepik

FAQ
शारदीय नवरात्रि के दौरान क्या खरीदना शुभ होता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्र के अवसर पर चांदी का कोई भी सामान खरीदना अत्यंत शुभ होता है। 
शारदीय नवरात्रि के दौरान क्या दान करना चाहिए? 
शारदीय नवरात्रि के दौरान गेहूं, चावल, जौ का दान करना सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है। 
Disclaimer

हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia.com पर हमसे संपर्क करें।