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डोपामिन से लेकर सेरोटोनिन तक: मूड और व्यवहार को कैसे कंट्रोल करते हैं हार्मोन्स?

व्यक्ति की मनोदशा केवल बाहरी लोगों के व्यवहार से प्रभावित नहीं होती, बल्कि उसके स्वभाव को निर्धारित करने में ब्रेन में मौज़ूूद न्यूरोट्रांसमीटर्स और हॉर्मोंस का बहुत बड़ा योगदान होता है। यह लेख पढऩे के बाद आपको भी इस बात पर यकीन हो जाएगा कि हमेशा दूसरों की वजह से हमारा मूड ऑफ नहीं होता...
Updated:- 2026-09-19, 06:00 IST
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हमारे आसपास जितने भी लोग होते हैं, सबके व्यक्तित्व में कोई न कोई ऐसी खासियत होती है, जो उन्हें दूसरों से अलग करती है। आपने कभी सोचा है कि इसकी क्या वजह हो सकती है? फोर्टिस हॉस्पिटल गुरुग्राम के न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. प्रवीण गुप्ता बता रहे हैं कि न्यूरोट्रांसमीटर्स और हार्मोन्स व्यक्ति के व्यवहार को कैसे प्रभावित करते हैं।

कैसे काम करता है ब्रेन?

मानव दिमाग किसी कंप्यूटर की तरह काम करता है। इसमें कुछ स्पेशल मेसेंजर्स होते हैं, जो किसी वायरिंग की तरह पूरे शरीर में मौजूद होते हैं, इन्हें न्यूरोट्रांसमीटर्स कहा जाता है। इनकी मदद से ही हमारा दिमाग शरीर के सभी हिस्सों तक मैसेज पहुंचाने का काम करता है। आमतौर पर ऐसा देखा जाता है कि किसी गंभीर बीमारी, दवाओं के साइड इफेक्ट या बढ़ती उम्र की वजह से धीरे-धीरे न्यूरोट्रांसमीटर्स खत्म होने लगते हैं। इसी वजह से बुजुर्गों में डिमेंशिया, अल्जाइमर्स और पार्किंसंस जैसी मेमोरी से जुड़ी बीमारियां ज्यादा नजर आती हैं। जहां तक इनके द्वारा व्यक्ति के व्यवहार को तय करने की बात है, तो इसमें डोपामिन और सेरोटोनिन नाम के न्यूरोट्रांसमीटर्स मेन रोल निभाते हैं।

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ऊर्जावान बनाता है डोपामिन

यह ऐसा न्यूरोट्रांसमीटर है, जो व्यक्ति की मेमोरी, फोकस, प्रॉब्लम सॉल्विंग और सीखने की कैपेसिटी को बढ़ाता है। इसकी एक्टिविटी की वजह से ही व्यक्ति नए काम करने के लिए मोटिवेट होता है। जब वह किसी गोल की ओर बढ़ रहा होता है, तो डोपामिन तेजी से काम करने लगता है। यह अच्छी नींद के लिए भी जिम्मेदार होता है। इसकी कमी से व्यक्ति को डिप्रेशन भी हो सकता है। अल्कोहल या ड्रग्स के एडिक्शन के शिकार लोगों में भी डोपामिन की कमी पाई जाती है। व्यक्ति के अच्छे बिहेवियर के लिए इसकी क्वांटिटी बैलेंस्ड होनी चाहिए। इसकी ज्यादा मात्रा से व्यक्ति का बिहेवियर अग्रेसिव हो जाता है और सीरियस कंडीशन में वह साइकोसिस जैसी गंभीर बीमारी का भी शिकार हो जाता है। दूसरी ओर इसकी कमी से व्यक्ति बिल्कुल शांत और सुस्त हो जाता है।

सेरोटोनिन का साथ

यह एक पॉजिटिव हार्मोन है, जो व्यक्ति में नींद, भूख और सेक्स की इच्छा तय करता है और उसे पॉजिटिव बनाता है। इसका अच्छा लेवल हमें खुश और एक्टिव बनाने में हेल्पफुल होता है। इसकी कमी से व्यक्ति को डिप्रेशन हो सकता है। इसकी ज्यादा मात्रा से व्यक्ति ओवर-एक्साइटेड हो जाता है। इसकी बढ़ोतरी गुस्से के लिए भी जिम्मेदार होती है। इससे पैदा होने वाले मूड को हाइपो-मेनिया कहा जाता है। सेरोटोनिन के इमबैलेंस की वजह से ही व्यक्ति बाइपोलर डिसऑर्डर जैसी प्रॉब्लम का शिकार हो जाता है।

जोशीला नॉरएड्रिनालिन

यह एक ऐसा हार्मोन है, जिसकी वजह से व्यक्ति में जोश भर जाता है। युद्ध और खेल के मैदान में सैनिकों और खिलाड़ियों के ब्रेन में इसका सीक्रेशन बढ़ जाता है। यह ब्लड प्रेशर और हार्टबीट को कंट्रोल करता है। इसका बैलेंस्ड लेवल व्यक्ति को खुश और फिट बनाए रखने में हेल्पफुल होता है। जहां इसकी कमी से थकावट फील होती है, वहीं इसकी ज्यादा मात्रा की वजह से व्यक्ति को हाई ब्लड प्रेशर की प्रॉब्लम हो सकती है।

