History Of Lipstick: जब लि‍पस्‍ट‍िक नहीं थी, तब कैसे होंठों पर लाली लगाती थीं मह‍िलाएं? जानें पूरा द‍िलचस्‍प क‍िस्‍सा

आज के समय में लिपस्टिक का इस्‍तेमाल हम सभी करते हैं। बाजार में आपको हर रंग और हर तरह की लिपस्टिक आसानी से मिल जाती है, लेकिन क्या आप जानती हैं क‍ि जब लिपस्टिक का आविष्कार नहीं हुआ था, तब महिलाएं अपने होंठों को रंगने के लिए क्या इस्तेमाल करती थीं? हम आपको इसका द‍िलचस्‍प इ‍ति‍हास बता रहे हैं।
Updated:- 2026-06-19, 14:05 IST
lipstick history

आज के समय में सभी मह‍िलाएं और लड़क‍ियां मे‍कअप जरूर करती हैं। मेकअप करते समय काजल, आईलाइनर, रूज या फाउंडेशन का इस्‍तेमाल जरूर क‍िया जाता है। ल‍िपस्‍ट‍िक के ब‍िना तो पूरा मेकअप ही अधूरा लगता है। ये अब हर मेकअप क‍िट में जरूर होती है। बाजारों में आपको कई तरह और कई कलर्स में ल‍िपस्‍ट‍िक म‍िल जाएंगी, लेक‍िन क्‍या आपने कभी सोचा है क‍ि जब ल‍िपस्‍ट‍िक नहीं म‍िलती थी तो मह‍िलाएं अपने होंठों को कलर करने के ल‍िए क्‍या लगाती थीं?

ये आपको सुनने में भले ही नॉर्मल लग रहा हाेगा लेकि‍न इसका क‍िस्‍सा बहुत ही द‍िलचस्‍प है। दरअसल, हजारों साल पहले मह‍िलाएं ल‍िपस्‍ट‍िक की जगह नेचुरल चीजों से होंठों को कलर करती थीं। आज हम आपको अपने इस लेख में बताएंगे क‍ि ल‍िपस्‍ट‍िक आने से पहले होंठों की लाली का ये सफर कैसा था? आइए जानते हैं-

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हजारों साल पुराना है होंठ रंगने का ट्रेंड

ल‍िपस्‍ट‍िक का इत‍िहास करीब 5000 साल पुराना माना जाता है। होंठों को रंगने की ये परंपरा कोई नई नहीं है। प्राचीन सभ्‍यताओं में मह‍िलाएं और पुरुष होंठों को सजाने के ल‍िए नेचुरल चीजाें का इस्‍तेमाल करते थे। आपको बता दें क‍ि ये स‍िर्फ सुंदर द‍िखने के लि‍ए नहीं था बल्‍क‍ि कुछ जगहों पर सामाज‍िक और सांस्‍कृत‍िक पहचान का भी ह‍िस्‍सा था।

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प्राचीन मिस्र में इस्तेमाल होते थे नेचुरल कलर्स

ऐसा कहा जाता है क‍ि प्राचीन म‍िस्‍त्र में मह‍ि‍लाएं होंठों को कलर करने के ल‍िए पौधों और कुछ धातुओं का इस्‍तेमाल करती थीं। भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में महिलाएं फूलों और फलों से मिलने वाले नेचुरल कलर से होंठों को रंगा करती थीं। जैसे चुकंदर से न‍िकलने वाला लाल रस स्‍क‍िन और होंठों पर रंग छोड़ने का काम करता था। कुछ जगहों पर तो लाल रंग के फूलों की पंखुड़ियों को पीसकर भी होंठों पर लाली लगाई जाती थी।

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कीड़े मकौड़ों को पीसकर भी होंठों को रंगती थीं मह‍िलाएं

कहा जाता है क‍ि मिस्त्र की रानी क्लियोपेट्रा कीड़े मारकर अपने होठों पर मला करती थीं। इससे उनके होंठ रेड हो जाते थे। वहीं, सिंधु घाटी की सभ्यता की महिलाएं गेरू को लिपिस्टिक की तरह इस्‍तेमाल करती थीं। इसके अलावा कुछ जगहों पर रत्‍नों को पीसकर भी ल‍िपस्‍ट‍िक के रूप में इस्‍तेमाल क‍िया जाता था।

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तो फ‍िर कब हुआ ल‍िपस्‍ट‍िक का आव‍िष्‍कार?

सबसे पहले 1884 में फ्रेंच परफ्यूम की कंपनी गुएरलेन ने पहली बार लिपस्टिक बनाया। इस ल‍िपस्‍ट‍िक को हिरण के शरीर से निकलने वाले फैट, बी वैक्स और कैस्टर ऑयल से बनाया गया था। इसके बाद इसे रेशम के कागज में लपेटा जाता था। आज ज‍िस तरह से आपको बाजारों में ल‍िपस्‍ट‍िक म‍िलती है, इसे 1915 में मॉरिस लेवी लेकर आए थे। 1920 तक आते-आते लिपस्टिक प्लम, बैंगनी, चेरी, डार्क रेड और ब्राउन कलर्स में आने लगीं। धीरे-धीरे ये मेकअप का सबसे बड़ा ह‍िस्‍सा बन गई।

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ताे अगर आप भी ल‍िपस्‍ट‍िक लगाती हैं तो मालूम होना चाह‍िए क‍ि इसका इत‍िहास आज का नहीं बल्‍क‍ि हजारों साल पुराना है। साथ ही अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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