Thu Sep 17, 2026 | Updated 05:54 PM IST

शाम का ढलता सूरज दूर कर सकता है डिप्रेशन, जानें क्या है Sunset Awe?

ढलते सूरज को देखना मानसिक और शारीरिक सेहत के लिए एक प्राकृतिक थेरेपी है, जिसे 'सनसेट ऑ' प्रभाव कहते हैं। जानते हैं इसके बारे में सबकुछ...
Updated:- 2026-09-17, 16:38 IST
sunset awe

शाम के समय ढलते हुए सूरज को देखना केवल एक सुंदर दृश्य नहीं, बल्कि हमारी मानसिक और शारीरिक सेहत के लिए एक कुदरती थेरेपी है। विज्ञान की भाषा में इसे 'सनसेट ऑ' (Sunset Awe) प्रभाव कहा जाता है। अध्ययनों से पता चलता है कि सूर्यास्त के समय मन में हैरान कर देने वाली सुंदर भावनाएं डिप्रेशन, चिंता और तनाव को दूर करने में अच्छा असर दिखाती हैं। ऐसे में यह जानना तो बनता है कि क्या है सनसेट ऑ, जानें मानसिक और शारीरिक सेहत पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? इसके लिए हमने कोच, हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट और साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं आगे...

क्या है 'सनसेट ऑ' (Sunset Awe) प्रभाव?

जब हम प्रकृति को देखते हैं, तो मन में एक विशेष प्रकार का विस्मय (Awe) पैदा होता है। एक्सपर्ट के मुताबिक, जब इंसान आसमान में ढलते सूरज के रंगों को देखता है, तो उसे एहसास होता है कि इस अनंत ब्रह्मांड के सामने उसकी अपनी परेशानियां और चिंताएं बहुत छोटी हैं। यह नजरिया इंसान को नकारात्मक सोच से बाहर निकालता है।

2 - 2026-09-17T163315.151

मानसिक और शारीरिक सेहत पर प्रभाव

सूर्यास्त का व्यू इतना गहरा होता है कि यह इंसान को पूरी तरह से आज के समय में ले आता है। इसके मुख्य वैज्ञानिक फायदे निम्नलिखित हैं-

1. तनाव और डिप्रेशन से मुक्ति

नियमित रूप से सूर्यास्त देखने से दिमाग में सकारात्मक तरंगे पैदा होती हैं। जिन लोगों ने प्रकृति के इस रूप को निहारा, वे मानसिक तनाव और अवसाद से आसानी से उबर पाए।

यह भी पढ़ें- बालों में 'मोगरे का गजरा' लगाना सिर्फ फैशन नहीं, समझें मूड व स्ट्रेस से जुड़ा दिलचस्प कनेक्शन

2. बेहतर नींद और बायोलॉजिकल क्लॉक

सूर्यास्त के समय प्राकृतिक रोशनी का कम होना हमारी बायोलॉजिकल क्लॉक को संकेत देता है कि अब दिन खत्म हो रहा है। इससे शरीर में नींद लाने वाला हार्मोन रिलीज होता है, जिससे अनिद्रा की समस्या दूर होती है।

3. याददाश्त और एकाग्रता में वृद्धि

कुदरत के ऐसे दृश्य को देखने से एकाग्रता में वृद्धि होती है। इससे ध्यान लगाने की क्षमता और याददाश्त में भी सुधार होता है।

1 - 2026-09-17T163317.257

निष्कर्ष

डिजिटल दुनिया और भागदौड़ भरी जिंदगी में 'गोल्डन आवर' यानी सूर्यास्त के समय कुछ मिनट बाहर बिताना एक मुफ्त दवा की तरह है। रोज ढलते सूरज को देखना न केवल आपके मिजाज को बेहतर बनाता है, बल्कि आपके शरीर और दिमाग को अंदर से तरोताजा भी कर देता है।

यह भी पढ़ें- Psychology Facts: वीकेंड पर घर में ही रहना क्यों पसंद करते हैं कुछ लोग? जानिए साइकोलॉजिकल सच

अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

Images: magnific

FAQ
क्या 'सनसेट ऑ' प्रभाव हमारी याददाश्त को भी मजबूत करता है?
जी बिल्कुल, प्रकृति के इस तरह के सुंदर दृश्यों को निहारने से दिमाग की एकाग्रता और जानकारी को याद रखने की क्षमता बढ़ती है।
प्रकृति को निहारने का हमारी मानसिक सेहत पर क्या असर पड़ता है?
यह व्यक्ति को पूरी तरह से आज के समय में ले आता है, जिससे मन शांत होता है और मानसिक थकावट दूर होती है।
सूर्यास्त देखने से नींद की समस्या में कैसे सुधार होता है?
शाम के समय प्राकृतिक रोशनी का कम होना हमारी बायोलॉजिकल क्लॉक को संकेत देता है कि दिन ढल गया है, जिससे नींद का हार्मोन रिलीज होता है और अनिद्रा दूर होती है।
Disclaimer

हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia.com पर हमसे संपर्क करें।