प्रेम से जुड़ा है ऑक्सिटोसिन

यह हार्मोन प्यार, उम्मीद, भरोसे और केयरिंग नेचर से जुड़ा है। यह हार्मोन मैमल ग्रुप के सभी जीवों में मौजूद होता है। दरअसल, लेबर पेन के दौरान महिलाओं के ब्रेन से इसी हार्मोन का सीक्रेशन होता है। इसकी वजह से डिलीवरी के दौरान यूट्रस का साइज फैलता है और मां के शरीर में दूध बनने के प्रोसेस में भी इसका बड़ा रोल होता है। इस हार्मोन की वजह से बच्चे के जन्म के बाद मां उसके साथ इमोशनल बॉन्डिंग फील करते हुए उसकी केयर करती है। इस हार्मोन की कमी से महिलाओं में उदासी और निराशा जैसे सिम्टम्स नजर आते हैं, लेकिन पॉजिटिव सोच के कारण इसका लेवल अपने आप बढ़ जाता है।

दर्द दूर करे एंडोर्फिंस

ब्रेन की पिट्यूटरी ग्लैंड से 20 तरह के एंडोर्फिंस हार्मोन्स का सीक्रेशन होता है, जो मानव शरीर के लिए कई तरह से काम करते हैं। हर व्यक्ति के शरीर में यह हार्मोन नेचुरल रूप से अलग-अलग लेवल पर होता है। यह हार्मोन हमारे लिए पेन किलर की तरह काम करता है। जब शरीर के किसी भी हिस्से में दर्द फील होता है, तो हमारा ब्रेन ज्यादा क्वांटिटी में एंडोर्फिन रिलीज करने लगता है, जिससे व्यक्ति को दर्द सहने की ताकत मिलती है। इमरजेंसी सिचुएशन में नेचुरल रूप से इसका सीक्रेशन बढ़ जाता है। महिलाओं में लेबर पेन के दौरान इसका लेवल बढ़ जाता है और इसी वजह से वे दर्द बर्दाश्त कर पाती हैं।

मुश्किल का सहारा कॉर्टिसोल

कई बार ऐसा भी होता है कि जब व्यक्ति के शरीर में खुशी और आराम का अहसास कराने वाले सेरोटोनिन, डोपामिन, और नॉरएड्रिनालिन जैसे हैप्पीनेस हार्मोन्स का लेवल बहुत कम हो जाता है, तो ऐसी कंडीशन में कॉर्टिसोल हार्मोन अपना काम शुरू कर देता है। इसकी एक्टिविटी की वजह से व्यक्ति थोड़ी देर के लिए टेंशन में जरूर आता है, लेकिन यह प्रॉब्लम का सॉल्यूशन ढूंढने में उसकी मदद करता है।

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सेक्स से जुड़े हार्मोन्स

टीनेज में लड़कियों के शरीर में फीमेल सेक्स हार्मोन प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन का सीक्रेशन शुरू हो जाता है, जो उनके फिजिकल डेवलपमेंट में हेल्पफुल होता है। इसकी वजह से ही उनमें केयर, आर्टिस्टिक नेचर और पेशेंस जैसे फीमेल ट्रेड्स पाए जाते हैं। वहीं लड़कों में पाए जाने वाले मेल हार्मोन टेस्टोस्टेरोन की वजह से उनमें जोश, लीडरशिप और निडरता जैसे मेल ट्रेड्स का डेवलपमेंट होता है। महिला और पुरुष दोनों के शरीर में अपोजिट सेक्स वाले हार्मोन्स लिमिटेड क्वांटिटी में एक्टिव रहते हैं, जो उनकी पर्सनालिटी को बैलेंस करते हैं। इसी वजह से महिलाओं में हिम्मत और पुरुषों में केयरिंग नेचर जैसी क्वालिटीज नजर आती हैं।

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थायरॉयड और मूड

गले में मौजूद थायरॉयड ग्लैंड से T3 और T4 हार्मोन का सीक्रेशन होता है। वैसे तो यह हार्मोन पुरुषों के शरीर में भी मौजूद होता है, पर महिलाओं में अक्सर इसके इमबैलेंस की प्रॉब्लम होती है। इसकी कमी से उन्हें सुस्ती, डिप्रेशन, वेट लॉस और कब्ज जैसी प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। वहीं इसके ज्यादा लेवल की वजह से उनमें घबराहट, गुस्सा, अनिद्रा, वेट गेन और लूज मोशन जैसी प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। वैसे तो ज्यादातर महिलाओं में हाइपोथायरॉइडिज्म यानी इस हार्मोन की कमी से जुड़ी प्रॉब्लम्स देखने को मिलती हैं।

अब तो आप भी जान गए होंगे कि किसी इंसान के नेचर को तय करने में इन चीजों का कितना बड़ा रोल होता है। इसलिए अगली बार अगर आपको किसी का बिहेवियर पसंद न आए, तो इसके लिए उसे ब्लेम करने के बजाय इन हार्मोन्स को याद कर लें, जो लोगों के दिमाग और शरीर में इतना उथल-पुथल मचाते हैं।

यह भी न भूलें

रेगुलर एक्सरसाइज और मॉर्निंग वॉक करें। इससे शरीर में एंडोर्फिंस हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है और व्यक्ति स्ट्रेस-फ्री फील करता है।

  • अच्छी मेमोरी के लिए डेली 7-8 घंटे की नींद जरूर लें।
  • सुडोकू, पहेलियां और चेस जैसे गेम्स खेलने से भी ब्रेन की बहुत अच्छी एक्सरसाइज होती है।
  • मेंटल स्ट्रेस की कंडीशन में अगर चॉकलेट और चटपटी चीजें खाई जाएं तो ब्रेन में एंडोर्फिन हार्मोन तेजी से रिलीज होने लगता है, जो स्ट्रेस कम करने में हेल्प करता है।
  • स्मोकिंग की हैबिट और पॉल्यूशन से बचने की कोशिश करें, क्योंकि धुएं में मौजूद जहरीले एलिमेंट्स से दिमाग की काम करने की क्षमता कम होती है।

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लेखक- विनीता

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