यहां कैजुअल डेट से हमारा मतलब है जब आप अपनी मर्जी या पसंद से किसी लड़के के साथ डेट पर जाती हैं। जबकि अरेंज्ड मैरिज डेट वह डेट होती है जब आप पेरेंट्स की पसंद के लड़के से या उनके द्वारा ऑनलाइन मैरिज साइट से देखे हुए लड़के से मिलने जाती हैं। क्या आपको पता है इन दोनों डेट में क्या अंतर है? क्या आप जानती हैं किस डेट में लड़कियां ज्यादा तनाव झेलती हैं? अगर आपका जवाब न है! तो आपको बता दें कि दोनों ही डेट अपने अपने स्तर पर तनावपूर्ण होती हैं। कैजुअल डेट में जहां आप पर हां बोलने का प्रेशर नहीं होता है तो वहीं लड़के को परखने की जिम्मेदारी सिर्फ आपकी होती है। जबकि अरेंज्ड मैरिज वाली डेट में पेरेंट्स लड़के की तो गारंटी लेते हैं लेकिन उस लड़के से आपकी सोच और अंडरस्टेंडिंग कितनी मिल रही है ये आपको अपने स्तर पर देखना होता है। आज इस आर्टिकल में हम आपको कैजुअल और अरेंज्ड मैरिज डेट के बीच कुछ ऐसे लॉजिक के बता रहे हैं जिन्हें न ही आपने पहले कभी पढ़ा होगा और न ही कोई बताएगा।

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किस तरह के कपड़े पहनें

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कैजुअल डेट— जब आप अपने ब्वॉयफ्रेंड या अपनी मर्जी के किसी लड़के के साथ डेट पर जाती हैं तो आप वो पहनती हैं जो आपको पसंद होता है। हालांकि यहां भी आप पर ये सोचने का प्रेशर होता है कि सामने वाले को कपड़े पसंद आएंगे या नहीं? कहीं वह आपके ड्रेसिंग सेंस से आपको जज तो नहीं करेगा? कहीं ऐसा तो नहीं होगा जिससे आप बहुत उम्मीद से मिलने जा रही हैं वह आपके कपड़ों से आपको रिजेक्ट कर दें? आदि।

अरेंज्ड मैरिज डेट— अरेंज्ड मैरिज डेट में आपको क्या पहनना है और सामने वाले के साथ कैसे ट्रीट करना है यह फैमिली वाले तय करते हैं। कई बार तो लड़कियों को वही पहनना होता है जो उनकी मां उनके रूम में रख देती है। यहां लड़कियां इसलिए अपनी मर्जी नहीं चलाती हैं क्योंकि अगर कपड़ों की वजह से उन्हें रिजेक्ट कर दिया तो सारा ठीकरा उन पर फोड़ा जाएगा।

हां बोलने का प्रेशर

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कैजुअल डेट— कैजुअल डेट में हां या न बोलने का फैसला सिर्फ आपका होता है। अगर आपको लगता है कि सामने वाले की सोच आपसे नहीं मिल रही तो आप तुरंत न बोल सकते हैं। साथ ही यहां जब भी आपको फील हो कि चीजें आपके हिसाब से नहीं हो रही हैं तो आप 'नो' कहकर आगे बढ़ जाते हैं।

अरेंज्ड मैरिज डेट— अरेंज्ड मैरिज की डेट में फैमिली वाले आपके जवाब का इंतजार करते हैं। अगर आपने हां बोला तब भी आपसे तमाम सवाल पूछे जाते हैं और अगर गलती से उनकी पसंद के लड़के को आपने न बोल दिया तो समझो आपकी शामत आ गई है। यानि कि यहां आप बहुत ही कन्फ्यूजन और तनाव में फैसला लेते हैं।

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दोस्त बनना

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कैजुअल डेट— कैजुअल डेट में कपल्स कहीं न कहीं शुरू में ही अच्छे दोस्त बन जाते हैं। यहां तब की जब रिलेशनशिप खत्म हो जाता है तब भी दो लोग दोस्त बने रहते हैं और कोई उनके इस चीज का कारण नहीं पूछता है।

अरेंज्ड मैरिज डेट— जबकि अरेंज्ड मैरिज की डेट में अगर किसी कारण से रिश्ता कैंसिल हो गया तो आप किसी भी कीमत पर एक दूसरे के दोस्त नहीं बन सकते हैं। अगर आप ऐसा करते हैं तो हमारा समाज आपके बारे में बहुत 'गलत गलत' बातें करता है।