कानपुर में इस जगह हैं मां कूष्मांडा का चमत्कारी मंदिर, दर्शन से लेकर खाने-पीने तक; जानें पूरी ट्रैवल गाइड

शारदीय नवरात्रि में हर दिन मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। 14 अक्टूबर 2026 को नवरात्रि का चौथा दिन है और इस दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाएगी। मां कूष्मांडा को लेकर मान्यता है कि उन्होंने अपनी मुस्कान से पूरे ब्रह्मांड की रचना की थी। अगर आप इस दिन मां के दर्शन करने के लिए किसी खास मंदिर जाने का प्लान बना रही हैं, तो उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के घाटमपुर में मां कूष्मांडा देवी का चमत्कारी मंदिर है।
इस मंदिर की खास बात यहां जमीन पर लेटी हुई दिखने वाली मां की पिंडी है, जिससे पूरे साल पानी रिसता रहता है। ऐसे में आज हम आपको अपने इस लेख में पूरा ट्रैवल गाइड दे रहे हैं।
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कानपुर में मां कूष्मांडा का मंदिर कहां है?
कानपुर के घाटमपुर तहसील में मां कूष्मांडा काृ मंदिर है, जो अपनी अनोखी पिंडी के लिए जाना जाता है। यहां मां की पिंडी जमीन पर लेटी हुई है और इसका आकार भी आम मूर्तियों से अलग है। पिंडी के दो मुख होने के कारण इसका आखिरी सिरा अभी तक किसी को समझ नहीं आया। इस मंदिर की एक और खास बात यह है कि मां की पिंडी से पूरे साल पानी रिसता रहता है। यह पानी कहां से आता है, इसकी सही वजह किसी को नहीं मालूम है।
कानपुर के कूष्मांडा मंदिर जाने का सही समय क्या है?
वैसे तो मंदिर में सुबह 6 बजे से रात 9 बजे तक दर्शन किए जाते हैं, लेकिन त्योहारों या सर्दियों के मौसम में समय में बदलाव भी होता है। नवरात्रि के दौरान जाने से पहले मंदिर का समय एक बार पता कर लें।
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मंदिर के आसपास कहां रुक सकती हैं?
अगर आप दूसरे शहर से मां के दर्शन के लिए आ रही हैं और एक दिन से ज्यादा रुकना चाहती हैं, तो घाटमपुर में होटल या गेस्ट हाउस आपको मिल जाएंगे। इसके अलावा, कानपुर के बर्रा इलाके में भी स्टे देख सकती हैं। बस रूम बुक करने से पहले मंदिर से उसकी दूरी, आने-जाने की सुविधा और किराया जरूर पता कर लें।
कानपुर के मां कूष्मांडा मंदिर कैसे पहुंचें?
- ट्रेन से: कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन कानपुर का बड़ा रेलवे स्टेशन है। वहां पहुंचने के बाद घाटमपुर जाने के लिए टैक्सी, ऑटो या बस का ऑप्शन मिल जाएगा।
- सड़क से: कानपुर शहर सड़क के रास्ते उत्तर प्रदेश के कई शहरों से कनेक्टेड है। कानपुर पहुंचने के बाद घाटमपुर जाने के लिए बस, टैक्सी मिल जाती है।
- हवाई जहाज से: कानपुर एयरपोर्ट पहुंचने के बाद टैक्सी या कैब से घाटमपुर पहुंच सकती हैं।
कानपुर में क्या खाएं?
अगर आप कानपुर आ रही हैं, तो यहां आपको खाने-पीने के भी कई सस्ते ऑप्शन मिल जाएंगे। आप यहां के स्ट्रीट फूड भी ट्राई कर सकती हैं। वहीं, जगह-जगह पर आपको रेस्टोरेंट भी मिल जाएंगे। अगर आप व्रत रख रही हैं, तो भी आपको कई रेस्टोरेंट्स में ऑप्शन मिल जाएंगे।
मां कूष्मांडा मंदिर के दर्शन के लिए कितने समय का प्लान बनाएं?
आप इसके लिए दो दिन का प्लान बना सकती हैं। पहले दिन पहुंचकर फ्रेश हाेकर मंदिर में दर्शन करें। इसके बाद कछ नाश्ता या खाना खाकर दूसरी जगहों को एक्सप्लोर कर सकती हैं। कानपुर में कई खूबसूरत जगहें और मंदिर हैं। जैसे-
- बिठूर
- गंगा बैराज
- कानपुर जू
- मोती झील
- जेके मंदिर
- इस्कॉन मंदिर
- जैन ग्लास मंदिर
- कानपुर मेमोरियल चर्च
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा के दर्शन करने का मन है, तो घाटमपुर का यह मंदिर आपके लिए सही हो सकता है। साथ ही अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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- मां कूष्मांडा को क्या चढ़ाएं?
- मां कूष्मांडा को कद्दू (कुम्हड़ा) की बलि या भेट, लाल फूल, मालपुआ और हरी इलायची चढ़ाना बेहद शुभ माना जाता है।
- घाटमपुर मंदिर कितना पुराना है?
- यह ऐतिहासिक मंदिर सैकड़ों साल पुराना माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इसका संबंध महाभारत काल से भी जोड़ा जाता है।
- मां कूष्मांडा पिंडी के पानी का क्या करें?
- मंदिर में पिंडी से रिसने वाले जल को श्रद्धालु चरणामृत मानकर स्वीकार करते हैं। माना जाता है कि इसे पीने से बीमारियां दूर होती हैं।
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