Mon Sep 14, 2026 | Updated 01:38 PM IST

क्या सोशल मीडिया बिगाड़ रहा है फोकस और मेंटल हेल्थ? जानें लगातार स्क्रॉलिंग के नुकसान

सोशल मीडिया पर लगातार स्क्रॉलिंग फोकस और मेंटल हेल्थ को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है, जिससे फोकस करने और इमोशनल बैलेंस बनाए रखने में चुनौतियां आ रही हैं।
Updated:- 2026-09-14, 12:39 IST
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डिजिटल दुनिया इतनी तेजी से बदल रही है कि इसकी रफ्तार को समझ पाना किसी के लिए भी आसान नहीं है। आज की युवा पीढ़ी एक ऐसे माहौल में बड़ी हो रही है, जिसका सामना उनसे पहले किसी पीढ़ी ने नहीं किया। मोबाइल ऐप्स को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि लोगों को उनकी लत लग जाए। यही वजह है कि सोशल मीडिया बहुत खामोशी से युवाओं के सोचने, महसूस करने और दूसरों से जुड़ने के तरीके को बदल रहा है।

इस पूरी समस्या की जड़ में बिना वजह स्क्रीन स्क्रॉल करने की आदत है। शुरुआत में समय बिताने का यह तरीका बहुत आसान लगता है, लेकिन असल में यह आपकी मानसिक क्षमता और भावनात्मक सेहत को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। जिंदगी में आगे बढ़ने और सफलता पाने के लिए इस आदत के खतरों को समय रहते समझना बहुत जरूरी है, ताकि युवा अपने ध्यान और फोकस को बचा सकें। इसके लिए हमने कोच, हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट और साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं आगे...

दिमाग पर कैसे असर डाल रही है स्क्रॉलिंग?

दिमाग की यह खासियत है कि आप जिस चीज पर सबसे ज्यादा समय बिताते हैं, यह उसी के हिसाब से खुद को ढाल लेता है। जब आप दिन भर मोबाइल पर छोटे-छोटे रील्स और शॉर्ट वीडियो देखते हैं, तो आपके दिमाग को हर सेकंड में नई और तेज चीज देखने की आदत पड़ जाती है।

हर वक्त मिलने वाले इस तुरंत मनोरंजन की वजह से किसी भी काम में लंबे समय तक ध्यान लगाना बहुत मुश्किल हो जाता है। किताब पढ़ना, कोई नया क्रिएटिव काम करना या दोस्तों की बातों को ध्यान से सुनना भी भारी लगने लगता है। दिमाग एक तरह के चक्र में फंस जाता है। जैसे ही माहौल थोड़ा शांत होता है या बोरियत महसूस होती है, हाथ अपने आप फोन की तरफ चला जाता है। यह आदत इतनी हावी हो जाती है कि फोन में कोई नोटिफिकेशन न आने पर भी हम बार-बार स्क्रीन चेक करते रहते हैं।

मानसिक सेहत और नींद पर बढ़ता दबाव

सोशल मीडिया सिर्फ आपके फोकस को ही खराब नहीं करता, बल्कि यह आपकी सोच और खुद को देखने के नजरिए को भी बदल देता है। सोशल मीडिया पर लोग अक्सर अपनी जिंदगी के सबसे खूबसूरत और परफेक्ट पलों को ही शेयर करते हैं। जब युवा अपनी आम जिंदगी की तुलना दूसरों की इस सजाई हुई दुनिया से करते हैं, तो उनके अंदर अनजाने में ही हीन भावना आने लगती है। यह लगातार चलने वाली तुलना युवाओं के आत्मविश्वास को कमजोर कर देती है, जिससे एक अनजाना तनाव और घबराहट मन में घर कर लेती है।

इसके अलावा, देर रात तक ब्राइट स्क्रीन को देखते रहने से नींद का पूरा चक्र बिगड़ जाता है। मोबाइल की तेज रोशनी दिमाग को भ्रमित कर देती है कि अभी दिन ही है। इससे गहरी और सुकून भरी नींद नहीं मिल पाती और सुबह उठने पर भी शरीर और दिमाग में थकान बनी रहती है।

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अपना समय और फोकस वापस पाने के आसान उपाय

इन समस्याओं से बचने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप फोन चलाना बंद कर दें या सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट कर दें। असली जरूरत इस बात की है कि आप टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किस तरह करते हैं। मोबाइल को अपनी सहूलियत और सीख के लिए इस्तेमाल करें, न कि इसे अपना ध्यान भटकाने दें।

1. सुबह की शुरुआत फोन से न करें

सोकर उठने के बाद शुरुआती 30 मिनट तक फोन को खुद से दूर रखें। ऐसा करने से आपके दिमाग को शांत रहने का मौका मिलता है और दिन की शुरुआत बिना किसी तनाव के होती है।

2. अपनी सोशल मीडिया फीड को क्लिन करें

ऐसे सभी अकाउंट्स को अनफॉलो या म्यूट कर दें जो आपको नीचा महसूस कराते हैं, गुस्सा दिलाते हैं या आपके अंदर असुरक्षा पैदा करते हैं। केवल उन्हीं पेजों से जुड़ें जो आपको कुछ नया सिखाते हों या खुशी देते हों।

3. स्क्रीन टाइम की सीमा तय करें

दिन भर में कुछ समय ऐसा तय करें जब आप फोन का बिल्कुल भी इस्तेमाल न करें। काम करते समय फोन को साइलेंट मोड पर रखना सीखें।

निष्कर्ष

अपनी जिंदगी और समय पर आपका खुद का नियंत्रण होना बहुत जरूरी है। असली सफलता या नए विचार किसी एल्गोरिदम या सोशल मीडिया फीड से नहीं मिलते, बल्कि आपकी अपनी मेहनत और सोच से आते हैं। जब आप फोन से थोड़ी दूरी बनाएंगे, तो आपको मानसिक शांति मिलेगी और आपका ध्यान बेहतर होगा।

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FAQ
क्या देर रात फोन चलाने से वाकई नींद पर बुरा असर पड़ता है?
हां, मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली 'ब्लू लाइट' दिमाग में 'मेलाटोनिन' (नींद लाने वाले हार्मोन) के बनने को रोकती है। इससे नींद की क्वालिटी खराब हो जाती है।
सोशल मीडिया से होने वाली एंग्जायटी (घबराहट) से कैसे बचें?
दूसरों की लाइफस्टाइल से अपनी तुलना करना बंद करें। अपनी सोशल मीडिया फीड को साफ रखें, नकारात्मक अकाउंट्स को अनफॉलो करें, दोस्तों व परिवार के साथ समय बिताएं।
सोशल मीडिया एडिक्शन (लत) के शुरुआती संकेत क्या हैं?
बिना किसी काम के बार-बार फोन चेक करना, सुबह उठते ही सबसे पहले स्क्रॉल करना, काम या पढ़ाई के दौरान ध्यान न लगना और फोन दूर होने पर घबराहट होना सोशल मीडिया की लत के मुख्य संकेत हैं।
Disclaimer

हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia.com पर हमसे संपर्क करें।