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सिंदूर खेला से लेकर धुनुची नाच तक, इन तस्वीरों में छुपी है दुर्गा पूजा की खासियत

Durga Puja 2022: आइए जानते हैं कितनी खास है हर साल होने वाली दुर्गा पूजा। 
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Published - 19 Sep 2022, 07:00 ISTUpdated - 19 Sep 2022, 09:05 IST
durga puja celebration

Durga Puja 2022: नवरात्रि के आते ही चारों तरफ दुर्गा पूजा की चहल-पहल शुरू हो जाती है। आज के समय में दूर्गा पूजा सिर्फ पश्चिम बंगाल और कोलकाता में ही नहीं बल्कि पूरे भारत में धूमधाम से मनाई जाती है। ढाक ढोल से लेकर सिंदूर खेला तक, दुर्गा पूजा का एक-एक रंग देखने लायक होता है। आइए हम भी तस्वीरों की मदद से जानते हैं दुर्गा पूजा की खासियत।

1दुर्गा पूजा का रंग

what is durga puja

दुर्गा पूजा के 9 दिन तक भक्त एक अलग भक्ति के रंग में रंगे नजर आते हैं। इस पूजा के दौरान तरह-तरह के रीति-रिवाज फॉलो किए जाते हैं जो बहुत अलग होते हैं और यही इस पूजा की सबसे बड़ी खासियत है। 

2पहले से शुरू हो जाती हैं तैयारियां

before durga puja preparation

दुर्गा पूजा शुरू होने से पहले ही हर कोई मां के स्वागत की तैयारी शुरू कर देता है। कोई पंडाल सजाता है तो कोई मां की प्रतिमा को सुंदर से सुंदर सजाने में लग जाता है। इस पूजा के दौरान सजाए जाने पर हर पंडाल की एक अलग थीम होती है। 

 

3ढाक-ढोल और शंख

durga puja imp

मां दुर्गा की आराधना के लिए 9 दिन तक लगातार ढाक-ढोल बजाए जाते हैं। इतना ही नहीं शंख की ध्वनि से भी पूरा पंडाल जगमगा उठता है। कहा जाता है कि ढाक-ढोल और शंख की ध्वनि के बिना दुर्गा पूजा अधूरी है। 

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4कुमारी पूजा

kumari puja

दुर्गा पूजा के दौरान ना सिर्फ मां की प्रतिमा की पूजा होती है बल्कि कुंवारी लड़कियों को भी प्रसाद खिलाया जाता है। यह पूजा अष्टमी और नवमी के दिन होने वाली पूजा जैसी ही होती है। 

5धुनुची नाच

dhanuchi dance

इस पूजा की शान धुनुची नाच से पूरे पंडाल का माहौल मनमोहक हो जाता है। इस डांस के दौरान महिलाएं हाथों में धूप लेकर गीतों और ढाक की धुन पर थिरकती हैं। धुनुची नाच शक्ति को प्रदर्शन करता है।

6सिंदूर खेला

sindur khela

दशमी के दिन मां की विधि विधान से पूजा की जाती है। पूरा पंडाल लाल रंग के रंग में सजा नजर आ रहा होता है और महिलाएं सिंदूर खेला का खूब आनंद लेती हैं।

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7लजीज खाना

durga puja food

लुची-आलू दम, मिष्टी पुलाव, घुघनी चाट और ढेर सारे लजीज व्यंजनों से सजी थाली दुर्गा पूजा की खासियत है। किसी भी अलग राज्य के भोजन की तरह यह थाली भी बंगाल और कोलकाता की खासियत दिखाती है। 

8फिर होती है विदाई

durga puja end

9 दिनों के रौनक मेले के बाद 10वें दिन खुशी-खुशी मां को विदा किया जाता है और इसी के साथ दुर्गा पूजा समाप्त हो जाती है।